विज्ञापन

कमलेश राजहंस: दुनिया के हर रिश्तों पर है भारी बेटी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            दुनिया के हर रिश्तों पर है भारी बेटी 
        
                                                    
                            
दुख सुख में देती है साथ हमारी बेटी 

अम्मा की गोदी में जब वो हंसती है 
लगती है सचमुच गुलाब की क्यारी बेटी 

नींद उड़ाती है बाबुल के आंखों की 
जब घर में होती है कोई कुंवारी बेटी 

उसको नौ दिन बाद विसर्जित होना है 
नव दुर्गा पर रोपी हुई जवारी बेटी 

सारा घर त्योहार मनाता है उस दिन 
जिस दिन अपने मैके आती प्यारी बेटी 

डोरा देह कटोरा सी उसकी आंखें
पूनम के चंदा सी लगती न्यारी बेटी 

गम का बड़ा समंदर वह पी जाती है 
अपनों के अत्याचारों से हारी बेटी 

अम्मा से सारा दुख साझा करती है 
नहीं छुपाती है अपनी लाचारी बेटी 

जब उसके पावन सतीत्व पर वार हुआ 
बन जाती है जौहर की चिनगारी बेटी 

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o  



 
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile