{"_id":"6adcae91eca60eca38000120","slug":"amit-shah-delhi-cm-rekha-gupta-visit-delhi-police-hq-to-discuss-law-and-order-situation-in-capital-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"शाह-रेखा गुप्ता की दिल्ली पुलिस मुख्यालय में बैठक: इंडिया ब्लॉक की रैली से पहले कानून-व्यवस्था पर चर्चा, क्या","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
शाह-रेखा गुप्ता की दिल्ली पुलिस मुख्यालय में बैठक: इंडिया ब्लॉक की रैली से पहले कानून-व्यवस्था पर चर्चा, क्या
Sat, 24 Oct 2026 06:42 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 24 Oct 2026 06:42 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब इंडिया ब्लॉक एक नवंबर को बड़ी रैली की तैयारी कर रहा है। शाह ने क्या निर्दश दिए? पढ़िए रिपोर्ट
विज्ञापन
गृह मंत्री अमित शाह ने की कानून-व्यवस्था की समीक्षा
- फोटो : PTI
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय का दौरा किया। यहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की गई। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पुलिस मुख्यालय पहुंचीं।
बैठक में कौन-कौन मौजूद थे?
गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख महेश दीक्षित सहित गृह मंत्रालय व दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस ने जिस तरह से कानून व्यवस्था की स्थिति संभाली, गृह मंत्री ने इसके लिए अफसरों और जवानों की तारीफ की है।
गृह मंत्री ने क्या कहा?
गृह मंत्री ने कहा, किसी भी कानून व्यवस्था खराब करने का अधिकार नहीं है। ऐसे तत्वों के साथ दिल्ली पुलिस सख्ती से निपटेगी। शाह ने कहा, दिल्ली में पुलिस को कुछ इलाकों में अपनी गश्त बढ़ानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं, वृद्धों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सीसीटीवी और एआई के जरिए संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाए।
विज्ञापन
जुलाई के बाद से ही दिल्ली पुलिस, विरोध प्रदर्शनों और मार्च के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत कर रही है। जुलाई में हिंसक प्रदर्शन के दौरान अनेक प्रदर्शनकारी और दिल्ली पुलिस के जवान घायल हो गए थे। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। पैलेट गन का इस्तेमाल करने का मामला दिल्ली पुलिस के गले की फांस बन गया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
पिछले दिनों भी कनॉट प्लेस और दूसरे क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन व मार्च निकाले गए। हालांकि, इस दौरान दिल्ली पुलिस ने धैर्य से काम लिया और कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ने दी। अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से कहा, वे आने वाले दिनों में भी तय प्रोटोकॉल के तहत कानून व्यवस्था बनाए रखें। दिल्ली पुलिस के साथ सीएपीएफ की कंपनियां भी तैनात की गई हैं।
शाह ने कहा, दिल्ली पुलिस ऐसे लोगों पर नजर रखे, जो कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। स्थिति बेकाबू हो जाए, केवल उसी वक्त सक्रिय नहीं होना है, उससे पहले ही स्थिति का अनुमान लगाना है। अभी तक हुए प्रदर्शनों में कौन सा परंपरागत और कौन सा नया तरीका देखा गया है, इसका अध्ययन करें। उसके बाद किसी भी घटना को उसके होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
गृह मंत्री ने आईबी और दिल्ली पुलिस के खुफिया प्रकोष्ठ को भी 24 घंटे अलर्ट पर रहने के लिए कहा। राष्ट्रीय राजधानी के सभी प्रवेश मार्गों पर इस तरह का इंतजाम हो कि हुड़दंगियों या असामाजिक तत्वों को भीतर के हिस्सों में आने का मौका ही न मिल सके।
दिल्ली में सीएपीएफ की कितनी कंपनियां तैनात?
विरोध प्रदर्शनों के चलते इस माह के शुरू में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' की ढाई सौ से ज्यादा कंपनियों को दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया था। इन केंद्रीय बलों की कंपनियों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सबसे पहले पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ की 70 कंपनियां को दिल्ली बुलाया गया। जम्मू से भी सीआरपीएफ की कई कंपनियां दिल्ली पहुंची थीं। इनके अलावा बीएसएफ की कंपनियों को भी एयरलिफ्ट किया गया। दिल्ली पुलिस के साथ तैनात सीएपीएफ की 273 कंपनियों में से 125 कंपनियां, सीआरपीएफ की हैं।
खुफिया अलर्ट के चलते 31 अक्तूबर तक बढ़ी तैनाती
सीएपीएफ की कंपनियों में महिला कर्मियों की भी 20 इकाइयां शामिल हैं। आरएएफ की 20, बीएसएफ की 46, आईटीबीपी की 39, एसएसबी की 31 और सीआईएसएफ की 12 कंपनियों को भी राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है। दिल्ली में औचक विरोध-प्रदर्शनों की आशंका के चलते केंद्रीय बलों की तैनाती को 31 अक्तूबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को 'औचक प्रदर्शन' होने का इनपुट दिया था। इसमें कहा गया है कि 'सीजेपी' और दूसरे 'विपक्षी' दलों सहित कई संगठन 'संवेदनशील' स्थानों पर औचक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
समीक्षा के बाद आगे बढ़ सकती है तैनाती
चूंकि अब नई दिल्ली के जंतर-मंतर को बंद कर दिया गया है और प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान तय किए गए हैं, ऐसे में कई संगठन, दोबारा से जंतर मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और रेल भवन के आसपास प्रदर्शन के लिए भीड़ जुटा सकते हैं। इसी के मद्देनजर, दिल्ली में 31 अक्तूबर तक सीएपीएफ तैनात रहेगी। कानून व्यवस्था की समीक्षा के आधार पर सीएपीएफ की तैनाती को आगे बढ़ाया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोरी के मुद्दे को लेकर रैली करने की घोषणा की है।
ये भी पढ़ें: 'आतंकवाद के आरोपी को इतनी छूट क्यों दी गई': अमेरिकी नागरिक की रिहाई पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा; पूछे ये सवाल
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर विपक्षी दल और छात्र संगठन निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।
इसी बीच, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दलों ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने का एलान किया है। यह रैली मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच बुलाई गई है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
एक नवंबर की रैली पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि रैली का फैसला इंडिया ब्लॉक के दलों से बातचीत के बाद संयुक्त रूप से लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
उन्होंने कहा, एक नवंबर की रैली कांग्रेस पार्टी और इंडिया ब्लॉक की संयुक्त रैली है। इसका फैसला गठबंधन के दलों से बातचीत के बाद लिया गया है। तारीख को लेकर कोई खास बात नहीं है। हम लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए हमने कई तरह के कार्यक्रम और व्यवस्थाएं की हैं।
माथेर ने कहा कि इस रैली में देशभर के राजनीतिक दल शामिल होंगे। सभी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर के राजनीतिक दल एक साथ आएंगे।
उन्होंने कहा, यह देशभर के लोगों की बड़ी रैली होगी। इसमें अलग-अलग राजनीतिक दल शामिल होंगे। सभी एक साथ आकर मजबूती से मांग करेंगे कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक या विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। माथेर ने कहा कि रैली के जरिये विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता बहाल करने का साझा संदेश देगा।
केसी वेणुगोपाल ने रैली को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह रैली ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच विपक्ष की एकजुटता का मजबूत संदेश देगी।
उन्होंने कहा, ज्ञानेश और उनकी टीम ने मोदी-शाह के इशारे पर कथित तौर पर जो 'वोट चोरी' की है, उसके खिलाफ हमारे कार्यक्रम ऐतिहासिक होंगे। देशभर से बड़ी संख्या में लोग इनमें शामिल होंगे। इससे भारत के हर कोने तक यह मजबूत संदेश जाएगा कि हम अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं और इन 'वोट चोरों' को सत्ता से बाहर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वेणुगोपाल ने पांच अक्तूबर को ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नवंबर को रैली करने की घोषणा की थी। यह घोषणा एसआईआर के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच की गई थी।
कांग्रेस रैली का विरोध कर रहे व्यापारी संगठन
दूसरी ओर, चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) सहित दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस एवं इंडिया ब्लॉक की ओर से एक नवंबर की प्रस्तावित रैली को स्थगित करने की मांग की है। इस बाबत दिल्ली के व्यापारियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। इसके पीछे व्यापारियों द्वारा जो कारण बताए गए हैं, उनमें त्योहारी सीजन में रैली के चलते आर्थिक नुकसान होने की बात कही गई है।
व्यापारी संगठनों ने 10,000 करोड़ के नुकसान की आशंका जताई है। व्यापारियों ने पत्र में यह भी लिखा है कि अक्तूबर में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हुए विरोध प्रदर्शनों और मार्च के चलते पहले ही उन्हें 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
विज्ञापन
बैठक में कौन-कौन मौजूद थे?
गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह सचिव गोविंद मोहन और खुफिया ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख महेश दीक्षित सहित गृह मंत्रालय व दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में दिल्ली पुलिस ने जिस तरह से कानून व्यवस्था की स्थिति संभाली, गृह मंत्री ने इसके लिए अफसरों और जवानों की तारीफ की है।
विज्ञापन
गृह मंत्री ने क्या कहा?
गृह मंत्री ने कहा, किसी भी कानून व्यवस्था खराब करने का अधिकार नहीं है। ऐसे तत्वों के साथ दिल्ली पुलिस सख्ती से निपटेगी। शाह ने कहा, दिल्ली में पुलिस को कुछ इलाकों में अपनी गश्त बढ़ानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं, वृद्धों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। सीसीटीवी और एआई के जरिए संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाए।
विज्ञापन
जुलाई के बाद से ही दिल्ली पुलिस, विरोध प्रदर्शनों और मार्च के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए खासी मशक्कत कर रही है। जुलाई में हिंसक प्रदर्शन के दौरान अनेक प्रदर्शनकारी और दिल्ली पुलिस के जवान घायल हो गए थे। पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। पैलेट गन का इस्तेमाल करने का मामला दिल्ली पुलिस के गले की फांस बन गया। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
पिछले दिनों भी कनॉट प्लेस और दूसरे क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन व मार्च निकाले गए। हालांकि, इस दौरान दिल्ली पुलिस ने धैर्य से काम लिया और कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ने दी। अमित शाह ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से कहा, वे आने वाले दिनों में भी तय प्रोटोकॉल के तहत कानून व्यवस्था बनाए रखें। दिल्ली पुलिस के साथ सीएपीएफ की कंपनियां भी तैनात की गई हैं।
शाह ने कहा, दिल्ली पुलिस ऐसे लोगों पर नजर रखे, जो कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं। स्थिति बेकाबू हो जाए, केवल उसी वक्त सक्रिय नहीं होना है, उससे पहले ही स्थिति का अनुमान लगाना है। अभी तक हुए प्रदर्शनों में कौन सा परंपरागत और कौन सा नया तरीका देखा गया है, इसका अध्ययन करें। उसके बाद किसी भी घटना को उसके होने से पहले ही रोका जा सकेगा।
गृह मंत्री ने आईबी और दिल्ली पुलिस के खुफिया प्रकोष्ठ को भी 24 घंटे अलर्ट पर रहने के लिए कहा। राष्ट्रीय राजधानी के सभी प्रवेश मार्गों पर इस तरह का इंतजाम हो कि हुड़दंगियों या असामाजिक तत्वों को भीतर के हिस्सों में आने का मौका ही न मिल सके।
दिल्ली में सीएपीएफ की कितनी कंपनियां तैनात?
विरोध प्रदर्शनों के चलते इस माह के शुरू में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' की ढाई सौ से ज्यादा कंपनियों को दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया था। इन केंद्रीय बलों की कंपनियों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी शामिल हैं। प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सबसे पहले पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ की 70 कंपनियां को दिल्ली बुलाया गया। जम्मू से भी सीआरपीएफ की कई कंपनियां दिल्ली पहुंची थीं। इनके अलावा बीएसएफ की कंपनियों को भी एयरलिफ्ट किया गया। दिल्ली पुलिस के साथ तैनात सीएपीएफ की 273 कंपनियों में से 125 कंपनियां, सीआरपीएफ की हैं।
खुफिया अलर्ट के चलते 31 अक्तूबर तक बढ़ी तैनाती
सीएपीएफ की कंपनियों में महिला कर्मियों की भी 20 इकाइयां शामिल हैं। आरएएफ की 20, बीएसएफ की 46, आईटीबीपी की 39, एसएसबी की 31 और सीआईएसएफ की 12 कंपनियों को भी राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में तैनात किया गया है। दिल्ली में औचक विरोध-प्रदर्शनों की आशंका के चलते केंद्रीय बलों की तैनाती को 31 अक्तूबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को 'औचक प्रदर्शन' होने का इनपुट दिया था। इसमें कहा गया है कि 'सीजेपी' और दूसरे 'विपक्षी' दलों सहित कई संगठन 'संवेदनशील' स्थानों पर औचक विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
समीक्षा के बाद आगे बढ़ सकती है तैनाती
चूंकि अब नई दिल्ली के जंतर-मंतर को बंद कर दिया गया है और प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान तय किए गए हैं, ऐसे में कई संगठन, दोबारा से जंतर मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और रेल भवन के आसपास प्रदर्शन के लिए भीड़ जुटा सकते हैं। इसी के मद्देनजर, दिल्ली में 31 अक्तूबर तक सीएपीएफ तैनात रहेगी। कानून व्यवस्था की समीक्षा के आधार पर सीएपीएफ की तैनाती को आगे बढ़ाया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोरी के मुद्दे को लेकर रैली करने की घोषणा की है।
ये भी पढ़ें: 'आतंकवाद के आरोपी को इतनी छूट क्यों दी गई': अमेरिकी नागरिक की रिहाई पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा; पूछे ये सवाल
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर विपक्षी दल और छात्र संगठन निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।
इसी बीच, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल दलों ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करने का एलान किया है। यह रैली मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ जारी प्रदर्शनों के बीच बुलाई गई है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
एक नवंबर की रैली पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि रैली का फैसला इंडिया ब्लॉक के दलों से बातचीत के बाद संयुक्त रूप से लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
उन्होंने कहा, एक नवंबर की रैली कांग्रेस पार्टी और इंडिया ब्लॉक की संयुक्त रैली है। इसका फैसला गठबंधन के दलों से बातचीत के बाद लिया गया है। तारीख को लेकर कोई खास बात नहीं है। हम लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और आगे भी करेंगे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए हमने कई तरह के कार्यक्रम और व्यवस्थाएं की हैं।
माथेर ने कहा कि इस रैली में देशभर के राजनीतिक दल शामिल होंगे। सभी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर के राजनीतिक दल एक साथ आएंगे।
उन्होंने कहा, यह देशभर के लोगों की बड़ी रैली होगी। इसमें अलग-अलग राजनीतिक दल शामिल होंगे। सभी एक साथ आकर मजबूती से मांग करेंगे कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक या विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है। माथेर ने कहा कि रैली के जरिये विपक्ष लोकतंत्र की रक्षा और चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता बहाल करने का साझा संदेश देगा।
केसी वेणुगोपाल ने रैली को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह रैली ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच विपक्ष की एकजुटता का मजबूत संदेश देगी।
उन्होंने कहा, ज्ञानेश और उनकी टीम ने मोदी-शाह के इशारे पर कथित तौर पर जो 'वोट चोरी' की है, उसके खिलाफ हमारे कार्यक्रम ऐतिहासिक होंगे। देशभर से बड़ी संख्या में लोग इनमें शामिल होंगे। इससे भारत के हर कोने तक यह मजबूत संदेश जाएगा कि हम अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हैं और इन 'वोट चोरों' को सत्ता से बाहर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
वेणुगोपाल ने पांच अक्तूबर को ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नवंबर को रैली करने की घोषणा की थी। यह घोषणा एसआईआर के खिलाफ जारी आंदोलन के बीच की गई थी।
कांग्रेस रैली का विरोध कर रहे व्यापारी संगठन
दूसरी ओर, चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) सहित दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने कांग्रेस एवं इंडिया ब्लॉक की ओर से एक नवंबर की प्रस्तावित रैली को स्थगित करने की मांग की है। इस बाबत दिल्ली के व्यापारियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है कि रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। इसके पीछे व्यापारियों द्वारा जो कारण बताए गए हैं, उनमें त्योहारी सीजन में रैली के चलते आर्थिक नुकसान होने की बात कही गई है।
व्यापारी संगठनों ने 10,000 करोड़ के नुकसान की आशंका जताई है। व्यापारियों ने पत्र में यह भी लिखा है कि अक्तूबर में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हुए विरोध प्रदर्शनों और मार्च के चलते पहले ही उन्हें 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।