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Hindi News ›   India News ›   Indian Army to Get 335 More K-9 Vajra Howitzers in ₹20,000 Crore Deal to Strengthen China and Pakistan Borders

रक्षा मंत्रालय: चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगी सेना की ताकत, 20 हजार करोड़ में खरीदी जाएंगी K-9 वज्र तोपें

Mon, 26 Oct 2026 11:08 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 26 Oct 2026 11:08 PM IST
सार

रक्षा मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर सेना की ताकत बढ़ाने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 335 के-9 वज्र तोपें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इन तोपों में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी और इनके साथ विंटर किट भी मिलेंगी। सेना के पास पहले से 200 तोपें हैं। नई खरीद से लद्दाख में सैन्य क्षमता कितनी मजबूत होगी और ये तोपें अत्यधिक ठंड में कैसे काम करेंगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Indian Army to Get 335 More K-9 Vajra Howitzers in ₹20,000 Crore Deal to Strengthen China and Pakistan Borders
70 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री वाली 335 तोपें खरीदेगा भारत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर भारतीय सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने सोमवार को 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 335 और के-9 वज्र स्वचालित तोपें खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन तोपों में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा। इन्हें खास तौर पर ऊंचाई वाले इलाकों और अत्यधिक ठंड में भी काम करने के लिहाज से तैयार किया जाएगा। इस खरीद से लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सेना की ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना के पास पहले से ही 200 के-9 वज्र तोपें हैं। अब 335 नई तोपें मिलने से इनकी संख्या बढ़कर 535 हो जाएगी। इस खरीद के प्रस्ताव को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने मंजूरी दी है। यह कई दशकों में तोपों की खरीद से जुड़ी सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगी। पूरी परियोजना की कीमत 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इन तोपों का निर्माण भारत में मेक इन इंडिया पहल के तहत किया जाएगा। इससे देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ सेना की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
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के-9 वज्र तोपें चीन और पाकिस्तान की सीमा पर क्यों होंगी तैनात?
के-9 वज्र स्वचालित तोपें सेना को दूर तक मार करने वाली तोपखाने की ताकत उपलब्ध कराती हैं। चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर ऊंचे पहाड़ों और कठिन मौसम के कारण सैन्य उपकरणों का इस्तेमाल चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में इन तोपों की अतिरिक्त खरीद से सेना को सीमावर्ती इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। खास तौर पर लद्दाख जैसे क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा। नई तोपों के साथ बड़ी संख्या में विंटर किट भी दी जाएंगी। इनकी मदद से तोपों को अत्यधिक ठंड और ऊंचाई वाले इलाकों में चलाना आसान होगा। इससे खराब मौसम में भी सैन्य अभियानों को जारी रखने की क्षमता बढ़ेगी।
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नई तोपों में कितनी होगी स्वदेशी सामग्री और कौन करेगा निर्माण?
335 नई के-9 वज्र तोपों का निर्माण मेक इन इंडिया के तहत किया जाएगा। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी। इनके निर्माण की जिम्मेदारी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को दी जाएगी। के-9 वज्र तोपों का विकास दक्षिण कोरिया के साथ साझेदारी में किया गया है। भारत में इनके निर्माण से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और सैन्य उपकरणों के उत्पादन में देश की क्षमता मजबूत होगी। यह परियोजना ऐसे समय आगे बढ़ाई जा रही है, जब भारतीय सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए आधुनिक और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले हथियारों की जरूरत है।

लद्दाख में पहले भी इस्तेमाल हो चुकी हैं के-9 वज्र तोपें?
भारतीय सेना इन तोपों को पहले ही लद्दाख क्षेत्र में तैनात कर चुकी है। गलवान घाटी की घटनाओं के बाद इनका इस्तेमाल वहां किया गया था। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन तोपों ने अत्यधिक ठंड में भी प्रभावी तरीके से काम किया है। सेना ने इन्हें कठिन मौसम में चलाने की क्षमता विकसित की है। नई खरीद के तहत मिलने वाली विंटर किट से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इनके संचालन को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। इससे सेना को सीमावर्ती इलाकों में जरूरत के मुताबिक तोपखाने की तैनाती करने में अधिक सुविधा मिलेगी।


रक्षा क्षेत्र में इस परियोजना का क्या महत्व है?
335 तोपों की खरीद को मंजूरी भारत की तोपखाने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना से सेना को आधुनिक हथियार मिलेंगे और घरेलू रक्षा निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने हाल ही में गुजरात में सूरत के पास हजीरा स्थित एलएंडटी के संयंत्र का दौरा किया था। यहां कंपनी के-9 वज्र तोपों के साथ जोरावर हल्के टैंकों का भी निर्माण करती है। नई खरीद से सेना की जरूरतों को पूरा करने के साथ भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण और स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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