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खबरों के खिलाड़ी: एसआईआर के खिलाफ आंदोलन की आगे दिशा क्या, विश्लेषकों ने बताई विपक्ष-सीजेपी की राह

Sat, 24 Oct 2026 09:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 24 Oct 2026 09:07 PM IST
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Khabaron Ke Khiladi SIR Opposition Cockroach Janta Party CJP Strategy news updates
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच इसमें दिखी खामियों पर सियासी विवाद जारी है। इस बवाल के कई चेहरे हैं। इनमें से एक राहुल गांधी बवाल के बीच विदेश दौरे पर चले गए। इसे लेकर भी सियासत हो रही है। वहीं, दूसरी ओर सेजीपी के नेताओं में भी आपसी फूट दिखाई देने लगी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इन्हीं मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और राकेश शुक्ल मौजूद रहे। 
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पूर्णिमा त्रिपाठी: सीजेपी का कोई लंबा बैकग्राउंड नहीं है। सीजेआई के एक बयान से ये संगठन सामने आया और अचानक से चर्चा में आ गया। उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड भी नहीं है, कोई लंबा इतिहास भी नहीं है। ऐसे में आगे ये क्या करेंगे ये साफ नहीं है। इस संगठन के नेताओं में समन्वय की कमी भी दिख रही है। लेकिन युवाओं को सड़क पर लाने का काम इन्होंने जरूर कर लिया है। 
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राकेश शुक्ल: सीजेपी के तीनों चेहरों की राजनीतिक पृष्ठभूमि है। दूसरी बात भारत में एक नया प्रयोग हुआ है कॉकरोच और झाड़ू की दोस्ती की, जो संभव नहीं है। ये प्रयोग ज्यादा चलेगा नहीं। इस प्रयोग में बच्चों का इस्तेमाल किया गया। जिस मुद्दे को लेकर आप ने आंदोलन किया जिसकी वजह से लोग आपसे जुड़े। एसआईआर हर 10 साल में होना चाहिए। अगर एक देश एक चुनाव की बात होती है तो एक मतदाता की सूची की बात क्यों नहीं होती है। देश में एक मतदाता सूची रखने का समय अभी ही है।

विनोद अग्निहोत्री: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का मतलब कि सरकार गलत थी। इसलिए उनका इस्तीफा नहीं होने जा रहा है। ऐसे में ये आंदोलन लंबा चलेगा। मुझे लगता है कि आंदोलन अभी चलेगा। मुद्दे समय आने पर असर करते हैं। ऐसा नहीं है कि बीज डालते ही फसल बन जाती है। राम मंदिर का मुद्दा भाजपा ने 1990 के दौर में उठाया था। उसका फायदा उसे कई साल बाद मिलना शुरू हुआ। इसी तरह एसआईआर का मुद्दा भी धीरे-धीरे असर डालेगा। विपक्ष के आंदोलन का ही प्रभाव है कि चुनाव आयोग को कई बदलाव करने पड़े।
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