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आदिवासियों के आंदोलन के आगे झुकी सरकार?: मांगों पर कार्रवाई का दिया भरोसा, वापस लौटा 49 हजार लोगों का मार्च

Wed, 28 Oct 2026 11:05 AM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, ठाणे
पीटीआई, ठाणे Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 28 Oct 2026 11:05 AM IST
सार

महाराष्ट्र में करीब 49 हजार आदिवासियों ने शिक्षा, वन अधिकार और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर निकाला मार्च सरकार के आश्वासन और सरकारी आदेशों की प्रतियां मिलने के बाद वापस ले लिया। इसके साथ ही आदिवासी संगठनों ने वन अधिकार कानून के तहत लंबित दावों का जल्द निपटारा करने की मांग भी रखी।

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Maharashtra government bowed to tribal movement Assures action on demands march of 49000 people turns back
प्रदर्शन करते आदिवासी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में अपनी मांगों को लेकर ठाणे से मुंबई स्थित मंत्रालय की ओर निकले हजारों आदिवासियों ने सरकार से बातचीत के बाद अपना मार्च वापस ले लिया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को जरूरी कदम तेजी से उठाने के निर्देश दिए। वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि उनकी मांगों को लेकर सरकार ने कई सरकारी आदेश जारी किए हैं। इसके बाद आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विवेक पंडित को इन आदेशों की प्रतियां सौंपी गईं और प्रदर्शनकारी वापस लौट गए।

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भिवंडी से मुंबई के लिए निकले हजारों आदिवासी
‘श्रमजीवी संगठन’ के संस्थापक विवेक पंडित के नेतृत्व में मंगलवार दोपहर ठाणे जिले के भिवंडी से करीब 49 हजार लोग मुंबई के लिए निकले थे। ‘संविधान हक संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले निकाले गए इस मार्च में ठाणे, पालघर, रायगढ़ और नासिक के आदिवासी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का मकसद अपनी लंबे समय से चली आ रही मांगों को सरकार तक पहुंचाना और उन पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित कराना था।
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18 साल तक मुफ्त शिक्षा की मांग
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग थी कि आदिवासी बच्चों को 18 साल की उम्र तक मुफ्त और अच्छी शिक्षा मिले। पढ़ाई के साथ बच्चों को रोजगार से जुड़े हुनर सिखाने पर भी जोर दिया गया। संगठन ने मांग की कि हर तालुका में विशेष शैक्षणिक परिसर बनाए जाएं, ताकि आदिवासी बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं मिल सकें।
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जंगल की जमीन और पीने के पानी का मुद्दा भी उठा
आदिवासी संगठनों ने वन अधिकार कानून के तहत लंबित दावों का जल्द निपटारा करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि पात्र परिवारों और समुदायों को उनके अधिकार मिलने चाहिए। इसके अलावा आदिवासी बस्तियों में साफ पीने का पानी पहुंचाने, पुनर्वास से जुड़ी समस्याएं दूर करने और आधार पंजीकरण में आ रही दिक्कतों को हल करने की मांग भी उठाई गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश
प्रदर्शन के बीच आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। बैठक में शिक्षा, वन अधिकार, पुनर्वास, पानी की आपूर्ति और आधार पंजीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इन समस्याओं को हल करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए और जरूरी काम में तेजी लाई जाए। फडणवीस ने यह भी कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के विजन दस्तावेज को तैयार करने में श्रमजीवी संगठन और समर्थन संगठन को शामिल किया जाएगा। आदिवासी समुदायों के विकास के लिए अलग योजना बनाते समय विभिन्न संगठनों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

स्कूलों की सुविधाएं सुधारने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आदिवासी छात्रों के लिए मुफ्त ट्यूशन और पर्याप्त छात्रवृत्ति की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही आश्रम स्कूलों और आवासीय विद्यालयों में खाली पद भरने को कहा। जिला परिषद के स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। आदिवासी बच्चों को 18 साल की उम्र तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने की मांग पर सरकार ने प्रस्ताव की जांच के बाद सकारात्मक फैसला लेने की बात कही।

15 दिसंबर तक वन अधिकार के दावों पर कार्रवाई
वन अधिकार कानून के तहत पात्र दावों का निपटारा करने के लिए 15 दिसंबर तक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि ग्राम स्तर की समितियों से मंजूर सभी पात्र व्यक्तिगत और सामुदायिक दावों पर कार्रवाई पूरी की जाए और कोई भी पात्र दावा लंबित न रहे।


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शिंदे ने बताया आंदोलनकारियों की जीत
देर रात ठाणे पहुंचे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खारीगांव टोल प्लाजा पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई सरकारी आदेश जारी किए हैं। शिंदे ने कहा कि उन्होंने एक ही दिन में इतने सरकारी आदेश जारी होते पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने इसे आंदोलनकारियों और उनके नेतृत्व की जीत बताया। इसके बाद शिंदे ने विवेक पंडित को सरकारी आदेशों की प्रतियां सौंपीं। सरकार की ओर से कार्रवाई का भरोसा मिलने और आदेशों की प्रतियां मिलने के बाद आदिवासियों ने अपना मार्च वापस ले लिया। अब इन मांगों पर सरकार की ओर से तय समय में कितनी कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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