फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Manipur Violence October 2026 Drug Cartels Intelligence Input Soo Audit Meitei Kuki Zo Violence explainer

एक्सप्लेनर: मणिपुर में फिर कैसे बिगड़े हालात, अक्तूबर में हुई कम से कम 10 मौतों की वजह क्या; क्यों भड़की हिंसा

Mon, 26 Oct 2026 08:32 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 26 Oct 2026 08:32 AM IST
विज्ञापन
सार
मणिपुर में 2023 में शुरू हुई हिंसा का एक दौर अक्तूबर 2026 में फिर देखने को मिला है। आइये जानते हैं मणिपुर में दोबारा भड़की हिंसा के कारण, म्यांमार के ड्रग कार्टेल की साजिश से जुड़े खुफिया इनपुट और सुरक्षाबलों की कार्रवाई का ब्योरा।
loader
Manipur Violence October 2026 Drug Cartels Intelligence Input Soo Audit Meitei Kuki Zo Violence explainer
मणिपुर में हिंसा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में बीते एक महीने में स्थितियां एक बार फिर 2023 के तनाव वाले स्तर पर पहुंच गई हैं। दरअसल, राज्य में फरवरी के बाद से स्थितियां सामान्य होती दिख रही थीं। हालांकि, अक्तूबर आते-आते एक बार फिर हिंसा की कई घटनाएं दर्ज हुई हैं। अगर बीते 15 दिनों की ही बात कर ली जाए तो तो मैतेई और कुकी-जो समुदाय के लोगों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें कई की जान गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा संपत्तियों में आगजनी की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर मणिपुर में 2023 के बाद से शुरू हुई हिंसा कैसे धीरे-धीरे शांत होती दिखीं? अक्तूबर में एक बार फिर राज्य का माहौल तनावपूर्ण होने की वजह क्या है? अब तक क्या-क्या घटनाएं हुई हैं, जिनसे मणिपुर सरकार की चिंताएं बढ़ी हैं? इन घटनाओं से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहा है? आइये जानते हैं...

 

पहले जानें- मणिपुर में 2023 में तनाव भड़कने के बाद क्या-क्या हुआ?


2023: मणिपुर में हिंसा की शुरुआत का दौर

मणिपुर में हिंसा।
मणिपुर में हिंसा। - फोटो : अमर उजाला

2024: सियासी प्रस्ताव और चुनाव 

  • मणिपुर विधानसभा ने फरवरी 2024 में केंद्र सरकार से कुकी-जो उग्रवादी समूहों के साथ जारी 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौते को रद्द करने की मांग का प्रस्ताव पारित किया।
  • हिंसा के राजनीतिक असर भी देखने को मिला। मणिपुर में 2024 के लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा ने राज्य की दोनों संसदीय सीटें गंवा दीं। इन पर कांग्रेस प्रत्याशियों को जीत मिली।

2025: नेतृत्व परिवर्तन और केंद्रीय दखल
  • हिंसा रोकने में नाकामी और बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राज्य में केंद्रीय शासन लागू रहा।
  • मैतेई संगठन 'अरामबाई तेंगगोल' के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद जून 2025 में मणिपुर की राजधानी इंफाल में फिर से कर्फ्यू और इंटरनेट पर प्रतिबंध लागू किया गया।
  • हिंसा शुरू होने के दो साल बाद सितंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर का दौरा किया। बाद में युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

2026: कुकी-नगा संघर्ष की घटनाएं बढ़ीं
  • फरवरी 2026 से कुकी और नगा समुदायों के बीच कामजोंग, उखरुल, कांगपोकपी, तामेंगलोंग और नोनी जिलों में नई हिंसक झड़पें शुरू हुईं, इनमें 50 से ज्यादा लोगों की जान गई और दर्जनों गांव जलाए गए।
  • 7 अप्रैल 2026 को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में एक घर में हुए बम धमाके में दो बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद भड़के विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 3 अन्य लोग मारे गए तथा प्रमुख मार्ग बंद कर दिए गए।
  • तीन साल से ज्यादा समय के निलंबन के बाद 21 अगस्त 2026 को मणिपुर, नगालैंड और असम के बीच अंतरराज्यीय बस सेवा (इंफाल-दीमापुर-गुवाहाटी) फिर से शुरू की गई।
  • 4 सितंबर 2026 को केंद्र, राज्य सरकार और कुकी-जो उग्रवादी संगठनों के बीच 2008 से लागू 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स' समझौता बिना नवीनीकरण के समाप्त खत्म हो गया।

सितंबर में मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोनथाउजाम ने विधानसभा को बताया था कि 2023 में शुरू हुए संघर्ष में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और लगभग 60,000 लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हुए। घाटी और पहाड़ियों के बीच सुरक्षा बलों द्वारा नियंत्रित सख्त बफर जोन बनाए गए।

ये भी पढ़ें: मिजोरम-मणिपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ड्रग्स तस्करी से जुड़े 1,424 बैंक खाते फ्रीज, 26 करोड़ की संपत्ति जब्त

मणिपुर में हिंसा।
मणिपुर में हिंसा। - फोटो : अमर उजाला

अक्तूबर में फिर क्यों तनावपूर्ण हुआ राज्य का माहौल?

इस साल लंबे समय तक माहौल सामान्य स्थिति में लौटता दिखा। हालांकि, अब अक्तूबर में फिर कुछ हिंसक घटनाओं से स्थितियां तनावपूर्ण हो गईं। 


1. ग्रामीणों और नागरिकों पर घात लगाकर हमले

9-10 अक्तूबर: कामजोंग जिले के चस्साद गांव में सशस्त्र समूहों के बीच हुई गोलीबारी और झड़प में दो लोगों- माइकलंगमलेन हाओकिप और डोमखोनेई तुथांग की मौत हुई। इसी दौरान उखरुल जिले में एक वाहन पर हुई गोलीबारी में एक नेपाली व्यक्ति- संदीप राय की भी मौत हो गई। यानी इस दिन कुल तीन लोगों की जान गई।

15 अक्तूबर: फाइकोह और मोलवैलुप के बीच दो मोटरसाइकिलों पर जा रहे ग्रामीणों पर उग्रवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में एक कुकी महिला- हटनेमकिम हाओकिप की मौके पर ही मौत हो गई।

17-18 अक्तूबर: कामजोंग जिले के चस्साद गांव में उग्रवादियों की ओर से किए गए हमले और आगजनी की घटना में एक कुकी नागरिक की मौत हुई।

18 अक्तूबर: थाउबल जिले के खंगाबोक गांव में एक संगीत कार्यक्रम के दौरान दो समुदायों के बीच हुए पथराव और गोलीबारी में एक व्यक्ति- लाइशराम राकेश की सिर में गोली लगने से मौत हो गई।

19 अक्तूबर: सुनुरोक पहाड़ियों (नोंगसुम) में लकड़ी इकट्ठा करने गए मैतेई ग्रामीणों पर उग्रवादियों के हमले में 3 युवकों - अरुबम रोनिल, लैरेनलाकपम इनाओबी और क्षत्रियमयूम सुशील की मौत हो गई।

20 अक्तूबर: जंगल में बांस इकट्ठा कर रहे ग्रामीणों पर हुई गोलीबारी में एक कुकी व्यक्ति- पाओलेन खोंगसाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इस लिहाज से देखा जाए तो मणिपुर में अक्तूबर के 15 दिनों में ही 10 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, अगर पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के 10 अक्तूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए दावे किए मानें तो राज्य में 15 दिन में 14 मौतें हो चुकी हैं। दरअसल, पूर्व सीएम ने अपने पोस्ट में कहा था कि कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी में हुई हिंसा में एक ही दिन में सात लोगों की मौत हुई है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों में 10 अक्तूबर को मृतकों की यह संख्या तीन बताई गई थी। ऐसे में अगर बीरेन सिंह के इस दावे को उसके बाद की अन्य तारीखों में दर्ज हुई सात अन्य मौतों के साथ जोड़ा जाए, तो कुल आंकड़ा 14 मौतों का बनता है।

2. गांवों में भीषण आगजनी की घटनाएं

कामजोंग और उखरुल जिलों में कुकी और नागा दोनों समुदायों के बस्तियों को निशाना बनाया गया। 17-18 अक्तूबर के दौरान चस्साद गांव में 28 से अधिक घर जला दिए गए, जबकि 21 अक्तूबर को खोईकाई कुकी गांव में भी कई घरों को आग के हवाले कर दिया गया।


मणिपुर में हिंसा को लेकर क्या कहता है सरकार का खुफिया इनपुट?

सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से अब तक जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक, मणिपुर और पूर्वोत्तर में हिंसा के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट शामिल है, जो कि क्षेत्र को अशांत कर यहां अपने पैर फिर पसारने का रास्ता ढूंढ रहा है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वोत्तर के राज्यों में हिंसा भड़काने की कोशिशों का मुख्य मकसद क्षेत्र में नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार को बढ़ाना और तस्करी मार्गों को फिर से तैयार करना है।

गोविंदास कोंथौजाम, गृह मंत्री मणिपुर
गोविंदास कोंथौजाम, गृह मंत्री मणिपुर - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और सुरक्षाबलों की हालिया सख्त कार्रवाइयों से म्यांमार आधारित ड्रग कार्टेल के संचालन को नुकसान पहुंचा है। चूंकि मणिपुर की सीमाएं म्यांमार से सीधे लगती हैं, इसलिए यह क्षेत्र ड्रग तस्करी के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील है।
  • खुफिया अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति ड्रग कार्टेल के संचालन में सबसे बड़ी बाधा होती है। इसलिए हिंसा भड़काकर सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान कानून-व्यवस्था संभालने पर केंद्रित किया जाता है, ताकि सुरक्षा चक्र टूटे और नशीले पदार्थों की आपूर्ति आसानी से हो सके।
  • खुफिया एजेंसियों ने आगाह किया है कि ये कार्टेल सुरक्षा बलों का ध्यान भटकाने और मनोबल तोड़ने के लिए स्थानीय एजेंट्स के जरिए ऐसे संवेदनशील मुद्दों को तूल देते हैं, जो कि हिंसा भड़का सकते हैं। यह एजेंट्स लगातार भ्रामक प्रचार में भी जुटे रहते हैं।
  • सीमा पार बैठे तत्व इस अराजकता का फायदा उठाकर न केवल हेरोइन और 'याबा' जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की खेप भेज रहे हैं, बल्कि अवैध हथियारों, गोला-बारूद और घुसपैठियों को भी क्षेत्र में धकेल रहे हैं, ताकि अशांति को लगातार जारी रखा जा सके।

ये भी पढ़ें: मणिपुर: कुकी-जो उग्रवादियों के कैंप पर सुरक्षा बलों का कब्जा, 14 कैंपों का होगा ऑडिट; किस समझौते पर छाया संकट?

  • म्यांमार सीमा से सटे मिजोरम और मणिपुर कॉरिडोर का इस्तेमाल कर म्यांमार आधारित ड्रग कार्टेल ने इस अशांति का फायदा उठाया है। सिर्फ मिजोरम में आठ महीनों के भीतर 846 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की नशीली दवाएं जब्त की गईं।
  • खुफिया इनपुट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ये कार्टेल मणिपुर में होने वाले आगामी चुनाव के समय में फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं, क्योंकि उस दौरान सुरक्षा एजेंसियां चुनाव प्रक्रिया सुरक्षित कराने में व्यस्त होंगी। इस दौरान क्षेत्र में जरा सी अशांति सुरक्षाबलों को उलझा देंगी और ड्रग्स-हथियारों का आना-जाना आसान होगा।


मणिपुर में बढ़ती हिंसा और बिगड़ती स्थिति से निपटने के लिए क्या कर रही सरकार?

1. कुकी-जो समुदाय से हुए शांति समझौते की मियाद खत्म
केंद्र-राज्य और कुकी-जो समुदाय के बीच हुआ शांति समझौता इस साल 4 सितंबर को बिना किसी नवीनीकरण के समाप्त हो चुका है। मैतेई और नगा संगठनों की ओर से सोओ समझौते को पूरी तरह समाप्त करने की लगातार मांग की जा रही है। फरवरी 2024 में मणिपुर विधानसभा ने भी केंद्र सरकार से इसे रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया था।

2. सुरक्षा बलों की कार्रवाई और उग्रवादी कैंपों पर नियंत्रण

  • हालिया हमलों के बाद असम राइफल्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ, कोबरा और मणिपुर पुलिस के संयुक्त दस्तों ने ड्रोन, स्निफर डॉग्स और हेलीकॉप्टर की मदद से पहाड़ियों में तलाशी अभियान शुरू किए हैं।
  • हिंसा के बाद पहली बार सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी स्थित कुकी उग्रवादी संगठन के सिनाई स्थित सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन्स (एसओओ) कैंप पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया है। 
  • सिनाई के इस कैंप में पंजीकृत 159 कैडरों की जगह सिर्फ एक कैडर पाया गया। इसके बाद 17 अनाधिकृत व्यक्तियों को 24 हथियारों व विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार किया गया। 
  • इसके बाद राज्य के सभी 14 एसओओ कैंपों का ऑडिट भी शुरू कर दिया गया है। यह सुरक्षा अभियान मैतेई, कुकी और नगा तीनों समुदायों से जुड़े उग्रवादी शिविरों पर समान रूप से चलाया जा रहा है।

3. प्रशासन की तरफ से उठाए गए सख्त कदम
  • कामजोंग जिले में हुई हिंसक घटना के बाद कानून-व्यवस्था में लापरवाही को देखते हुए कामजोंग के पुलिस सुपरिटेंडेंट (एसपी) का तत्काल तबादला कर दिया गया।
  • सुनुरोक हमले में शामिल तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत रात का कर्फ्यू और सख्त पाबंदियां लागू की गई हैं।
  • इसके अलावा हिंसा का फायदा उठाकर नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है और इनके खिलाफ एक समग्र अभियान छेड़ा गया है।

4. सरकार की शांति बहाली, संवाद और संपर्क की कोशिश
  • मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा के बाद राज्य के सभी 36 समुदायों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक सर्व-समावेशी शांति समिति  बनाने का फैसला किया है।
  • सीएम का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार को शांति बहाली और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए पूर्ण सहायता का आश्वासन दिया है।

5. राहत और विकास कार्य
  • हिंसा में घायल हुए नागरिकों के इलाज का पूरा खर्च सरकार की ओर से उठाया जा रहा है। 
  • पहाड़ी जिलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इंटर-विलेज रोड्स के लिए ₹10 करोड़ दिए गए हैं। 
  • इसके अलावा राज्य के सेनापति जिले में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की घोषणा की गई है।
 

क्या है सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौता, जिसे सरकार ने नहीं बढ़ाया आगे?

मणिपुर अपने इतिहास में उग्रवाद की एक बड़ी लहर देख चुका है। यहां के उग्रवादी संगठनों ने राज्य में लंबे समय तक हिंसा फैलाई। इसी हिंसा को रोकने और उग्रवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौता किया गया था।  

मणिपुर में शांति के लिए हुआ था सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौता।
मणिपुर में शांति के लिए हुआ था सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन समझौता। - फोटो : अमर उजाला
कब हुई थी एसओओ की शुरुआत?
  • इसकी शुरुआत वर्ष 2005 में भारतीय सेना और कुकी उग्रवादी समूहों के बीच एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य अभियान रोकने की आपसी सहमति से हुई थी। 
  • केंद्र-राज्य सरकार और दो प्रमुख छात्र संगठनों- कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) और यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) के तहत आने वाले कुकी-जो उग्रवादी समूहों के बीच अगस्त 2008 में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए गए थे।

क्या हैं समझौते की मुख्य शर्तें 
  • समझौते के तहत शामिल सशस्त्र कैडरों के लिए हिंसा से पूरी तरह दूर रहना अनिवार्य है। उग्रवादी समूहों के हथियार निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी निगरानी के तहत जमा रखे जाते हैं।
  • सभी पंजीकृत कैडरों को सरकार की ओर से तय किए गए विशिष्ट शिविरों में ही रहना अनिवार्य होता है। मणिपुर में ऐसे कुल 14 निर्धारित एसओओ कैंप हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed