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बैतूल: आमला से दो बार विधायक रहे चेतराम मानेकर का निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ; एम्स में ली आखिरी सांस
Sun, 01 Nov 2026 01:05 PM IST
बैतूल ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: बैतूल ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2026 01:05 PM IST
सार
बैतूल की आमला-सारनी सीट से दो बार विधायक रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता चेतराम मानेकर का 1 नवंबर 2026 को एम्स अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे। उनकी अंतिम यात्रा 2 नवंबर को सुबह 10 बजे बैतूल स्थित निवास से गंज मोक्षधाम के लिए निकलेगी।
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आमला से दो बार विधायक रहे चेतराम मानेकर का निधन
विस्तार
बैतूल जिले की आमला-सारनी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता चेतराम मानेकर का रविवार 1 नवंबर 2026 को सुबह एम्स हॉस्पिटल में दुखद निधन हो गया है। बताया जा रहा कि वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर लगते ही पूरे बैतूल जिले में शोक की लहर दौड़ गई है। जिले के राजनीतिक सामाजिक और व्यापारी संगठनों सहित आम लोगों में शोक व्याप्त है। सभी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार उनकी अंतिम यात्रा 2 नवंबर को सुबह 10 बजे के लगभग उनके बैतूल स्थित निज निवास से गंज मोक्षधाम के लिए निकलेगी, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। चेतराम मानेकर बैतूल जिले की राजनीति का एक बड़ा और कद्दावर नाम था। वे भाजपा के समर्पित जमीनी और सरल स्वभाव के नेता माने जाते थे। वे आमला विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने गए थे। 2008 में जब परिसीमन के बाद सारनी आमला विधानसभा का हिस्सा बना तब वे भाजपा के टिकट पर करीब 29 हजार वोटों से शानदार जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में पहुंचे। इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इतिहास रच दिया। 2013 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 39 हजार 602 वोटों के भारी अंतर से हराया था। यह जीत आज भी आमला विधानसभा के इतिहास की सबसे बड़ी जीत के रूप में दर्ज है। यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है।
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2013 में उनकी लोकप्रियता चरम पर थी। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया और डॉ योगेश पंडाग्रे को प्रत्याशी बनाया था, लेकिन क्षेत्र में उनका जनाधार और पकड़ हमेशा बनी रही। विधायक रहते हुए उन्होंने शासकीय डॉ. अंबेडकर महाविद्यालय आमला में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष के रूप में दो बार कार्यभार संभाला और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनका पूरा जीवन जनसेवा के लिए समर्पित रहा।
