फिल्म में मूल भाव कायम है
एक यूजर ने लिखा 'हाल के समय की बेहतरीन फिल्मों में से एक। इस फिल्म की सबसे प्रभावशाली बात इसके निर्माताओं का इरादा था। वे फिल्म के मूल भाव पर पूरी तरह कायम रहे। इसके अलावा, भावनाएं, संगीत और VFX, सब कुछ विश्व स्तरीय है। पार्ट 2 का बेसब्री से इंतजार है।'
भव्यता पर ज्यादा दिया गया जोर
एक और यूजर ने फिल्म को लेकर लिखा 'यह एक बहुत ही महत्वाकांक्षी फिल्म है जिसे बड़े पैमाने पर बनाया गया है। इसके पीछे की मेहनत साफ नजर आती है। फिल्म की टीम काफी हद तक रामायण के मूल कथानक पर टिकी रहती है, मगर इसमें ड्रामा और भावनाओं के बजाय भव्यता और एक्शन पर ज्यादा जोर दिया गया है। इस वजह से कहानी के कुछ हिस्से फीके लगते हैं और कभी-कभी तो किसी टीवी सीरियल जैसे महसूस होते हैं। फिल्म का दूसरा भाग भी कहीं-कहीं काफी खिंचा हुआ लगता है, जिसकी एक वजह यह है कि पहला भाग कहां खत्म होता है। यहां कम कंटेंट को लंबे-लंबे एक्शन दृश्यों के जरिए खींचने की कोशिश की गई है, जिनका कोई खास असर नहीं पड़ता।
कैसा है रणबीर, यश और साई का काम?
रावण के रूप में यश फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण हैं और उन्होंने शानदार काम किया है, खासकर अपने परिचय वाले दृश्यों में। राम और सीता के किरदार में रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने अच्छा काम किया है, हालांकि उनके किरदारों में जो गहराई होनी चाहिए, वह हमेशा पूरी तरह से पर्दे पर नहीं उभर पाती।
कैसे हैं फिल्म के दृश्य?
फिल्म के दृश्य कहीं-कहीं बहुत शानदार हैं और इसमें किया गया भारी निवेश साफ दिखता है। मगर कुछ दृश्यों में साफ पता चलता है कि इन्हें स्टूडियो या ग्रीन स्क्रीन पर शूट किया गया है। कुछ असुर तो बिल्कुल कार्टून जैसे लगते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसका संगीत है। रामायण जैसी कहानी में संगीत के जरिए भावनाओं को गहराई से पेश किया जाना चाहिए था मगर यहां भारतीय और हॉलीवुड संगीत का जो मिश्रण तैयार किया गया है, वह ज्यादातर जगहों पर बेअसर साबित होता है। कुछ गिने-चुने दृश्यों को छोड़कर, संगीत न तो पूरी तरह भारतीय लगता है और न ही हॉलीवुड जैसा।
क्या दर्शकों की उम्मीदों पर उतरी खरी?
फिल्म के बड़े पैमाने की तारीफ होनी चाहिए। यह निश्चित रूप से देखी जा सकती है। हाल के दिनों में बनी कुछ फिल्मों से बेहतर है। मगर यह दर्शकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। कुल मिलाकर यह एक मिली-जुली फिल्म है, जिसमें और भी बेहतर होने की काफी गुंजाइश थी।