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Hisar News: पुलिस ने फायरिंग मामले में दो नाबालिग आरोपियों के सिर मुंडवाकर करवाई परेड

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आरोपियों की परेड कराती पुलिस। 
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हिसार। बड़वाली ढाणी के पास कबाड़ की दुकान पर फायरिंग मामले में पुलिस ने दो नाबालिगों को हिरासत में लेकर सोमवार को सिर मुंडवाकर बाजार में पैदल घुमाया। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर इसकी वीडियो भी बनवाई। पुलिस ने नाबालिगों के नाम और साफ दिखते चेहरों वाला वीडियो व प्रेस नोट भी जारी किया। हालांकि पर इस पर सवाल उठने के बाद डिलीट कर दिया। दोनों आरोपियों को बाल सुधार गृह फरीदाबाद भेज दिया है।
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पुलिस प्रवक्ता मदन लाल ने बताया कि एचटीएम थाना पुलिस ने 24 अक्तूबर को बड़वाली ढाणी निवासी भूषण प्रसाद की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। भूषण ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे वह डबल फाटक के पास स्थित अपनी दुकान में थे। इसी दौरान कुछ युवकों ने दुकान के शटर पर ईंट फेंकी और हवाई फायरिंग की। बाहर आने पर मुंह ढके दो युवक मोटरसाइकिल पर भागते दिखे। पुरानी सब्जी मंडी चौकी प्रभारी एएसआई सुभाष की टीम और एएसआई मदन ने इस मामले में दो किशोरों को काबू किया। इनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल और 315 बोर का अवैध हथियार बरामद किया। पुलिस ने दोनों किशोरों को सिर मुंडवाकर बाजार के बीच पैदल घुमाया। कुछ पुलिसकर्मी इस दौरान वर्दी भी पहने थे। पुलिस की ओर से जारी वीडियो में किशोरों के चेहरे साफ दिख रहे है और प्रेस रिलीज में इनके नाम भी लिखे थे। जांच अधिकारी सुभाष ने बताया कि शिकायतकर्ता के बेटे ने पिछले दिनों दोनों आरोपियों के घर पर पत्थरबाजी की थी। इसी रंजिश में आरोपियों ने हवाई फायरिंग की। एक आरोपी पर छीनाझपटी और लड़ाई-झगड़े के दो मामले दर्ज हैं।

किशोरों के सिर पहले से मुंडे हुए थे। इन्फ्लुएंसर्स को किसने सूचना दी, इसकी जानकारी नहीं है। नाबालिगों की परेड नहीं करवाई बल्कि उन्हें निशानदेही के लिए ले जाया जा रहा था। - मदन लाल, पुलिस प्रवक्ता
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छह माह तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान

वरिष्ठ अधिवक्ता मनमोहन ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 में विधि विरुद्ध किशोर का नाम, पता, स्कूल या ऐसा कोई विवरण प्रकाशित नहीं किया जा सकता जिससे उसकी पहचान हो सके। फोटो भी प्रकाशित नहीं की जा सकती। उल्लंघन पर छह माह तक की कैद, दो लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। हिरासत में लिए गए किशोर को विशेष किशोर पुलिस इकाई या बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के सुपुर्द करना होता है और ये अधिकारी कार्रवाई के दौरान पुलिस की वर्दी नहीं पहन सकते।
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