सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में सात साल की जेल की सजा काट रहे आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा को तीन दिन की अस्थायी जमानत दी है। उन्हें यह राहत अपने गंभीर रूप से बीमार सौतेले भाई से मिलने के लिए दी गई है, जो सूरत के एक अस्पताल में भर्ती हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने मेडिकल दस्तावेजों पर विचार करने के बाद मानवीय आधार पर राहत देने का फैसला किया। पीठ ने कहा कि सौतेले भाई की गंभीर हालत को देखते हुए विधायक की याचिका पर विचार करना उचित है।
हाईकोर्ट ने दी थी एक दिन की राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चैतर वसावा की याचिका पर सुनवाई की। इसमें उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट के 16 अक्तूबर के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक एक दिन की अस्थायी जमानत दी थी, ताकि वह अपने बीमार सौतेले भाई से मिल सकें।
वसावा ने हाईकोर्ट से 30 दिन की अस्थायी जमानत मांगी थी। उनके वकील कपिल सिब्बल और शादान फरासत ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि भाई की गंभीर हालत, जेल से अस्पताल की दूरी और आगे के इलाज की व्यवस्था करने की जरूरत को देखते हुए एक दिन की राहत पर्याप्त नहीं है।
गुजरात सरकार ने किया विरोध
गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अस्थायी जमानत देने की मांग का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि वसावा और उनके सौतेले भाई के बीच बातचीत तक नहीं होती थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल दस्तावेजों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि मानवीय आधार पर राहत देना उचित है। पीठ ने कहा कि सख्त शर्तों के जरिए वसावा की स्वतंत्रता को नियंत्रित किया जा सकता है और थोड़े समय के लिए भाई से मिलने की अनुमति देने से किसी को नुकसान होने की आशंका नहीं है।
25 हजार रुपये का निजी मुचलका देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव करते हुए निर्देश दिया कि वसावा को उनकी वास्तविक रिहाई की तारीख से तीन दिन के लिए अस्थायी जमानत पर छोड़ा जाए। इसके लिए उन्हें संबंधित जेल प्राधिकारी की संतुष्टि के अनुसार 25 हजार रुपये का निजी मुचलका देना होगा।
अदालत ने कहा कि विधायक को पुलिस की न्यूनतम सुरक्षा के साथ संबंधित जेल से सूरत ले जाया जाएगा और वापस लाया जाएगा। पुलिस सुरक्षा और अस्थायी रिहाई के दौरान जरूरी परिवहन का पूरा खर्च वसावा को उठाना होगा।
राजनीतिक गतिविधियों और मीडिया से दूरी की शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी जमानत की अवधि के दौरान वसावा पर कई शर्तें लगाई हैं। वह किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित नहीं कर सकेंगे, किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, मीडिया से बातचीत नहीं कर सकेंगे और न ही कोई सार्वजनिक बयान दे सकेंगे।
अदालत ने निर्देश दिया कि तीन दिन की अवधि समाप्त होते ही वसावा को बिना किसी अतिरिक्त आदेश या नोटिस का इंतजार किए संबंधित जेल के अधीक्षक के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।
2023 के मामले में मिली थी सात साल की सजा
गुजरात की एक ट्रायल कोर्ट ने 23 जून को चैतर वसावा, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों को 2023 के एक मामले में सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला वन अधिकारियों पर हमला करने और जबरन वसूली से जुड़ा है।
घटना 30 अक्टूबर 2023 को हुई थी और इस संबंध में दो नवंबर 2023 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज है कि गुजरात हाईकोर्ट ने 31 जुलाई को वसावा की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील स्वीकार की थी, लेकिन 24 अगस्त को उनकी सजा पर रोक लगाने की अर्जी खारिज कर दी थी। इस मामले में दोषी ठहराए गए नौ लोगों में से वसावा की पत्नी और कुछ अन्य लोगों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।