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क्यों परेशान हुआ अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन?: अदालत से हाथ जोड़कर बोला- और कितना इंतजार? अब मेरी उम्र हो रही है

सार

मुंबई अंडरवर्ल्ड का पूर्व गैंगस्टर छोटा राजन, जो करीब 11 साल से तिहाड़ जेल में बंद है, अपने खिलाफ लंबित मामलों की जल्द सुनवाई की मांग कर रहा है। छोटा राजन के खिलाफ अभी 14 मामले विचाराधीन हैं। 27 अक्तूबर को जेएनपीटी हथियार जब्ती मामले की सुनवाई के दौरान गवाह के गैरहाजिर रहने पर उसने जज से कहा- सर, और कितना इंतजार? मामले के अहम गवाह कैंसर से पीड़ित हैं, जिससे सुनवाई में देरी हो रही है। पत्रकार जे. डे की हत्या के मामले में राजन को पहले ही उम्रकैद की सजा मिल चुकी है।
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छोटा राजन ने अदालत से लगाई गुहार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड में खौफ का दूसरा नाम रहे गैंगस्टर छोटा राजन की जिंदगी अब बिल्कुल बदल चुकी है। यह डॉन आज तिहाड़ जेल में बंद है और अदालत से अपने मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने की गुहार लगा रहा है। 70 साल के हो चुके राजन के खिलाफ अभी भी 14 मामले विचाराधीन हैं। वह लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश होकर पूछ रहा है कि आखिर उसे न्याय के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
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करीब 11 साल से हिरासत में रह रहे छोटा राजन को मुंबई की दो सत्र अदालतों में चल रहे मुकदमों की धीमी रफ्तार से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। इनमें एक मामला पुणे के बंड गार्डन इलाके में अजय भोसले पर हुई गोलीबारी से जुड़ा है, जबकि दूसरा जेएनपीटी में हथियारों की खेप पकड़े जाने का है। बंड गार्डन मामले में अभी फैसला आना बाकी है, वहीं जेएनपीटी मामले में पिछले कुछ हफ्तों से गवाहों की पूछताछ चल रही है। इसी देरी के चलते राजन अपनी बढ़ती उम्र का हवाला देकर बार-बार जल्द सुनवाई की मांग कर रहा है।

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27 अक्तूबर को जेएनपीटी हथियार जब्ती मामले की सुनवाई के दौरान जब एक गवाह गैरहाजिर रहा, तो राजन का सब्र जवाब दे गया। उसने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे जज से बात की और हाथ जोड़कर कहा, सर, और कितना इंतजार? कृपया कुछ कीजिए। मेरी उम्र हो रही है।इस पर विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि गवाह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी पूछताछ की जा सकती है। हालांकि, वकीलों ने राजन को समझाया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे अपने वकील के जरिए ही बात रखनी चाहिए।

अदालत में आ रही इस देरी की एक बड़ी वजह यह भी है कि जेएनपीटी मामले में अभियोजन पक्ष के आखिरी गवाह की सेहत ठीक नहीं है। वह कैंसर से पीड़ित हैं और कीमोथेरेपी ले रहे हैं, जिसके चलते उनका अदालत आना-जाना मुश्किल हो रहा है। हथियार जब्ती के इस मामले में छोटा राजन की आवाज के नमूने का इस गवाह की आवाज के नमूने से मिलान हुआ है, इसलिए अभियोजन पक्ष के लिए यह गवाही बेहद अहम है। कानूनी नियम के मुताबिक बचाव पक्ष को भी इस गवाह से सवाल पूछने का पूरा मौका मिलना जरूरी है, वरना मुकदमे की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अदालत गवाह की खराब सेहत और मामले को जल्द निपटाने के बीच रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है।
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छोटा राजन को अक्तूबर 2015 में इंडोनेशिया के बाली से गिरफ्तार करके भारत लाया गया था और तब से वह तिहाड़ जेल में ही बंद है। पत्रकार जे. डे की जून 2011 में हुई हत्या के मामले में उसे पहले ही उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। उसके खिलाफ कुल 71 मामले दर्ज थे, जिनमें से ज्यादातर का निपटारा हो चुका है, लेकिन 14 मामले अभी भी अलग-अलग अदालतों में विचाराधीन हैं।
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