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एमपी में मानसून लौट चुका, फिर भी क्यों हो रही बारिश? आज 31 जिलों में अलर्ट, 6 में भारी बारिश की चेतावनी

Wed, 28 Oct 2026 07:28 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात के असर से मध्यप्रदेश में मौसम बदलने वाला है। बुधवार को 31 जिलों में बारिश, आंधी और गरज-चमक के आसार हैं। सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ पर भी बारिश और बादल चांद के दीदार में बाधा डाल सकते हैं। पूर्वी मध्यप्रदेश में धान की फसल और गेहूं की बुआई प्रभावित होने की आशंका है।
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मौसम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने के आसार हैं। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान अर्नब का असर प्रदेश के मौसम पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को 31 जिलों में बारिश, गरज-चमक और आंधी की संभावना है। पूर्वी मध्यप्रदेश के छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जबकि भोपाल समेत कई शहरों में बादल छाने और बूंदाबांदी के आसार हैं। अगले दो दिनों में मौसम का असर और बढ़ सकता है। खास बात यह है कि 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन भी प्रदेश में बारिश और बादलों की स्थिति चांद के दीदार में बाधा बन सकती है।
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पूर्वी एमपी में बारिश का जोर, पश्चिमी हिस्से में राहत
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, बुधवार को सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में किसानों को खेतों में खड़ी फसलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। भोपाल, नर्मदापुरम, भिंड, दतिया, रायसेन, सीहोर, विदिशा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। दूसरी ओर, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर सहित 24 जिलों में बुधवार को बारिश का अलर्ट नहीं है। इन क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

करवा चौथ पर चांद के दीदार में बाधा बन सकते हैं बादल
29 अक्टूबर को चक्रवात का असर बढ़ने का पूर्वानुमान है। इस दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। मौसम विभाग ने 11 जिलों में अति भारी और नौ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। अन्य जिलों में भी हल्की बारिश होने के आसार हैं। करवा चौथ पर महिलाएं शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं। ऐसे में बादलों की मौजूदगी से कई शहरों में चांद देखने का इंतजार बढ़ सकता है। हालांकि, किसी शहर में चांद दिखाई देगा या नहीं, यह उस समय आसमान में बादलों की स्थिति पर निर्भर करेगा। 30 और 31 अक्टूबर को भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह सामान्य होने की संभावना नहीं है। इसलिए अगले कुछ दिन बारिश और बादलों के लिहाज से अहम रहेंगे।
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किसानों की चिंता बढ़ी, धान और गेहूं दोनों पर असर की आशंका
चक्रवात का प्रभाव प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अधिक रहने का अनुमान है। इस क्षेत्र में धान की फसल कई जिलों में तैयार होने की स्थिति में है। ऐसे समय में लगातार बारिश होने से कटाई, खेतों में फसल सुखाने और उपज सुरक्षित रखने में परेशानी आ सकती है। जबलपुर संभाग के बालाघाट और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में धान की खेती होती है। वहीं, रीवा संभाग में किसान गेहूं की बुआई की तैयारियों में जुटे हैं। बारिश बढ़ने पर खेतों में नमी अधिक होने से बुआई का काम प्रभावित हो सकता है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में धान के साथ सोयाबीन, मक्का, उड़द, अरहर और तिल जैसी खरीफ फसलें भी उगाई जाती हैं। बारिश का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्षा कितनी होती है और कितने समय तक जारी रहती है।

मानसून लौट चुका, फिर भी क्यों हो रही बारिश?
मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई तीन अक्टूबर को हो चुकी है। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश की गतिविधियां जारी हैं। इसकी वजह मानसून की सामान्य बारिश से अलग मौसमी प्रणालियों का सक्रिय होना है। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात का प्रभाव भी इसी क्रम में देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में तेज धूप और साफ मौसम रहा, जबकि रात के तापमान में गिरावट के साथ कई जिलों में बारिश भी हुई है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा था। अब मानसून की विदाई के बाद भी स्थानीय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश हो रही है।

रात में बढ़ी ठंडक, दिन में अब भी गर्मी
बारिश की चेतावनी के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। शाजापुर के गिरवर क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। शहडोल के कल्याणपुर और पचमढ़ी में पारा 13.8 डिग्री, रायसेन में 14.5 डिग्री, कटनी के करौंदी में 14.7 डिग्री और दमोह में 15 डिग्री सेल्सियस रहा।इसके उलट दिन के तापमान में अभी ज्यादा गिरावट नहीं आई है। उज्जैन, भोपाल के बैरसिया, धार, खंडवा, खजुराहो, सागर, मंदसौर और नीमच के मरुखेड़ा में अधिकतम तापमान 34.3 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। यानी प्रदेश में फिलहाल मौसम के दो अलग-अलग रंग दिखाई दे रहे हैं। दिन में गर्मी बनी हुई है, जबकि रात में ठंडक बढ़ रही है। बारिश की गतिविधियां बढ़ने पर तापमान में आगे बदलाव हो सकता है।

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इस बार सामान्य से चार फीसदी कम बरसा मानसून
जून से सितंबर तक प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस तरह पूरे प्रदेश में सामान्य से करीब चार फीसदी कम बारिश हुई। हालांकि, पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से चार फीसदी अधिक पानी बरसा, जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 12 फीसदी कम रहा। प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो गया, लेकिन बाकी 30 जिलों में कमी दर्ज की गई। जून में सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश होना इसकी बड़ी वजह रही। जुलाई, अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश के बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। यही कारण है कि पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। अब चक्रवात के कारण पूर्वी मध्यप्रदेश में बारिश बढ़ने की संभावना है। इससे जलस्रोतों और भूजल स्तर को लाभ मिल सकता है, लेकिन खेतों में खड़ी फसल और बुआई के काम पर पड़ने वाले असर को लेकर किसानों को मौसम के अगले अपडेट पर नजर रखनी होगी।

 
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