सार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश के लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को राहत देते हुए तबादले पर यात्रा और अन्य अनिवार्य भत्ते देने का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य सरकार को छह महीने में स्थानांतरण और आवास भत्ते की नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार किसी ग्राम रोजगार सहायक का स्थानांतरण करती है, तो उसे अनिवार्य यात्रा भत्ता, यात्रा भत्ता और डोमेस्टिक भत्ता प्रदान करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को रोजगार सहायकों के लिए छह महीने की समयावधि में एक स्पष्ट नीति तैयार करने के निर्देश भी जारी किए हैं।
छह महीने में नीति बनाने के निर्देश
हाई कोर्ट ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर ट्रांसफर अलाउंस तथा हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) के संबंध में नीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने बताया कि ग्राम रोजगार सहायकों को लगभग 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी का स्थानांतरण 100 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है, तो उसे आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है। अदालत के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों को भविष्य में वित्तीय लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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तबादले पर रोक लगाने से कोर्ट का इन्कार
सुनवाई के दौरान रोजगार सहायकों की ओर से तबादला प्रक्रिया पर पूरी तरह से रोक लगाए जाने की मांग भी रखी गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने साफ किया कि राज्य सरकार अपनी प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार कर्मचारियों के स्थानांतरण कर सकेगी। हालांकि, सरकार को तबादले के साथ तय नीति के आधार पर कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से वित्तीय लाभ और भत्ते प्रदान करने होंगे।
पांच रोजगार सहायकों ने दायर की थी याचिका
यह पूरा मामला सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा, शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार, सागर के रानू राजपूत और टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया की याचिका से जुड़ा है। इन पांचों रोजगार सहायकों ने बीते साल 18 जुलाई को हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब कोर्ट ने इस सुरक्षित रखे गए फैसले पर अपना अंतिम आदेश जारी किया है।