शिमला। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में शुक्रवार को डीसी कार्यालय में जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक हुई। इसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिनियम के तहत दर्ज लंबित मामलों में शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना कोई भी धारा न हटाई जाए। पीड़ितों को अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार न्यूनतम 85 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 8 लाख 25 हजार रुपये तक की राहत राशि प्रदान करने का प्रावधान है। बैठक में अन्वेषण के लिए लंबित सात मामलों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान बताया गया कि 1 जून से 30 सितंबर, 2026 तक जिला शिमला के विभिन्न पुलिस थानों में अधिनियम के तहत कुल 18 मामले दर्ज किए हैं। जिला शिमला के विभिन्न न्यायालयों में इस अधिनियम के तहत 49 मामले लंबित हैं। इनमें वर्ष 2018 से 2026 तक के मामले शामिल हैं। वर्ष 2023 में सत्र न्यायालय शिमला ने दो मामलों का निपटारा भी किया। संवाद