बहराइच। पिता-पुत्र को फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेजने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने तत्कालीन सुजौली थाना प्रभारी (एसओ) समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। आदेश के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है।
सुजौली थाना क्षेत्र के विजय नगर निवासी नंद गोपाल यादव ने बताया कि उनका बड़ा बेटा विमलेश सुल्तानपुर में पुलिस विभाग में कार्यरत है, जबकि उनके एक भाई सीआरपीएफ और दूसरे असम सचिवालय में कार्यरत हैं। आरोप है कि 23 अगस्त 2024 को तत्कालीन सुजौली थाना प्रभारी 20 पुलिसकर्मियों के साथ जबरन उनके घर में घुस आए और परिजनों के साथ अभद्रता की।
नंद गोपाल के मुताबिक, 24 अगस्त की शाम करीब सात बजे पुलिसकर्मी दोबारा उनके घर पहुंचे और उन्हें व उनके छोटे बेटे सुजीत को जबरन थाने ले गए। वहां से छूटने के बाद उन्होंने मामले की शिकायत अधिकारियों से की। आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें और उनके बेटे को फर्जी मामले में फंसाकर जेल भेज दिया।
जेल से रिहा होने के बाद पीड़ित ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को कई शिकायती पत्र भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में वाद दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बीते 13 अक्तूबर को तत्कालीन थाना प्रभारी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। सीओ मोतीपुर अमित कुमार सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश की जानकारी मिली है। वह फिलहाल जिले से बाहर हैं। लौटने के बाद इस मामले में की जा रही कार्रवाई की जानकारी देंगे।