बुलंदशहर। झोलाछाप से इलाज कराना शनिवार दोपहर एक मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ गया। आठ माह के मासूम को निमोनिया होने पर परिजन उसे लेकर धमैड़ा अड्डा स्थित एक झोलाछाप के यहां इलाज कराने पहुंचे। आरोप है कि निमोनिया से पीड़ित मासूम को झोलाछाप ने इंजेक्शन लगाया और ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई। इसके कुछ देर बाद ही मासूम की हालत बिगड़ गई। मासूम को लेकर परिजन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने मासूम को जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
सदर तहसील क्षेत्र के गांव मीरपुर निवासी शौकीन ने बताया कि सात माह 25 दिन पूर्व पत्नी ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। इसमें एक पुत्र साजिद को पिछले चार-पांच दिन से निमोनिया था। शुरुआत में उसका नगर के एक चिकित्सक से इलाज कराया। राहत न मिलने पर ग्रामीणों के कहने पर धमैड़ा अड्डा स्थित एक क्लीनिक पर ले गए।
यहां बिना किसी जांच के क्लीनिक संचालक ने चार इंजेक्शन बच्चे को लगा दिए। इसके बाद एक ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। पूछने पर कहा कि बच्चा ठीक हो जाएगा लेकिन कुछ देर में ही बच्चे की हालत बिगड़ने लगी।
क्लीनिक संचालक ने उसे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में दिखाने को भेज दिया। मेडिकल कॉलेज के नए चिकित्सालय भवन की इमरजेंसी पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने ईसीजी व अन्य जांच के बाद साजिद को मृत घोषित कर दिया। शौकीन ने आरोप लगाया कि बेटे की मौत क्लीनिक संचालक के गलत इलाज से हुई है।
पंजीकृत चिकित्सक से कराएं इलाज
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमित कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों की बीमारी को हल्के में न लें और किसी भी स्थिति में झोलाछापों से इलाज न कराएं। बच्चे को बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या निमोनिया के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल सरकारी चिकित्सालय या पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श लें। बिना चिकित्सकीय जांच के इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़वाना खतरनाक साबित हो सकता है।
कोट
परिजन बच्चे को इमरजेंसी लेकर आएं थे। इसकी जांच के बाद मृत घोषित किया गया। परिजनों ने धमैड़ा अड्डा स्थित एक क्लीनिक पर इलाज कराने की बात कही। - डॉ. धीर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कॉलेज