बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि
जिलाधिकारी की जांच में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर धांधली की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार कुल 10,470 फॉर्म स्वीकृत और 3,309 अस्वीकृत किए गए, जिनका कोई भी ऑफलाइन या ऑनलाइन रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले की शेष तीनों विधानसभा क्षेत्रों बरखेड़ा पूरनपुर और बीसलपुर में भी मतदाता सूची की बूथवार पड़ताल और समीक्षा शुरू कर दी गई है। अगले दो दिनों में शत-प्रतिशत शुद्ध सूची तैयार करने का लक्ष्य तय किया गया है ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न सके और फर्जी नाम हटाए जा सकें।
13 हजार फॉर्म में गड़बड़ी, डाटा गायब
जांच के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 को पूरी होने के बाद नियमित ऑफलाइन फॉर्मों के जरिये संशोधन का काम चल रहा था। 31 मई से 28 अगस्त 2026 के बीच गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं। बीआरसी द्वारा 31 मई 2026 से 29 अगस्त 2026 के बीच कुल 13,779 फॉर्मों की प्रविष्टि की गई। इसमें से मयंक गोस्वामी के कार्यकाल में 4,717 फॉर्म और हेमंत कुमार के कार्यकाल में 9,062 फॉमों की प्रविष्टि की गई। इससे संबंधित डाटा गायब हैं।
सरकारी पद के दुरुपयोग और फर्जीवाड़े का केस दर्ज
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी केके कश्यप की ओर से दर्ज प्राथमिकी में मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी पर सरकारी पद के दुरुपयोग और नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। आरोपियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, 1951, 1989 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 201 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन दोनों धाराओं के एक साथ लगने का सीधा मतलब है कि प्रशासन ने इसे केवल एक प्रशासनिक भूल नहीं माना है, बल्कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर जानबूझकर चुनावी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा करने का आपराधिक मामला माना है।
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि दोनों एसडीएम के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच में मतदाता सूची संशोधन के दौरान उनकी भूमिका और जिम्मेदारी के बिंदुओं को देखा जाएगा।