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यूपी: सत्य सनातन जैसी चार और संस्थाओं से साइबर ठगी, गुजरात-आंध्र प्रदेश समेत 10 राज्यों तक फैला मिला जाल

Wed, 28 Oct 2026 11:40 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

सोनभद्र जिले में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा होने के बाद भोपाल से गिरफ्तार किए गए ठगों से पूछताछ में कई अहम जानकारी सामने आई। कोर्ट ने आरोपियों को 14 दिन की रिमांड पर जेल भेजा। 
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साइबर ठगी के आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साइबर ठगी के मामले में सत्य सनातन ट्रस्ट जैसी चार और संस्थाओं का नाम सामने आया है। इसमें दो संस्थाएं सोनभद्र के पते की हैं। भोपाल से पकड़े गए तीनों जालसाजों से पूछताछ में पुलिस को यह जानकारी हासिल हुई है। यही नहीं इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ आठ नहीं, गुजरात-आंध्र प्रदेश सहित दस राज्यों तक फैला मिला है। मंगलवार की देर रात तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर सोनभद्र पहुंची पुलिस बुधवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की रिमांड पर जेल भेज दिया गया। 

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पुलिस की जांच में यह भी पता चला है कि अलग-अलग संस्थाएं बनाकर ठगी के इस अंतरराज्यीय गिरोह ने महज चार दिन में (13 से 16 मार्च 2026) रीवा से ठगी को अंजाम देते हुए सत्य सनातन ट्रस्ट के खाते में चार करोड़ से अधिक की रकम मंगवाई और उसे 150 से अधिक खातों में ट्रांसफर भी करा लिया।

एएसपी ऑपरेशन ऋषभ रूणवाल ने दोपहर बाद पुलिस लाइन में पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया। बताया कि सत्य सनातन ट्रस्ट के ठगी किए जाने का मामला सबसे पहले 16 अक्तूबर को सामने आया था। इसकी छानबीन की गई तो पता चला कि 10 राज्यों से 11 करोड़ से अधिक की ठगी की गई। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर इससे जुड़ी 35 शिकायतें भी दर्ज मिलीं। 

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इस आधार पर सोनभद्र से सत्य सनातन ट्रस्ट के चेयरमैन हरिकेश पांडेय उर्फ ऋषिकेश, उसके साथी अंजनी कुमार, वेदांत मौर्या, प्रवेश राज सिंह और जोनसीन क्रिशायान उर्फ राजेश को गिरफ्तार किया गया। वहीं भोपाल में अयोध्या नगर थाना क्षेत्र के तिरुपति होम्स में रहकर (मूल निवास सतना का न्यू देवराज नगर) साइबर ठगी का कारोबार संभाल रहे जय कुमार पांडेय, सागर लेक व्यू होम (मूल निवासी सिंगरौली का मोरवा) में रह रहे राजेश पोद्दार, बब्बू प्रसाद प्रजापति (मूल निवास सिंगरौली के बरगवां थाना क्षेत्र का गोदवाली) को वहां के सी-सेक्टर तिराहे पर यादव टी-स्टाल के पास से दबोचा गया। 

ट्रांजिट रिमांड के जरिए तीनों को मंगलवार की रात सोनभद्र लाया गया। जरूरी औपचारिकताओं की पूर्ति करते हुए बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया है। वहां से आरोपियों को 14 दिन के रिमांड पर जिला कारागार भेज दिया गया।

ऐसे की जा रही थी ठगी, आरटीजीएस-पेमेंट गेटवे का हुआ इस्तेमाल  
एएसपी ने बताया कि ट्रस्ट के एक नहीं कई खाते खोल रखे गए थे। रीवा में बैठकर महज 13 से 16 मार्च के बीच ट्रस्ट के रेणुकूट स्थित खाते में चार करोड़ से अधिक की राशि मंगवाई गई और उसी अवधि में ज्यादातर धनराशि आरटीजीएस-पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल कर 150 से अधिक खातों में भेज भी दी गई। जांच में यह भी पता चला कि सत्य सनातन ट्रस्ट के कई बैंक खाते खोले गए थे। साथ ही ठगी के लिए अन्य खातों का भी इस्तेमाल किया जा सके। इसके लिए ऋषिकेश ने चुर्क के पते पर धर्मोदय फाउंडेशन, साथियों के सहयोग से किरविल म्योरपुर के पते पर बलसा कंस्ट्रक्शन एंड ट्रेडिंग एलएलपी का पंजीयन कराया था। भूमित्रम इंडिया माइक्रो फाउंडेशन ट्रस्ट, राष्ट्रीय स्वराज फाउंडेशन सहित अन्य संस्थाओं के बैंक खातों में भी संदिग्ध लेन-देन के प्रकरण प्रकाश में आए हैं। इन संस्थाओं से संबंधित लेन-देन की भी जांच कराई जा रही है।

विदेशी ग्रुपों के नाम पर शेयर-इनवेस्टमेंट ट्रेडिंग में कराया जाता था निवेश 
एएसपी के मुताबिक आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ग्रुप बनाते थे। इसके जरिए लोगों को शेयर-इनवेस्टमेंट ट्रेडिंग में बड़े मुनाफे का लालच दिया जाता था और फेयरले, ग्रे मैटर्स कैपिटल जैसे विदेशी ग्रुपों के नाम पर निवेश कराया जाता था। निवेश के नाम पर ट्रस्ट व संस्थाओं के खाते में रुपये मंगाए जाते थे। किसी को शक न होने पाए इसके लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रस्ट-संस्थाओं की आय करोड़ों में दिखाई जाती थी। गरीब तबके के व्यक्तियों को निदेशक का पद और हर माह वेतन का लालच देकर खाता खोलने के लिए उनकी आइडी ली जाती थी।
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बैंककर्मियों की भी जांची जा रही भूमिका  
एएसपी ने बताया कि इस मामले में बैंककर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उनकी भी जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान कई और नाम सामने आए हैं जिनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए टीमें लगी हुई हैं।
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