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ट्रंप की बड़ी हार से बदली हवा: अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, कच्चा तेल भी नरम पड़ा; जानिए सबकुछ

Wed, 04 Nov 2026 06:26 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 04 Nov 2026 06:26 PM IST
सार

  • अमेरिकी मिड टर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को बड़ा झटका लगा है और डेमोक्रेट्स ने संसद के दोनों सदनों पर कब्जा कर लिया है।
  • जानें इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद वॉल स्ट्रीट और कच्चे तेल के बाजारों में क्या हलचल है।

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US Midterms: Wall Street Rallies as Democrats Seize Congress; Crude Oil Tumbles
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी मिड टर्म चुनावों के नतीजों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को संसद के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट- में करारी हार का सामना करना पड़ा है और डेमोक्रेट्स ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इस बड़े उलटफेर के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। एक तरफ जहां राजनीतिक अनिश्चितता खत्म होने से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी रौनक है, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।

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आइए समझते हैं कि इस चुनावी फैसले ने बाजारों की तस्वीर कैसे बदल दी है।

अमेरिकी शेयर बाजार में अचानक इतनी तेजी क्यों आई?

आमतौर पर माना जाता है कि शेयर बाजार ट्रंप की बिजनेस-फ्रेंडली नीतियों को पसंद करता है, लेकिन इस बार नतीजों के बाद अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स (Dow Futures) 800 अंक से ज्यादा उछल गए। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि डेमोक्रेट्स की इस निर्णायक जीत और ट्रंप द्वारा नतीजों को स्वीकार कर लेने से चुनाव से जुड़ा 'पॉलिटिकल रिस्क' पूरी तरह खत्म हो गया है।

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बाजार को अब एक 'विभाजित सरकार' यानी व्हाइट हाउस में ट्रंप और संसद में डेमोक्रेट्स का संतुलन मिल गया है। इसका मतलब यह है कि ट्रंप अब मनमाने ढंग से नए भारी-भरकम टैक्स या कड़े टैरिफ लागू नहीं कर पाएंगे, जिससे बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है। विशेष रूप से रिन्यूएबल और क्लीन एनर्जी से जुड़े शेयरों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है।

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों दर्ज की गई?

राजनीतिक समीकरण बदलते ही कच्चे तेल के बाजार को बड़ी राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.4% से ज्यादा टूटकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गया है, वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) भी फिसलकर 95 डॉलर के करीब पहुंच गया है।


दरअसल, संसद में डेमोक्रेट्स का नियंत्रण आने से अब ट्रंप प्रशासन की ईरान नीतियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि इस हार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की आशंका कम होगी और कूटनीति का रास्ता साफ हो सकता है


युद्ध और तनाव की आशंका घटने से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर खत्म हो गया, जिससे कीमतों में गिरावट आई है

अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड मार्केट का क्या हाल है?

डोनाल्ड ट्रंप की इस चुनावी शिकस्त ने अमेरिकी डॉलर (US Dollar) को भी दबाव में ला दिया है। निवेशकों को लगता है कि डेमोक्रेट्स के आने से सरकार बेतहाशा कर्ज नहीं ले पाएगी, जिसके कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (Bond Yields) में गिरावट आई है और डॉलर कमजोर हुआ है। डॉलर के कमजोर होने का सीधा फायदा सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने (Gold) और चांदी को मिला है, जिनकी कीमतों में सुधार देखा जा रहा है।

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