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सीजी: एलआईसी की बंद पॉलिसी बनी साइबर ठगों का हथियार, 69 लाख रुपये गंवाने के बाद हुआ खुलासा
Sat, 31 Oct 2026 08:39 PM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कबीरधाम
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 31 Oct 2026 08:39 PM IST
सार
बंद पड़ी एलआईसी पॉलिसी की रकम वापस दिलाने का झांसा देकर 69 लाख 37 हजार 518 रुपये की साइबर ठगी की गई। ठगों ने खुद को एनसीडीआरसी और आरबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित से रकम वसूली।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कबीरधाम जिले में बंद पड़ी एलआईसी पॉलिसी की रकम वापस दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का कबीरधाम पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में दिल्ली के जामिया नगर निवासी मोहम्मद जैद खान (37) को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर 69 लाख 37 हजार 518 रुपये की ठगी की थी। पुलिस अब गिरोह में शामिल दूसरे आरोपी की तलाश कर रही है।
एएसपी अमित पटेल ने बताया कि पीड़ित ने 7 अक्तूबर 2026 को साइबर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार नवंबर 2025 से अक्तूबर 2026 के बीच अज्ञात लोगों ने उससे संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी बताया। उन्होंने बंद पड़ी एलआईसी पॉलिसी में जमा रकम वापस दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद पॉलिसी की राशि रिकवर कराने, विभिन्न संस्थाओं से एनओसी लेने और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 69,37,518 रुपये ऑनलाइन जमा करा लिए।
आरोपी की गिरफ्तारी
शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने अपराध दर्ज कर बैंक खातों के लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। इसमें दिल्ली के जामिया नगर निवासी मोहम्मद जैद खान की संलिप्तता सामने आई। आरोपी की लोकेशन दिल्ली-एनसीआर में मिलने पर पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां स्थानीय पुलिस की मदद से सघन आबादी वाले इलाके में आरोपी की तलाश की गई। पुलिस टीम ने लगातार पांच दिनों तक तकनीकी इनपुट और हुलिए के आधार पर पतासाजी की। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।
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ठगी का तरीका
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने पूर्व परिचित और बीमा कंपनी में कार्यरत सहयोगी के साथ मिलकर ठगी करता था। वे बंद पड़ी पॉलिसियों के ग्राहकों को निशाना बनाते थे। दोनों पॉलिसी की रकम वापस दिलाने या उसे दोबारा चालू कराने का झांसा देते थे। खुद को सरकारी और वित्तीय संस्थाओं का अधिकारी बताकर पीड़ितों का भरोसा जीतते थे। ठगी के लिए फर्जी बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था।
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एएसपी अमित पटेल ने बताया कि पीड़ित ने 7 अक्तूबर 2026 को साइबर पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के अनुसार नवंबर 2025 से अक्तूबर 2026 के बीच अज्ञात लोगों ने उससे संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और भारतीय रिजर्व बैंक का अधिकारी बताया। उन्होंने बंद पड़ी एलआईसी पॉलिसी में जमा रकम वापस दिलाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद पॉलिसी की राशि रिकवर कराने, विभिन्न संस्थाओं से एनओसी लेने और न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में कुल 69,37,518 रुपये ऑनलाइन जमा करा लिए।
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आरोपी की गिरफ्तारी
शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने अपराध दर्ज कर बैंक खातों के लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। इसमें दिल्ली के जामिया नगर निवासी मोहम्मद जैद खान की संलिप्तता सामने आई। आरोपी की लोकेशन दिल्ली-एनसीआर में मिलने पर पुलिस टीम दिल्ली रवाना हुई। वहां स्थानीय पुलिस की मदद से सघन आबादी वाले इलाके में आरोपी की तलाश की गई। पुलिस टीम ने लगातार पांच दिनों तक तकनीकी इनपुट और हुलिए के आधार पर पतासाजी की। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया।
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ठगी का तरीका
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपने पूर्व परिचित और बीमा कंपनी में कार्यरत सहयोगी के साथ मिलकर ठगी करता था। वे बंद पड़ी पॉलिसियों के ग्राहकों को निशाना बनाते थे। दोनों पॉलिसी की रकम वापस दिलाने या उसे दोबारा चालू कराने का झांसा देते थे। खुद को सरकारी और वित्तीय संस्थाओं का अधिकारी बताकर पीड़ितों का भरोसा जीतते थे। ठगी के लिए फर्जी बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जाता था।