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उत्तराखंड: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक साकेत बडोला ने मांगा वीआरएस, 2007 बैच के हैं आईएफएस ऑफिसर

Sat, 24 Oct 2026 12:01 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sat, 24 Oct 2026 12:01 PM IST
सार

साकेत बडोला 2007 बैच के आईएफएस हैं।वह वन महकमे में निदेशक बडोला कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि महीनों के गहरे विचार-विमर्श के बाद, मैंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय लिया है।

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Uttarakhand Corbett Tiger Reserve Director Saket Badola has sought voluntary retirement
आईएफएस साकेत बडोला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व निदेशक व मुख्य वन संरक्षक साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी है। उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत कारण बताया है। उनके आवेदन को वन मुख्यालय ने शासन को भेज दिया है।

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2007 बैच के आईएफएस बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की है। इसमें उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि महीनों के गहरे विचार-विमर्श के बाद, मैंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय लिया है। आज जब मैं अपने इस लंबे और संतोषजनक करियर पर पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे जनता की सेवा करने, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने और सबसे महत्वपूर्ण, हमारे देश के जमीनी स्तर की चुनौतियों को समझने के मिले अवसरों के लिए गहरा आभार महसूस होता है। उन्होंने अन्य बातें भी पोस्ट में कही हैं। वहीं, प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल ने बताया कि वीआरएस के लिए आवेदन किया है, उनके आवेदन को शासन स्तर पर भेज दिया गया है।

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कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे तैनात

वन महकमे में निदेशक बडोला कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। वह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उप निदेशक के पद पर भी रहे। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बाद उन्हें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का निदेशक बनाया गया। पिछले वर्ष ही उन्हें वन संरक्षक से मुख्य वन संरक्षक पद पर पदोन्नति भी दी गई थी।

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दो साल में तीसरे आईएफएस ने वीआरएस मांगा

निदेशक बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया है। पिछले दो साल में वीआरएस मांगने वाले वह तीसरे आईएफएस अधिकारी हैं। इससे पहले वन विभाग के मुखिया रहे अधिकारी भी वीआरएस ले चुके हैं। लगातार अधिकारियों के वीआरएस मांगने से वन महकमे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मुख्य वन संरक्षक पद पर तैनात रहे मनोज चंद्रन ने अक्तूबर 2024 में वीआरएस के लिए आवेदन किया था। बताया जाता है कि मार्च 2025 के बाद से वह कार्यालय नहीं आ रहे हैं। चंद्रन के अनुसार, वीआरएस के लिए तीन महीने का नोटिस दिया जाता है। इस अवधि में कोई पत्राचार नहीं होने पर सेवानिवृत्ति मान ली जाती है।

उन्होंने पांच महीने का नोटिस दिया था और इसकी सूचना वन मुख्यालय व शासन को भी दी थी। पेंशन के लिए जरूरी दस्तावेज भी जमा किए, लेकिन अब तक पेंशन या प्रोविजनल पेंशन नहीं मिली है। एक जांच के संबंध में ई-मेल से जानकारी मांगी गई थी, जिसका उन्होंने जवाब दे दिया था। इसके बाद भी उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया। वहीं, तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट धनंजय मोहन ने जून 2025 में वीआरएस ले लिया था, जबकि उनके सेवानिवृत्त होने में केवल दो महीने बाकी थे। उनके वीआरएस लेने के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए गए थे।

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