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Ghaziabad News: एक लाख का इनामी बावरिया गिरोह का सरगना मुठभेड़ में ढेर
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गाजियाबाद। मसूरी और बागपत के खेकड़ा थाने से 50-50 हजार रुपये के इनामी बावरिया गिरोह के सरगना धर्मेंद्र उर्फ टिंडी उर्फ टिड्डी को क्राइम ब्रांच ने बुधवार शाम मुठभेड़ में ढेर कर दिया। मुरादनगर गंगनहर पटरी पर हुई मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए। धर्मेंद्र पर लूट, डकैती और चोरी के 17 से अधिक मामले दर्ज थे।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) राजकरन नैय्यर ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि धर्मेंद्र अपने साथियों के साथ निवाड़ी क्षेत्र में गंगनहर के रास्ते से जाने वाला है। स्वाट टीम ने निवाड़ी थाना क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग स्थित गंगनहर पटरी पर घेराबंदी की। शाम करीब छह बजे गाजियाबाद की ओर से बाइक पर तीन व्यक्ति आते दिखे। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो वे तेज रफ्तार में बाईं ओर मुड़कर गंगनहर पटरी पर मेरठ की ओर भागने लगे।
पुलिस ने पीछा किया तो आगे कच्चे रास्ते पर बाइक फिसलने से तीनों गिर गए। इसके बाद बदमाशों ने पेड़ों की आड़ लेकर पुलिस पर फायरिंग कर दी। बदमाशों की फायरिंग में हेड कांस्टेबल अमित कुमार, विनीत कुमार और हिमांशु मलिक घायल हो गए। उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार और हेड कांस्टेबल वरुण वीर सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट में भी गोली लगी, जबकि अपराध शाखा ऑपरेशन टीम प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार बाल-बाल बचे। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश घायल हो गया। उसके दो साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घायल को निवाड़ी के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक लोनी के निठौरा का रहने वाला था। सूचना पर एसीपी केशव चौधरी, डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी और एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार ने मौके का जायजा लिया।
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पहले भी लगी थी पैर में गोली
धर्मेंद्र की पुलिस से यह पहली मुठभेड़ नहीं थी। 2019 में शामली पुलिस ने उसे मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था, जिसमें उसके पैर में गोली लगी थी। तब उस पर शामली से 15 और गाजियाबाद से 25 हजार का इनाम था। जेल से बाहर आकर भी वह वारदात करता रहा। 2025 में डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र और एडीशनल सीपी अपराध गाजियाबाद ने 50-50 हजार का इनाम घोषित किया था।
बरामदगी
मौके से दो .32 बोर पिस्टल, दो मैगजीन, तीन जिंदा कारतूस, 12 खोखे, .315 बोर के दो जिंदा कारतूस और तीन खोखे बरामद हुए। बिना नंबर प्लेट की काले रंग की स्प्लेंडर बाइक भी मिली, जो दिल्ली से चोरी की थी। बदमाशों के पास से 2250 रुपये नकद भी मिले। धर्मेंद्र पर खेकड़ा, मसूरी, मुजफ्फरनगर, शामली और गाजियाबाद के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, डकैती और जानलेवा हमले के मामले दर्ज थे।
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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) राजकरन नैय्यर ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि धर्मेंद्र अपने साथियों के साथ निवाड़ी क्षेत्र में गंगनहर के रास्ते से जाने वाला है। स्वाट टीम ने निवाड़ी थाना क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग स्थित गंगनहर पटरी पर घेराबंदी की। शाम करीब छह बजे गाजियाबाद की ओर से बाइक पर तीन व्यक्ति आते दिखे। पुलिस ने रोकने का प्रयास किया तो वे तेज रफ्तार में बाईं ओर मुड़कर गंगनहर पटरी पर मेरठ की ओर भागने लगे।
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पुलिस ने पीछा किया तो आगे कच्चे रास्ते पर बाइक फिसलने से तीनों गिर गए। इसके बाद बदमाशों ने पेड़ों की आड़ लेकर पुलिस पर फायरिंग कर दी। बदमाशों की फायरिंग में हेड कांस्टेबल अमित कुमार, विनीत कुमार और हिमांशु मलिक घायल हो गए। उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार और हेड कांस्टेबल वरुण वीर सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट में भी गोली लगी, जबकि अपराध शाखा ऑपरेशन टीम प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार बाल-बाल बचे। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश घायल हो गया। उसके दो साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घायल को निवाड़ी के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक लोनी के निठौरा का रहने वाला था। सूचना पर एसीपी केशव चौधरी, डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी और एडीसीपी अपराध पीयूष कुमार ने मौके का जायजा लिया।
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पहले भी लगी थी पैर में गोली
धर्मेंद्र की पुलिस से यह पहली मुठभेड़ नहीं थी। 2019 में शामली पुलिस ने उसे मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था, जिसमें उसके पैर में गोली लगी थी। तब उस पर शामली से 15 और गाजियाबाद से 25 हजार का इनाम था। जेल से बाहर आकर भी वह वारदात करता रहा। 2025 में डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र और एडीशनल सीपी अपराध गाजियाबाद ने 50-50 हजार का इनाम घोषित किया था।
बरामदगी
मौके से दो .32 बोर पिस्टल, दो मैगजीन, तीन जिंदा कारतूस, 12 खोखे, .315 बोर के दो जिंदा कारतूस और तीन खोखे बरामद हुए। बिना नंबर प्लेट की काले रंग की स्प्लेंडर बाइक भी मिली, जो दिल्ली से चोरी की थी। बदमाशों के पास से 2250 रुपये नकद भी मिले। धर्मेंद्र पर खेकड़ा, मसूरी, मुजफ्फरनगर, शामली और गाजियाबाद के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, डकैती और जानलेवा हमले के मामले दर्ज थे।