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Una News: मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना से सुनील ने संवारा कारोबार, दूसरे को भी दिया रोजगार

Mon, 02 Nov 2026 04:50 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Mon, 02 Nov 2026 04:50 AM IST
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Sunil revamped his business through the 'Mukhyamantri Sukh-Ashray Yojana' and also provided employment to others.
दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता से मोबाइल रिपेयरिंग के काम का किया विस्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना जिले के गगरेट उपमंडल के शिवपुर गांव निवासी सुनील कुमार के लिए मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना बड़ा संबल साबित हुई है। योजना के तहत मिली दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता से उन्होंने अपने मोबाइल रिपेयरिंग कारोबार को विस्तार दिया। वर्ष 2020 में एक छोटे से खोखे से शुरू हुआ उनका काम आज दुकान तक पहुंच चुका है। यहां मोबाइल रिपेयरिंग के साथ एक्सेसरीज, स्पेयर पार्ट्स, लैपटॉप संबंधी कार्य और फोटोस्टेट की सुविधा भी उपलब्ध है।
कारोबार बढ़ने से उनकी आमदनी में सुधार हुआ है और वह एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई इस योजना ने सुनील के हुनर को आगे बढ़ाने और उन्हें स्वरोजगार से रोजगार सृजन तक पहुंचाने में मदद की है।उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार जिला प्रशासन योजना का लाभ प्रत्येक पात्र बच्चे तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना के लाभ से वंचित न रहे।
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खोखे से शुरू हुआ कारोबार, योजना से मिला विस्तार
वर्ष 2020 में सुनील ने अपने सीमित संसाधनों से एक छोटे से खोखे में मोबाइल रिपेयरिंग का काम शुरू किया। धीरे-धीरे काम बढ़ने लगा, लेकिन कारोबार को आगे ले जाने के लिए पूंजी की जरूरत थी। इसी दौरान उन्हें मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी मिली। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से सहायता के लिए आवेदन किया।वित्त वर्ष 2025-26 में योजना के तहत उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कर प्रदान की गई। यह राशि दो किस्तों में मिली। पहली किस्त में 1.40 लाख रुपये और दूसरी किस्त में 60 हजार रुपये दिए गए। इस आर्थिक मदद से उन्होंने दुकान में जरूरी सुविधाएं जुटाईं और कारोबार का दायरा बढ़ाया। बाक्स बढ़ी आमदनी, दूसरे को भी दिया रोजगार सुनील बताते हैं कि दुकान और घर का खर्च निकालने के बाद वह हर महीने करीब 10 से 15 हजार रुपये बचा पा रहे हैं। उन्होंने दुकान पर एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार दिया है। अब वह अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। भविष्य में दुकान के साथ लोक मित्र केंद्र और डीजे संबंधी कार्य शुरू करने की उनकी योजना है, ताकि आमदनी के अतिरिक्त साधन विकसित किए जा सकें।
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