फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kolkata Durga Puja Stampede: Forensic Report Reveals Inadequate Ventilation and Cooling Arrangements

कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में क्यों मची भगदड़?: फोरेंसिक रिपोर्ट में पता चली चूक, न्यायिक समिति ने उठाए सवाल

Fri, 23 Oct 2026 09:42 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 23 Oct 2026 09:42 PM IST
सार

कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ से 19 लोगों की मौत के मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट ने वेंटिलेशन और कूलिंग की कमी की ओर इशारा किया है। पंडाल में 24 एसी मशीनें थीं, लेकिन भीड़ क्षमता से अधिक थी। न्यायिक समिति ने संकरे रास्तों और बंद आपातकालीन निकास का भी जिक्र किया। क्या इन कमियों ने हादसे को गंभीर बनाया? जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Kolkata Durga Puja Stampede: Forensic Report Reveals Inadequate Ventilation and Cooling Arrangements
आखिर कैसे बिगड़े हालात? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की रात हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के मामले में फोरेंसिक रिपोर्ट से अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पंडाल में हवा आने-जाने और ठंडक बनाए रखने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। भारी भीड़ के कारण लोगों को घुटन महसूस हुई होगी। इस हादसे ने पंडाल की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की संख्या और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के इंतजामों पर सवाल खड़े किए हैं।

विज्ञापन


फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल में कुल 24 एयर कंडीशनिंग मशीनें लगाई गई थीं, जिनकी संयुक्त क्षमता 139 टन थी। कोलकाता पुलिस के एक सूत्र के मुताबिक, पंडाल के आकार और बनावट को देखते हुए श्रद्धालुओं की संख्या कम या मध्यम रहने पर यह व्यवस्था पर्याप्त हो सकती थी। लेकिन भगदड़ के समय वहां लोगों की संख्या काफी ज्यादा थी और भीड़ उपलब्ध व्यवस्था की क्षमता से अधिक हो गई थी। ऐसे में एयर कंडीशनिंग मशीनें होने के बावजूद पंडाल में हवा और ठंडक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं रह गई थी। रिपोर्ट में इसी स्थिति के कारण लोगों को घुटन महसूस होने की आशंका जताई गई है।
विज्ञापन


पंडाल में कूलिंग की व्यवस्था होने के बाद भी घुटन क्यों हुई?
हादसे के समय बारिश भी हो रही थी, जिससे पंडाल के अंदर और बाहर लोगों की भीड़ बढ़ गई थी। पंडाल के भीतर मौजूद श्रद्धालु बारिश के कारण बाहर निकलने से बच रहे थे, जबकि बाहर खड़े लोग बारिश से बचने के लिए अंदर आने की कोशिश कर रहे थे। इससे परिसर में लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई। पंडाल में लगी 24 एयर कंडीशनिंग मशीनों की कुल क्षमता 139 टन होने के बावजूद इतनी बड़ी भीड़ के लिए वेंटिलेशन और कूलिंग की व्यवस्था अपर्याप्त साबित हुई। फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया है कि हवा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और लोगों की भारी भीड़ के कारण घुटन की स्थिति पैदा हुई होगी। हालांकि, रिपोर्ट में इसे हादसे के संदर्भ में एक संभावित कारण के तौर पर बताया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल: सितंबर में 330 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे; स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?

पंडाल की बनावट और रास्तों को लेकर जांच में क्या सामने आया?
राज्य सरकार की ओर से नियुक्त न्यायिक जांच समिति की अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती ने गुरुवार को पंडाल का दौरा किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने कहा कि पंडाल के प्रवेश और निकास द्वार बेहद संकरे थे। इसके अलावा, अंदर रोशनी कम होने से भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब पंडाल परिसर में अफरा-तफरी शुरू हुई, उस समय आपातकालीन निकास द्वार बंद था। इन परिस्थितियों ने लोगों के सुरक्षित आवागमन को प्रभावित किया हो सकता है। न्यायिक जांच समिति इन व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच कर रही है, ताकि हादसे के दौरान पैदा हुई परिस्थितियों को समझा जा सके।


प्रतिमाओं का विसर्जन कब होगा और पंडाल को क्यों रखा जाएगा सुरक्षित?
चोरबागान सर्वजनिन की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार को करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच पैनल के अगले आदेश तक हादसे वाला पंडाल यथावत रखा जाएगा। न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती ने निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया था कि प्रतिमाओं के विसर्जन में कोई समस्या नहीं है, लेकिन विस्तृत जांच के लिए पंडाल को उसी स्थिति में बनाए रखना जरूरी है। इससे जांच समिति को पंडाल की संरचना, रास्तों, निकास द्वार और अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण करने में मदद मिल सकती है। मामले की जांच केवल न्यायिक समिति तक सीमित नहीं है, बल्कि कोलकाता पुलिस की एक विशेष जांच टीम भी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने में किन बातों की जांच होगी?
फोरेंसिक रिपोर्ट में वेंटिलेशन और कूलिंग की कमी का उल्लेख होने के साथ ही न्यायिक जांच समिति ने संकरे प्रवेश-निकास द्वार, कम रोशनी और कथित तौर पर बंद आपातकालीन निकास का मुद्दा उठाया है। इन सभी पहलुओं की जांच से यह समझने में मदद मिल सकती है कि पंडाल में भीड़ किस तरह बढ़ी और अफरा-तफरी के दौरान लोगों को बाहर निकलने में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी एक कारण को हादसे की अंतिम वजह नहीं कहा जा सकता। न्यायिक जांच पैनल और कोलकाता पुलिस की विशेष टीम की जांच के बाद ही घटनाक्रम और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर अधिक स्पष्टता आ सकेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed