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सिंडिकेट: 'द ठेका' पर बेची गई बिना 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' वाली विदेशी शराब, यूं हुई कस्टम ड्यूटी की चोरी
Wed, 04 Nov 2026 08:34 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 04 Nov 2026 08:34 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शराब सिंडिकेट से जुड़े धनशोधन मामले में 3 और 4 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में 10 ठिकानों पर छापेमारी की। आरोप है कि सिंडिकेट ने कस्टम और आबकारी शुल्क बचाने के लिए बिना होलोग्राम वाली एक लाख से अधिक विदेशी शराब की बोतलें अवैध रूप से बेचीं। गुरुग्राम के 'द ठेका' के जरिए शराब को वैध स्टॉक बताकर बेचा गया।
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शराब सिंडिकेट पर ईडी की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने 3 और 4 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में 10 ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह मामला एक शराब सिंडिकेट से जुड़ा है, जो बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' वाली भारी मात्रा में विदेशी शराब खरीदता और जमा करता था। इस शराब को गुरुग्राम में 'द ठेका' नाम की एक लाइसेंसी शराब की दुकान के जरिए अवैध रूप से बेचा जाता था। इसके मालिक अंकुश गोयल और उनके अन्य साझेदार हैं। तलाशी के दौरान 'द ठेका' से जुड़े लोगों, विदेशी शराब के सप्लायरों, बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' वाली विदेशी शराब की सप्लाई में शामिल अनधिकृत व्यक्तियों और शराब सिंडिकेट का हिस्सा रहे ट्रांसपोर्टरों के दफ्तरों और घरों की जांच की गई।
'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' के दुरुपयोग के आरोप
ईडी की जांच हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई। इसमें विदेशी शराब की अवैध बिक्री और आयातित विदेशी शराब (आईएफएल) के 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' के दुरुपयोग के आरोप थे। इसके जरिए कस्टम ड्यूटी और राज्य उत्पाद शुल्क की चोरी की गई थी। यह एफआईआर आबकारी अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने 09 दिसंबर 2025 को 'द ठेका' से 3921 केस और 176 बोतलें आयातित विदेशी शराब जब्त की थीं। उन पर कोई होलोग्राम या 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' नहीं थे। इसके अलावा, हरियाणा पुलिस ने शराब सिंडिकेट के कुछ सदस्यों के खिलाफ नकली शराब बेचने के आरोप में एक और एफआईआर भी दर्ज की थी।
बिना कस्टम ड्यूटी के भेजी गई शराब
जांच से पता चला है कि बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस' स्ट्रिप वाली जो विदेशी शराब मिली है, उसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा भारत में आयात किया गया था। शराब सिंडिकेट ने 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। इस सिस्टम के तहत, शराब को एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी चुकाए भेजा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाईं और जरूरी कस्टम लाइसेंस व दस्तावेज हासिल किए। विदेशी शराब सप्लायर कंपनियों को बैंकिंग चैनलों के जरिए भुगतान करने के बाद, शराब को हरियाणा के बॉन्डेड वेयरहाउस में भेज दिया गया। वहां पर शराब को गोवा/महाराष्ट्र के तय वेयरहाउस में भेजने के बजाय, शराब सिंडिकेट ने ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर इस विदेशी शराब को सीधे गुरुग्राम की शराब की दुकानों तक पहुंचा दिया।
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ग्राहकों को बताया 'वैध आयातित विदेशी स्टॉक'
वहां इसे ग्राहकों को 'वैध आयातित विदेशी स्टॉक' बताकर बेच दिया गया। इस तरह उन्होंने लागू कस्टम ड्यूटी, सेस और अन्य करों की चोरी की, जिससे अपराध से प्राप्त कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) पैदा हुई। तलाशी के दौरान पता चला कि 2025-2027 की अवधि के लिए शराब का लाइसेंस मिलने के बाद, शराब सिंडिकेट ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए एक योजना बनाई। इसके तहत, उन्होंने बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस' स्ट्रिप्स वाली विदेशी शराब मंगवाई और बेची। जांच में सामने आया है कि जून 2025 से नवंबर 2025 के बीच, इस सिंडिकेट ने विदेशी शराब की 1 लाख से अधिक बोतलें मंगवाईं।
विदेशी शराब पर 20-25% का मुनाफा
इस विदेशी शराब को बिना कस्टम ड्यूटी, वैट, अन्य लागू करों और परमिट फीस (जो आयातित शराब की प्रति बल्क लीटर के हिसाब से देनी होती है) का भुगतान किए, अवैध रूप से शराब की दुकानों (ठेकों) के जरिए बेच दिया गया। इन दुकानों ने इस विदेशी शराब को वैध स्टॉक बताकर बेचा, जिससे उन्हें 20-25% का मुनाफा हुआ। इस तरह उन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (अपराध से प्राप्त रकम) की। तलाशी अभियान के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, विदेशी शराब की खरीद से जुड़े कागजात/जानकारी, और कस्टम 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड' प्रक्रिया के तहत मंगवाई गई व सप्लाई की गई विदेशी शराब के डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं।
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'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' के दुरुपयोग के आरोप
ईडी की जांच हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई। इसमें विदेशी शराब की अवैध बिक्री और आयातित विदेशी शराब (आईएफएल) के 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' के दुरुपयोग के आरोप थे। इसके जरिए कस्टम ड्यूटी और राज्य उत्पाद शुल्क की चोरी की गई थी। यह एफआईआर आबकारी अधिकारियों की शिकायत पर दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने 09 दिसंबर 2025 को 'द ठेका' से 3921 केस और 176 बोतलें आयातित विदेशी शराब जब्त की थीं। उन पर कोई होलोग्राम या 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' नहीं थे। इसके अलावा, हरियाणा पुलिस ने शराब सिंडिकेट के कुछ सदस्यों के खिलाफ नकली शराब बेचने के आरोप में एक और एफआईआर भी दर्ज की थी।
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बिना कस्टम ड्यूटी के भेजी गई शराब
जांच से पता चला है कि बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस' स्ट्रिप वाली जो विदेशी शराब मिली है, उसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनियों द्वारा भारत में आयात किया गया था। शराब सिंडिकेट ने 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड ट्रांसफर' सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। इस सिस्टम के तहत, शराब को एक राज्य से दूसरे राज्य में बिना कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी चुकाए भेजा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने हरियाणा और गोवा/महाराष्ट्र में अलग-अलग कंपनियां बनाईं और जरूरी कस्टम लाइसेंस व दस्तावेज हासिल किए। विदेशी शराब सप्लायर कंपनियों को बैंकिंग चैनलों के जरिए भुगतान करने के बाद, शराब को हरियाणा के बॉन्डेड वेयरहाउस में भेज दिया गया। वहां पर शराब को गोवा/महाराष्ट्र के तय वेयरहाउस में भेजने के बजाय, शराब सिंडिकेट ने ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर इस विदेशी शराब को सीधे गुरुग्राम की शराब की दुकानों तक पहुंचा दिया।
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ग्राहकों को बताया 'वैध आयातित विदेशी स्टॉक'
वहां इसे ग्राहकों को 'वैध आयातित विदेशी स्टॉक' बताकर बेच दिया गया। इस तरह उन्होंने लागू कस्टम ड्यूटी, सेस और अन्य करों की चोरी की, जिससे अपराध से प्राप्त कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) पैदा हुई। तलाशी के दौरान पता चला कि 2025-2027 की अवधि के लिए शराब का लाइसेंस मिलने के बाद, शराब सिंडिकेट ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए एक योजना बनाई। इसके तहत, उन्होंने बिना होलोग्राम और 'ट्रैक एंड ट्रेस' स्ट्रिप्स वाली विदेशी शराब मंगवाई और बेची। जांच में सामने आया है कि जून 2025 से नवंबर 2025 के बीच, इस सिंडिकेट ने विदेशी शराब की 1 लाख से अधिक बोतलें मंगवाईं।
विदेशी शराब पर 20-25% का मुनाफा
इस विदेशी शराब को बिना कस्टम ड्यूटी, वैट, अन्य लागू करों और परमिट फीस (जो आयातित शराब की प्रति बल्क लीटर के हिसाब से देनी होती है) का भुगतान किए, अवैध रूप से शराब की दुकानों (ठेकों) के जरिए बेच दिया गया। इन दुकानों ने इस विदेशी शराब को वैध स्टॉक बताकर बेचा, जिससे उन्हें 20-25% का मुनाफा हुआ। इस तरह उन्होंने 10 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (अपराध से प्राप्त रकम) की। तलाशी अभियान के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, विदेशी शराब की खरीद से जुड़े कागजात/जानकारी, और कस्टम 'बॉन्ड-टू-बॉन्ड' प्रक्रिया के तहत मंगवाई गई व सप्लाई की गई विदेशी शराब के डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं।