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चीनी घुसपैठ के दावे पर बरसे ओवैसी: मोदी सरकार से मांगा जवाब, कर दी संसद के विशेष सत्र को बुलाने की मांग

Sat, 24 Oct 2026 11:44 AM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 24 Oct 2026 11:44 AM IST
सार

असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ पर मोदी सरकार से जवाब, विस्तृत रिपोर्ट और संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी इस मुद्दे पर सवाल पूछे थे, लेकिन उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

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Owaisi lashes out over Chinese incursion Demands answer from Modi government call special session Parliament
असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों और भारतीय जवानों व आम नागरिकों को रोके जाने की खबरों पर सरकार देश को पूरी जानकारी नहीं दे रही है। ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से पूछा है कि अरुणाचल प्रदेश में आखिर क्या हो रहा है और अब तक इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने सीमा की स्थिति पर संसद में चर्चा कराने और पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट सामने रखने की मांग भी की है।

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आईटीबीपी के डीजी की जानकारी पर उठाए सवाल
ओवैसी ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की ओर से अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ लगातार टकराव की बात सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि जब सीमा पर इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो सरकार को देश के सामने पूरी तस्वीर रखनी चाहिए। ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पहले भी इस मुद्दे पर सवाल पूछे थे, लेकिन उन्हें अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
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कहां घुसे चीनी सैनिक, सरकार से मांगा हिसाब
एआईएमआईएम प्रमुख ने सरकार से उन इलाकों के नाम बताने को कहा है, जहां चीनी सैनिकों के घुसने की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या भारतीय गश्ती दलों और स्थानीय नागरिकों को इन इलाकों में जाने से रोका गया है और क्या चीनी सैनिक वहां से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ओवैसी यह भी जानना चाहते हैं कि ऐसी स्थिति कब से बनी हुई है और चीन के साथ बातचीत के दौरान भारत सरकार ने इस मुद्दे को किस तरह उठाया है।
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पीएम मोदी के पुराने बयान का भी किया जिक्र
ओवैसी ने जून 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चीन से जुड़े सीमा विवाद पर दिए गए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय कही गई बातों और बाद में सामने आई घटनाओं के बीच क्या संबंध है। उनके मुताबिक, सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने भी भारत-चीन सीमा की स्थिति पर अपना पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि विस्तृत जानकारी के लिए रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सीमा पर तनाव उस समय बढ़ सकता है, जब चीनी सैनिक तय गश्त के तरीके से अलग गतिविधियां करते हैं। ऐसे मामलों को सुलझाने के लिए दोनों देश राजनयिक और सैन्य स्तर पर बने तंत्रों का इस्तेमाल करते हैं।


LAC पर बातचीत जारी, शांति बनाए रखने पर जोर
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी से बचने के लिए बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने कुछ इलाकों में LAC को लेकर अपनी समझ बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा करने पर भी सहमति जताई है। मंत्रालय ने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है।

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संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
ओवैसी ने मांग की है कि सीमा की स्थिति और चीन के प्रति भारत की नीति पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में सरकार को खुलकर जवाब देना चाहिए। उनका कहना है कि सीमा पर क्या स्थिति है, इस बारे में देश को भरोसे में लेना जरूरी है। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आगे क्या जानकारी दी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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