सियांग परियोजना: राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है मामला, भरोसे के संकट में कैसे उलझा भारत का प्रोजेक्ट?
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चीन की ब्रह्मपुत्र पर विशाल जलविद्युत परियोजना के जवाब में भारत की प्रस्तावित 11,200 मेगावाट वाली सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना गंभीर कानून-व्यवस्था के संकट में घिर गई है। हिंसा के बाद पूर्वी सियांग और उससे जुड़े इलाकों में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थानीय संगठनों को आशंका है कि परियोजना से उनके गांव, कृषि भूमि और पारंपरिक जीवन प्रभावित होगा। ऐसे में भारत की चुनौती चीन से जुड़ी चिंताओं का जवाब देने के लिए स्थानीय समुदायों का भरोसा हासिल करने की है।
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क्या हैं स्थानीय आशंकाएं?
स्थानीय संगठनों का दावा है कि इस मेगा प्रोजेक्ट के बनने से सियांग घाटी के दर्जनों गांव जलमग्न हो सकते हैं और हजारों लोग विस्थापित हो सकते हैं। हालांकि जानकारी के मुताबिक स्थानीय समुदायों के रुख में भी इस परियोजना को लेकर एकरुपता नहीं है। इसके बावजूद अविश्वास की खाई लगातार चौड़ी हो रही है।
भारत की रणनीतिक मजबूरी
इस पूरे मामले की जड़ें तिब्बत में हैं, जहां चीन ब्रह्मपुत्र नदी के निचले भाग में लगभग 60,000 मेगावाट की विशाल परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है। चीन ने इस पर जुलाई 2025 से काम निर्माण कार्य शुरूकर दिया है। आशंका है कि ऊपरी प्रवाह पर चीन के नियंत्रण से वह भविष्य में पूर्वोत्तर राज्यों में विनाशकारी बाढ़ जैसा संकट पैदा कर सकता है। बिजली उत्पादन के मामले में चीन की परियोजना भारत की परियोजना से लगभग पांच गुना बड़ी है, लेकिन जल भंडारण के मामले में भारत की परियोजना चीन से लगभग दोगुनी हो सकती है। क्योंकि भारत की परियोजना का उद्देश्य बिजली बनाने के अलावा नदी के प्रवाह को नियंत्रित कर बाढ़ का जोखिम कम करना भी है। इसी सामरिक खतरे से निपटने के लिए सियांग परियोजना को भारत की जल-सुरक्षा रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि आदिवासी समुदायों का विश्वास जीते बगैर इस बड़ी परियोजना को जमीन पर उतारना बेहद मुश्किल है।
विदेशी फंडिंग की सुगबुगाहट
सीबीआई ने पर्यावरण कार्यकर्ता और सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की कानूनी सलाहकार भानु टाटाक के खिलाफ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन की जांच शुरू की है। सामरिक दृष्टि से संवेदनशील इस मामले में स्थानीय असंतोष के साथ-साथ सुनियोजित विदेशी फंडिंग की आशंकाएं भी हैं, जिनकी पड़ताल जारी है। हालांकि स्थानीय संगठन इन आरोपों को आंदोलन को कुचलने की साजिश करार दे रहे हैं।
हिंसा के बाद सुरक्षा बलों का पहरा
23 अक्तूबर को पासीघाट में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) कार्यालय व पुलिस थाने को निशाना बनाया। आगजनी के बाद अपर सियांग, सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में केंद्रीय बलों की लगभग 30 कंपनियां तैनात की गई हैं। इनमें सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और आरएएफ शामिल हैं। साथ ही असम पुलिस की टुकड़ियां और रिजर्व बटालियन भी मुस्तैद हैं। बांध-विरोध से जुड़े विभिन्न मामलों में अब तक 69 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुल 50 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत 200 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं। सियांग और अपर सियांग जिलों को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पुल को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। यह पुल प्रस्तावित परियोजना के चार ड्रिलिंग स्थलों तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है। स्थानीय संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि सर्वेक्षण और ड्रिलिंग को फौरन रोका जाए और गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए।