सुप्रीम कोर्ट अपडेट: रिलायंस-केंद्र के बीच केजी बेसिन गैस विवाद, अब रंजना प्रकाश देसाई करेंगी मध्यस्थता
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बृहस्पतिवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में नौ वकीलों को जज नियुक्त करने की सिफारिश की। कॉलेजियम की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कॉलेजियम में सीजेआई सूर्यकांत के अलावा जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बीवी नागरत्ना शामिल हैं। जज नियुक्त करने के लिए जिन नौ वकीलों के नामों की सिफारिश की गई है, उनमें विशाल शर्मा, विक्रम कुमार शर्मा, नामग्याल वांगचुक, पवन कुमार कुंडल, ताहिर माजिद शम्सी, तबस्सुम जफर, अमित गुप्ता, प्रणव कोहली और अनुपम रैना शामिल हैं। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हाईकोर्ट का कोई चीफ जस्टिस बार को नाराज करने का खतरा नहीं उठाना चाहता: सीजेआई
चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि बार एसोसिएशनों के विरोध के कारण सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को हाईकोर्ट में अस्थायी जज नियुक्त करने की पहल आगे नहीं बढ़ सकी। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित मुकदमों का बोझ कम करना था। सीजेआई ने कहा कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश बोबडे, जस्टिस कौल और उनकी पीठ ने सेवानिवृत्त जजों को तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त करने की परंपरा दोबारा शुरू करने की कोशिश की थी। लेकिन बार एसोसिएशनों ने इसके विरोध में प्रस्ताव पारित किए। उन्होंने कहा कि कोई भी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बार को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ राजस्थान के न्यायिक अधिकारियों की वरिष्ठता से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।
KG बेसिन गैस विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने रंजना प्रकाश देसाई को बनाया मध्यस्थ
सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन गैस विवाद के समाधान के लिए पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला सुनाया। इस विवाद में रिलायंस इंडस्ट्रीज, बीपी एक्सप्लोरेशन और निको कंपनी शामिल हैं। कोर्ट ने मध्यस्थ की मदद के लिए दो विशेषज्ञों की नियुक्ति का भी सुझाव दिया है। केंद्र सरकार ने मध्यस्थता प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है। मामला गैस के एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने और उससे जुड़े भुगतान के विवाद का है।
केरल में एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार और नाम जुड़वाने की प्रक्रिया लगातार जारी है, इसलिए समय बढ़ाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, जिन लोगों के गणना फॉर्म जमा नहीं हो सके, याचिकाकर्ता उनके नाम और विवरण चुनाव आयोग को दे सकेंगे। आयोग इन शिकायतों की जांच कर चार सप्ताह में अदालत को रिपोर्ट सौंपेगा। कोर्ट ने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों पर भी जवाब मांगा है।
यूएपीए मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को मिली जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की याचिका खारिज कर दी। परवेज को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जून को जमानत दी थी। एनआईए ने इस फैसले को चुनौती दी थी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया। परवेज को 22 नवंबर 2021 को एनआईए ने गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप था कि वह मानवाधिकार कार्यकर्ता की आड़ में लश्कर-ए-तैयबा के एक सदस्य के साथ मिलकर आतंकी गतिविधियों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर्स का नेटवर्क चला रहे थे। परवेज ने इन आरोपों से इनकार किया है। हाईकोर्ट ने उनकी चार साल से अधिक की हिरासत और मुकदमा जल्द पूरा होने की संभावना नहीं होने को जमानत का आधार बनाया था। अदालत ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकार यूएपीए की धारा 43डी(5) की जमानत संबंधी पाबंदी से ऊपर हैं। परवेज 2004 में बारूदी सुरंग विस्फोट में अपना एक पैर गंवा चुके हैं। हाईकोर्ट ने उनकी शारीरिक स्थिति को भी विशेष विचार का आधार माना था।