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Lucknow News: करवाचौथ के चांद तले मजहब की दीवारें बौनी

Thu, 29 Oct 2026 01:59 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2026 01:59 AM IST
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Under the light of the Karwa Chauth moon, the walls of religion shrink into insignificance.
लखनऊ। करवाचौथ का त्योहार महिलाओं के लिए बहुत मायने रखता है। हालांकि जब पति-पत्नी में से किसी एक का धर्म अलग हो तब यह त्योहार सिर्फ एक परंपरा न रहकर आपसी समझ, सम्मान और साथ निभाने के वादे की मिसाल बन जाता है। शहर में ऐसे कई दंपती हैं, जिन्होंने धर्म की दीवार को पार कर ना सिर्फ प्यार किया बल्कि अपने साथ को भी बनाए रखा। करवाचौथ स्पेशल में पढ़िए कुछ ऐसे ही दंपती की कहानी...
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1- पूरे रीति-रिवाज के साथ करवा चौथ मनाती हैं शीबा
अमित सिंह और शीबा ने कुछ महीनों की जान-पहचान के बाद जीवनभर साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने साल 2010 में शादी कर ली। परिवार ने रिश्ते को स्वीकार नहीं किया, तो वे 8 साल तक सुल्तानपुर में रहे। बाद में वे लखनऊ लौट आए और अपना घर बसाया। अमित ने बताया कि वे और शीबा दोनों धर्मों को मानते हैं। शादी के बाद से शीबा हर साल करवाचौथ का त्योहार पूरे रीति-रिवाज के साथ मनाती हैं।
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2- कॉलेज के प्यार से जीवन भर का साथ-
आशियाना के रहने वाले शौकत अली जब लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे तभी उनकी मुलाकात आईटी कॉलेज में पढ़ने वाली शालूू अग्रवाल से हुई। 2005 में दोनों ने शादी कर ली। परिवार के विरोध पर दोनों घरवालों से अलग रहने लगे। घर चलाने के लिए शुरुआती दिनों में शौकत ने नौकरी की और शालू ने भी बच्चों को पढ़ाया। शौकत ने बताया कि करीब 15 साल अलग रहने के बाद परिवार ने रिश्ते को अपनाया। उन्होंने बताया कि शालू सभी परंपराओं को मानती हैं और हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
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