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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain To Host Cinema Mahakumbh- Ujjaini Short Film Festival On Oct 24-25

उज्जैन: 24-25 अक्टूबर को शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल, 'नदिया के पार से कांतारा की डोर' होगा खास आकर्षण

Fri, 23 Oct 2026 08:12 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2026 08:12 PM IST
सार

उज्जैन में 24 और 25 अक्टूबर को उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 आयोजित होगा। विश्व संवाद केंद्र मालवा और भारतीय चित्र साधना के संयुक्त आयोजन में लोक एवं जनजातीय संस्कृति पर आधारित फिल्मों के साथ एआई फिल्म, विज्ञापन फिल्म और माइक्रो ड्रामा को भी मंच मिलेगा। 

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Ujjain To Host Cinema Mahakumbh- Ujjaini Short Film Festival On Oct 24-25
उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाकाल की नगरी में अब लोक संस्कृति और आधुनिक सिनेमा का संगम देखने को मिलेगा। लोक परंपराओं, जनजातीय जीवन और बदलते भारत की कहानियां बड़े पर्दे पर नए अंदाज में गूंजेंगी। शहर में 24 और 25 अक्टूबर को उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन होने जा रहा है। दो दिवसीय फेस्टिवल में देशभर के फिल्मकार अपनी फिल्मों के जरिए समाज, संस्कृति और बदलते दौर की कहानियां पेश करेंगे। आयोजन में पारंपरिक लोक जीवन से लेकर आधुनिक तकनीक पर आधारित फिल्म निर्माण तक, कई तरह की रचनात्मक विधाओं को मंच दिया जाएगा।

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10 श्रेणियों में दिखाई देंगी फिल्में
विश्व संवाद केंद्र मालवा और भारतीय चित्र साधना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस फेस्टिवल में फिल्मों को 10 अलग-अलग श्रेणियों में आमंत्रित किया गया है। फेस्टिवल के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य अलग-अलग विषयों और फिल्म निर्माण की विविध विधाओं को प्रोत्साहित करना है। इस बार सबसे खास आकर्षण ‘नदिया के पार से कांतारा की डोर’ श्रेणी होगी, जिसमें लोक एवं जनजातीय संस्कृति से जुड़ी कहानियों को प्रमुखता दी जाएगी।
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लोक और जनजातीय संस्कृति की कहानियों को मिलेगा मंच
फेस्टिवल के संयोजक आदित्य सेंगर के अनुसार, ‘नदिया के पार से कांतारा की डोर’ श्रेणी में लोक एवं जनजातीय संस्कृति पर आधारित फिल्मों को शामिल किया जाएगा। इनमें जनजातीय समुदायों की जीवनशैली, लोक कथाएं, पारंपरिक संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प, भाषाएं और त्योहार जैसे विषय शामिल होंगे।

इसके अलावा प्रकृति और जमीन से जनजातीय समाज के जुड़ाव तथा बदलते समय के साथ उनकी आकांक्षाओं को भी फिल्मों के माध्यम से सामने लाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उन समुदायों और परंपराओं की कहानियों को मुख्यधारा तक पहुंचाना है, जिन्हें मनोरंजन जगत में अक्सर पर्याप्त जगह नहीं मिलती। फिल्मकारों को स्थानीय संस्कृति और समाज के अनदेखे पहलुओं को रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।


शॉर्ट फिल्म से एआई फिल्म तक, नए प्रारूपों को भी मौका
विश्व संवाद केंद्र के सचिव प्रणव पेठनकर ने बताया कि फेस्टिवल केवल शॉर्ट फिल्मों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें एआई फिल्म, विज्ञापन फिल्म और माइक्रो ड्रामा जैसे आधुनिक प्रारूपों में भी प्रविष्टियां आमंत्रित की जा रही हैं। इससे पारंपरिक फिल्म निर्माण के साथ नई तकनीकों और कहानी कहने के बदलते तरीकों को भी मंच मिलेगा।

युवाओं के लिए होगी विशेष मास्टर क्लास
फेस्टिवल में नए रचनाकारों और फिल्म निर्माण के विद्यार्थियों के लिए विशेष मास्टर क्लास भी आयोजित की जाएगी। इसके जरिए प्रतिभागियों को फिल्म मेकिंग की बारीकियां समझने और अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। आयोजन में अनुभवी फिल्मकारों और नए रचनाकारों के बीच संवाद की संभावना भी बनेगी।

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