पोलियो एक गंभीर संक्रामक और जानलेवा बीमारी है। पोलियोवायरस के कारण होने वाला ये संक्रमण मुख्यरूप से 5 साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। इससे रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है जिससे लकवा और गंभीर स्थितियों में मृत्यु हो सकती है।
अलर्ट: पोलियो को क्यों माना जाता है इतना खतरनाक, कैसे फैलता है ये संक्रमण? जानिए इस साल कितने मामले
Polio Cases 2026: दुनिया से पोलियो खत्म करने की कोशिशों के बावजूद अफगानिस्तान और पाकिस्तान में संक्रमण जारी है। 20 अक्तूबर 2026 तक दोनों देशों में पोलियो वायरस के 48 मामले सामने आए। अफगानिस्तान में मामलों की संख्या दोगुनी हुई, जबकि पाकिस्तान में कमी आई।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो के मामले
20 अक्तूबर 2026 तक उपलब्ध ग्लोबल पोलियो इरेडिकेशन इनिशिएटिव के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में दुनिया भर में वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 के कुल 48 मामले सामने आए हैं। इनमें से 42 मामले अफगानिस्तान और 6 मामले पाकिस्तान में दर्ज किए गए हैं। वाइल्ड पोलियो वायरस उस वायरस को कहते हैं, जो प्राकृतिक रूप से वातावरण में फैलता है और लोगों को संक्रमित कर सकता है।
- अफगानिस्तान में इस साल पोलियो के मामले तेजी से बढ़े हैं। यहां 2025 में 21 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 42 हो गई है। यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक मामले दोगुने हो चुके हैं।
- पाकिस्तान भी पोलियो का शिकार रहा है, हालांकि यहां मामलों में कमी आई है। 2025 में पाकिस्तान में 31 मामले सामने आए थे, जबकि इस साल अब तक केवल 6 मामले दर्ज किए गए हैं।
- दोनों देशों को मिलाकर देखें तो 2025 में पोलियो के कुल 52 मामले सामने आए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 99 थी। इससे पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में पोलियो पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली है, लेकिन सभी जगह एक जैसी प्रगति नहीं हो रही। खासकर अफगानिस्तान में संक्रमण का बढ़ना चिंता का विषय बना हुआ है।
- भारत में पश्चिम बंगाल में 13 जनवरी 2011 के बाद से पोलियो का एक भी केस नहीं रिपोर्ट हुआ है।
पोलियो को क्यों माना जाता है इतना खतरनाक?
पोलियो एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। यह वायरस आमतौर पर दूषित पानी या भोजन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। कुछ मामलों में यह तंत्रिका तंत्र तक पहुंचकर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- इसकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि गंभीर संक्रमण होने पर मरीज को स्थायी लकवा हो सकता है।
- कई बार शुरुआत में संक्रमित व्यक्ति में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे संक्रमण का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
- पोलियो का कोई पुख्ता इलाज नहीं है, इसलिए बचाव करते रहना ही सबसे जरूरी तरीका है।
- टीकाकरण के जरिए इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
- यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी बच्चों को निर्धारित समय पर पोलियो की सभी खुराक पिलाते रहने की सलाह देते हैं।
पोलियो से क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पोलियो संक्रमण के प्रभाव हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ को बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द या गर्दन में अकड़न की समस्या हो सकती है।
- गंभीर मामलों में वायरस तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे हाथ-पैरों की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं। इसे लकवाग्रस्त पोलियो कहा जाता है। यह लकवा अक्सर पैरों को प्रभावित करता है और स्थायी दिव्यांगता का कारण बन सकता है।
- यदि वायरस सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों को प्रभावित कर दे, तो मरीज को सांस लेने में गंभीर परेशानी हो सकती है और स्थिति जानलेवा बन सकती है। लकवाग्रस्त मरीजों में से 5% से 10% लोगों की मौत सांस लेने में दिक्कत (रेस्पिरेटरी कॉम्प्लिकेशन्स) के कारण हो जाती है।
वैक्सीनेशन ही बचाव का तरीका
पोलियो से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीनेशन है। भारत में बच्चों को पोलियो से सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम और पल्स पोलियो अभियान चलाए जाते हैं। इसके तहत 5 साल से कम उम्र के बच्चों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत मुफ्त ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक दी जाती है।
- पांच साल से कम उम्र के बच्चों को पल्स पोलियो अभियान के दौरान भी खुराक जरूर दिलानी चाहिए, भले ही उन्हें पहले टीका लग चुका हो।
- इसके अलावा, साफ पानी पीना, भोजन को ढककर रखना, शौचालय का इस्तेमाल करना और साबुन से हाथ धोना संक्रमण का खतरा कम करने में मदद करता है।
- यदि किसी बच्चे में अचानक हाथ-पैरों में कमजोरी या लकवे जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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नोट:
World Polio Day 2026: Americas mark 35 years free of wild poliovirus as vaccination gaps persist
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