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Jalandhar News: जल सप्लाई विभाग में 24.34 लाख रुपये का गबन
Sat, 24 Oct 2026 05:50 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
Updated Sat, 24 Oct 2026 05:50 PM IST
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अधिकारियों समेत नौ लोगाें पर मामला दर्ज
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदकोट। जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग में 24.34 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस संबंध में नौ लोगों पर मामला दर्ज किया है। इनमें छह अधिकारी-कर्मचारी और तीन ठेकेदार शामिल हैं।
आरोप है कि जलापूर्ति योजना के रखरखाव के नाम पर बिना काम करवाए फर्जी बिलों से भुगतान लिया गया। नामजद आरोपियों में अधिशासी अभियंता जसविंदर सिंह, उपमंडल अधिकारी संदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता परविंदर सिंह, वरिष्ठ सहायक जस्मित सिंह व तारा सिंह, डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह शामिल हैं। ठेकेदार करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह को भी नामजद किया गया है। जांच के अनुसार, 23 अक्तूबर 2024 को योजना के रखरखाव के लिए 73.36 लाख रुपये जारी किए गए थे। 25 अक्तूबर को सात कार्यों के लिए दरें मांगी गई थीं। इनकी शुरुआती लागत 49,900 रुपये प्रति कार्य थी। आरोप है कि छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई। तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी ली गई। सुखपिंदर सिंह ने इन हस्ताक्षरों से इन्कार किया था। जांच में 28 अक्तूबर को बिल बनाने और 29 अक्तूबर को ठेकेदारों के खातों में भुगतान करने की बात सामने आई। बिना मौके का निरीक्षण किए माप पुस्तिका में प्रविष्टियां करने का आरोप भी है। पुलिस उपाधीक्षक सतर्कता विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदकोट। जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग में 24.34 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस संबंध में नौ लोगों पर मामला दर्ज किया है। इनमें छह अधिकारी-कर्मचारी और तीन ठेकेदार शामिल हैं।
आरोप है कि जलापूर्ति योजना के रखरखाव के नाम पर बिना काम करवाए फर्जी बिलों से भुगतान लिया गया। नामजद आरोपियों में अधिशासी अभियंता जसविंदर सिंह, उपमंडल अधिकारी संदीप सिंह, कनिष्ठ अभियंता परविंदर सिंह, वरिष्ठ सहायक जस्मित सिंह व तारा सिंह, डेटा एंट्री ऑपरेटर सतनाम सिंह शामिल हैं। ठेकेदार करनैल सिंह, हरदीप सिंह और जसवीर सिंह को भी नामजद किया गया है। जांच के अनुसार, 23 अक्तूबर 2024 को योजना के रखरखाव के लिए 73.36 लाख रुपये जारी किए गए थे। 25 अक्तूबर को सात कार्यों के लिए दरें मांगी गई थीं। इनकी शुरुआती लागत 49,900 रुपये प्रति कार्य थी। आरोप है कि छह कार्यों की लागत बढ़ाकर करीब पांच लाख रुपये प्रति कार्य कर दी गई। तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुखपिंदर सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षरों से मंजूरी ली गई। सुखपिंदर सिंह ने इन हस्ताक्षरों से इन्कार किया था। जांच में 28 अक्तूबर को बिल बनाने और 29 अक्तूबर को ठेकेदारों के खातों में भुगतान करने की बात सामने आई। बिना मौके का निरीक्षण किए माप पुस्तिका में प्रविष्टियां करने का आरोप भी है। पुलिस उपाधीक्षक सतर्कता विनोद कुमार के अनुसार, मामले की जांच जारी है।
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