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मेडिकल ऑफिसरों को बड़ी राहत: पीजी के बाद दो साल प्रदेश में देनी होगी सेवा, 40 लाख का भरना होगा बॉन्ड

Fri, 06 Nov 2026 08:30 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 06 Nov 2026 08:30 PM IST
सार

 सरकार ने डॉक्टरों की पीजी और सुपर स्पेशियलिटी (पीजी/एसएस) पॉलिसी में संशोधन कर जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को बड़ी राहत दी है। 

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Major relief for medical officers: They will be required to serve in the state for two years after completing
मेडिकल ऑफिसर(सांकेतिक)। - फोटो : Freepik

विस्तार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने डॉक्टरों की पीजी और सुपर स्पेशियलिटी (पीजी/एसएस) पॉलिसी में संशोधन कर जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को बड़ी राहत दी है। अब नियमित जीडीओ के तौर पर नियुक्त होने के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने वाले अनुबंध आधार पर नियुक्त डॉक्टरों और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को पीजी कोर्स करने के लिए पॉलिसी का लाभ मिल सकेगा। संशोधन के तहत इन्हें पीजी (एमडी/एमएस) और पीजी (एमडीएस) कोर्स में 33.33 फीसदी कोटे का लाभ लेने की अनुमति दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में यह बदलाव किया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार अनुबंध आधार पर नियुक्त वे डॉक्टर, जिनकी नियुक्ति कार्मिक विभाग की समय-समय पर जारी शर्तों के तहत हुई है और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर पीजी पॉलिसी के तहत प्रदेश के सरकारी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे। हालांकि, पीजी कोर्स की अवधि के दौरान जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को केवल वही स्टाइपेंड मिलेगा, जो सीधे भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों को देय है।

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पीजी में चयनित होने वाले जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसरों को प्रदेश सरकार के साथ दो साल का बॉन्ड भरना होगा। इसमें पीजी पूरी करने के बाद एक साल की अनिवार्य फील्ड पोस्टिंग भी शामिल होगी। बॉन्ड की राशि 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यानी पीजी पूरी करने के बाद संबंधित डॉक्टर को प्रदेश में निर्धारित अवधि तक सेवाएं देनी होंगी। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पीजी पूरी करने के बाद डॉक्टर को जॉब ट्रेनी के रूप में बची हुई सेवा अवधि भी पूरी करनी होगी। जॉब ट्रेनी की अवधि पूरी होने के बाद ही पीजी कोर्स के लिए निर्धारित बॉन्ड की अवधि शुरू होगी। इससे पीजी करने वाले जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को पहले अपनी शेष जॉब ट्रेनी सेवा पूरी करनी होगी। संशोधित नीति में स्पष्ट किया गया है कि अनुबंध आधार पर नियुक्त जीडीओ और जॉब ट्रेनी डॉक्टरों को सरकार की ओर से समय-समय पर अधिसूचित नीति के अनुसार नियमित किया जा सकेगा। इसके अलावा राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से या भर्ती के अन्य निर्धारित तरीकों से भी नियुक्तियां की जा सकेंगी।

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