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Ayodhya News: बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों की बन रही डिजिटल कुंडली
Tue, 03 Nov 2026 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 03 Nov 2026 12:34 AM IST
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अयोध्या। यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारियों के बीच शिक्षकों की ड्यूटी लगाने की प्रक्रिया में बदलाव शुरू हो गया है। परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद शिक्षकों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करा रहा है। इसके तहत जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। इसके लिए 15 नवंबर तक की समयसीमा तय की गई है।
जिले के 446 माध्यमिक विद्यालयों में करीब दो हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनके रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी के साथ शैक्षिक योग्यता और विषय विशेषज्ञता का विवरण भी दर्ज किया जा रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों की तैनाती और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए परीक्षकों के चयन में किया जाएगा। साथ ही एक ही शिक्षक का नाम अलग-अलग विद्यालयों से दर्ज होने जैसी गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगेगा।
विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति के अनुसार रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। सेवानिवृत्त हो चुके या विद्यालय छोड़ चुके शिक्षकों का विवरण हटाने के साथ नए नियुक्त शिक्षकों की जानकारी शामिल की जा रही है। डिबार घोषित शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का ब्योरा भी अलग से दर्ज हो रहा है। डीआईओएस डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि इस प्रक्रिया में विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की जवाबदेही तय की गई है। पहले राजकीय फिर एडेड और अंत में वित्तविहीन को प्राथमिकता दी जाएगी।
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शिक्षकों से मांगा जा रहा ये ब्योरा
इनमें पूरा नाम और पदनाम, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर, नियुक्ति की तारीख, वर्तमान विद्यालय का नाम और कोड, स्नातक और परास्नातक की शैक्षिक योग्यता, शैक्षिक प्रमाणपत्रों का विवरण, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पढ़ाए जाने वाले विषय, विषय का निर्धारित कोड, वर्तमान सेवा स्थिति, पूर्व में कार्यरत विद्यालय का विवरण, डिबार घोषित होने की स्थिति प्रधानाचार्य और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का पद संबंधी विवरण मांगे जा रहे है।
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जिले के 446 माध्यमिक विद्यालयों में करीब दो हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इनके रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी के साथ शैक्षिक योग्यता और विषय विशेषज्ञता का विवरण भी दर्ज किया जा रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षकों की तैनाती और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए परीक्षकों के चयन में किया जाएगा। साथ ही एक ही शिक्षक का नाम अलग-अलग विद्यालयों से दर्ज होने जैसी गड़बड़ियों पर भी अंकुश लगेगा।
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विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति के अनुसार रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। सेवानिवृत्त हो चुके या विद्यालय छोड़ चुके शिक्षकों का विवरण हटाने के साथ नए नियुक्त शिक्षकों की जानकारी शामिल की जा रही है। डिबार घोषित शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का ब्योरा भी अलग से दर्ज हो रहा है। डीआईओएस डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि इस प्रक्रिया में विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की जवाबदेही तय की गई है। पहले राजकीय फिर एडेड और अंत में वित्तविहीन को प्राथमिकता दी जाएगी।
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शिक्षकों से मांगा जा रहा ये ब्योरा
इनमें पूरा नाम और पदनाम, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर, नियुक्ति की तारीख, वर्तमान विद्यालय का नाम और कोड, स्नातक और परास्नातक की शैक्षिक योग्यता, शैक्षिक प्रमाणपत्रों का विवरण, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पढ़ाए जाने वाले विषय, विषय का निर्धारित कोड, वर्तमान सेवा स्थिति, पूर्व में कार्यरत विद्यालय का विवरण, डिबार घोषित होने की स्थिति प्रधानाचार्य और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का पद संबंधी विवरण मांगे जा रहे है।