{"_id":"6ae7a0bcf11a0ab78803e898","slug":"mahant-sits-in-a-pit-preparing-for-bhu-samadhi-voluntary-burial-to-save-temple-land-badaun-news-c-123-1-ba11032-176766-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budaun News: मंदिर की जमीन बचाने के लिए भूसमाधि लेने गड्ढे में बैठे महंत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Budaun News: मंदिर की जमीन बचाने के लिए भूसमाधि लेने गड्ढे में बैठे महंत
विज्ञापन
बदायूं के लभारी में महंत प्रयागदास को समाधि लेने से रोकते पुलिस कर्मी। संवाद
कादरचौक (बदायूं)। लभारी गांव में रामजानकी मंदिर की जमीन पर पट्टे की पैमाइश और तारकशी से नाराज महंत प्रयागदास रविवार को पांच फुट गहरे गड्ढे में भूसमाधि लेने बैठ गए। सुबह नौ बजे से शुरू हुए हंगामे के बाद निवर्तमान विधायक धर्मेंद्र शाक्य और ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र राजपूत ने उन्हें समझाकर बाहर निकाला। तय हुआ कि पट्टाधारकों को कहीं और जमीन दी जाएगी। यह भूमि मंदिर और सार्वजनिक उपयोग में रहेगी। इसके बाद तारकशी हटा दी गई।
मामला 2001 की चकबंदी से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले गाटा संख्या 353 की यह जमीन मंदिर के सार्वजनिक उपयोग में थी, यहां मेला लगता रहा है। चकबंदी के बाद यह गाटा 1717 ‘क’ और ‘ख’ बन गई। 2007 में ओमकार व अमर सिंह के नाम पट्टा हो गया। शनिवार को राजस्व विभााग टीम ने पैमाइश कर तारकशी करा दी, जिससे गांव में आक्रोश फैल गया।
शनिवार रात में मंदिर के महंत प्रयागदास का नायब तहसीलदार पर आरोप लगाते हुए, भूसमाधि लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। रविवार सुबह महंत ने खुद गड्ढा खोदना शुरू किया और दोपहर 12 बजे उसमें बैठ गए। सूचना पर पहुंचे पूर्व विधायक शेखूपुर धर्मेंद्र शाक्य ने पट्टाधारकों और महंत के बीच में वार्ता कराई।
विज्ञापन
पंचायत की खुली बैठक में प्रस्ताव लिखा गया कि पट्टाधारकों को ग्राम समाज की दूसरी जगह भूमि दी जाएगी। विवादित जमीन मंदिर के सार्वजनिक उपयोग में रहेगी। इसके बाद तारकशी हटाई गई और महंत को बाहर निकाला गया।
महंत प्रयागदास ने कहा कि यह लड़ाई मेरी नहीं, गांव के हित की है। ग्राम प्रशासक ज्ञान सिंह ने बताया कि पट्टा धारकों और महंत के बीच समझौता हो गया है। पट्टाधारकों ने विवादित जगह से अपना सामान हटा लिया है। यह जगह मंदिर के उपयोग में रहेगी। पट्टाधारकों को कहीं और इतनी ही भूमि दिला दी जाएगी।
खुद गड्ढा खोदने लगे थे महंत
रविवार सुबह भूसमाधि लेने के लिए महंत ने खुद पांच फुट गहरा गड्ढा खोदा। ग्रामीणों ने महंत को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया। लोग उन्हें समझाते रहे, लेकिन महंत अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने नायब तहसीलदार पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। कहा कि अगर दोपहर 12 बजे तक वह आकर माफी नहीं मांगेंगे तो वह भूसमाधि ले लेंगे। दोपहर करीब 12 बजे वह गड्ढे में जाकर बैठ गए। महंत के गड्ढे में बैठने के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस भी वहां से हट गई। लोग लगातार महंत से बाहर निकलने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं माने। पूर्व विधायक के पहुंचने और समझौता कराने के बाद वह गड्ढे से बाहर निकले।
-- -
राजस्व विभाग की टीम थाने में बैठकर लेती रही जानकारी
रविवार सुबह करीब नौ बजे से गांव में विवाद की स्थिति शुरू हुई। महंत के गड्ढे में बैठने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। गांव में आक्रोश को देखते हुए राजस्व विभाग की टीम के अधिकारी-कर्मचारी घटनास्थल तक नहीं पहुंचे। थाने में ही बैठकर मामले की जानकारी लेते रहे। जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और दोनों पक्षों की बातचीत के बाद अपराह्न करीब दो बजे समझौता हो सका।
जहां पर विवाद की स्थिति थी वहां पर राजस्व और पुलिस टीम ने निस्तारण करा दिया है। अब गांव में स्थिति सामान्य है। दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया है। मामले में जो भी विधिक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। - साईं आश्रित शाखमुरी, एसडीएम, सदर
विज्ञापन
मामला 2001 की चकबंदी से जुड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले गाटा संख्या 353 की यह जमीन मंदिर के सार्वजनिक उपयोग में थी, यहां मेला लगता रहा है। चकबंदी के बाद यह गाटा 1717 ‘क’ और ‘ख’ बन गई। 2007 में ओमकार व अमर सिंह के नाम पट्टा हो गया। शनिवार को राजस्व विभााग टीम ने पैमाइश कर तारकशी करा दी, जिससे गांव में आक्रोश फैल गया।
विज्ञापन
शनिवार रात में मंदिर के महंत प्रयागदास का नायब तहसीलदार पर आरोप लगाते हुए, भूसमाधि लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। रविवार सुबह महंत ने खुद गड्ढा खोदना शुरू किया और दोपहर 12 बजे उसमें बैठ गए। सूचना पर पहुंचे पूर्व विधायक शेखूपुर धर्मेंद्र शाक्य ने पट्टाधारकों और महंत के बीच में वार्ता कराई।
विज्ञापन
पंचायत की खुली बैठक में प्रस्ताव लिखा गया कि पट्टाधारकों को ग्राम समाज की दूसरी जगह भूमि दी जाएगी। विवादित जमीन मंदिर के सार्वजनिक उपयोग में रहेगी। इसके बाद तारकशी हटाई गई और महंत को बाहर निकाला गया।
महंत प्रयागदास ने कहा कि यह लड़ाई मेरी नहीं, गांव के हित की है। ग्राम प्रशासक ज्ञान सिंह ने बताया कि पट्टा धारकों और महंत के बीच समझौता हो गया है। पट्टाधारकों ने विवादित जगह से अपना सामान हटा लिया है। यह जगह मंदिर के उपयोग में रहेगी। पट्टाधारकों को कहीं और इतनी ही भूमि दिला दी जाएगी।
खुद गड्ढा खोदने लगे थे महंत
रविवार सुबह भूसमाधि लेने के लिए महंत ने खुद पांच फुट गहरा गड्ढा खोदा। ग्रामीणों ने महंत को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया। लोग उन्हें समझाते रहे, लेकिन महंत अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने नायब तहसीलदार पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। कहा कि अगर दोपहर 12 बजे तक वह आकर माफी नहीं मांगेंगे तो वह भूसमाधि ले लेंगे। दोपहर करीब 12 बजे वह गड्ढे में जाकर बैठ गए। महंत के गड्ढे में बैठने के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस भी वहां से हट गई। लोग लगातार महंत से बाहर निकलने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं माने। पूर्व विधायक के पहुंचने और समझौता कराने के बाद वह गड्ढे से बाहर निकले।
राजस्व विभाग की टीम थाने में बैठकर लेती रही जानकारी
रविवार सुबह करीब नौ बजे से गांव में विवाद की स्थिति शुरू हुई। महंत के गड्ढे में बैठने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। गांव में आक्रोश को देखते हुए राजस्व विभाग की टीम के अधिकारी-कर्मचारी घटनास्थल तक नहीं पहुंचे। थाने में ही बैठकर मामले की जानकारी लेते रहे। जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप और दोनों पक्षों की बातचीत के बाद अपराह्न करीब दो बजे समझौता हो सका।
जहां पर विवाद की स्थिति थी वहां पर राजस्व और पुलिस टीम ने निस्तारण करा दिया है। अब गांव में स्थिति सामान्य है। दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया है। मामले में जो भी विधिक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। - साईं आश्रित शाखमुरी, एसडीएम, सदर

बदायूं के लभारी में महंत प्रयागदास को समाधि लेने से रोकते पुलिस कर्मी। संवाद

बदायूं के लभारी में महंत प्रयागदास को समाधि लेने से रोकते पुलिस कर्मी। संवाद