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Siddharthnagar News: सरदार पटेल ने 565 रियासतों का एकीकरण कर मजबूत भारत की रखी नींव
Sat, 31 Oct 2026 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 31 Oct 2026 11:29 PM IST
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में जयंती पर व्याख्यान एवं परिचर्चा आयोजित, युवाओं से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येंद्र दुबे ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश की 565 रियासतों का एकीकरण कर राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल की भूमिका अतुलनीय रही। उनके विचार और कार्य आज भी देशवासियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने कहा कि सरदार पटेल ने खेड़ा, बारडोली, असहयोग और भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न परिस्थितियों और विचारधाराओं वाली रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर उन्होंने एक भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. विशाल गुप्ता ने कहा कि भारत की भौगोलिक एकता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल का योगदान महत्वपूर्ण रहा। सरदार सरोवर बांध और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी परियोजनाएं उनके व्यक्तित्व और योगदान की याद दिलाती हैं।
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डॉ. हृदयकांत पांडे ने कहा कि गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने देश को मजबूत राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई। डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने कहा कि हैदराबाद और जूनागढ़ सहित विभिन्न रियासतों के एकीकरण से उन्होंने भारत को सशक्त राष्ट्रीय राज्य के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया। विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता जरूरी है। युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डॉ. बाल गंगाधर ने कहा कि सरदार पटेल के राजनीतिक और आर्थिक विचार भारतीय परिवेश एवं संस्कृति के अनुरूप थे। उनका जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।
राष्ट्रीय सेवा योजना की अटल बिहारी वाजपेयी इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल के योगदान को याद किया। साथ ही युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. यशवंत यादव ने किया। डॉ. रविकांत शुक्ला ने आभार जताया। इस दौरान डॉ. जय सिंह यादव, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. मुन्नू खान, डॉ. अमित साहनी सहित शिक्षक, स्वयंसेवक और विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहे।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में शनिवार को लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सत्येंद्र दुबे ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश की 565 रियासतों का एकीकरण कर राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल की भूमिका अतुलनीय रही। उनके विचार और कार्य आज भी देशवासियों को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने कहा कि सरदार पटेल ने खेड़ा, बारडोली, असहयोग और भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न परिस्थितियों और विचारधाराओं वाली रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर उन्होंने एक भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान दिया।
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विशिष्ट वक्ता डॉ. विशाल गुप्ता ने कहा कि भारत की भौगोलिक एकता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल का योगदान महत्वपूर्ण रहा। सरदार सरोवर बांध और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी परियोजनाएं उनके व्यक्तित्व और योगदान की याद दिलाती हैं।
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डॉ. हृदयकांत पांडे ने कहा कि गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने देश को मजबूत राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाई। डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने कहा कि हैदराबाद और जूनागढ़ सहित विभिन्न रियासतों के एकीकरण से उन्होंने भारत को सशक्त राष्ट्रीय राज्य के रूप में स्थापित करने में योगदान दिया। विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता जरूरी है। युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
डॉ. बाल गंगाधर ने कहा कि सरदार पटेल के राजनीतिक और आर्थिक विचार भारतीय परिवेश एवं संस्कृति के अनुरूप थे। उनका जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है।
राष्ट्रीय सेवा योजना की अटल बिहारी वाजपेयी इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाने में सरदार पटेल के योगदान को याद किया। साथ ही युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. यशवंत यादव ने किया। डॉ. रविकांत शुक्ला ने आभार जताया। इस दौरान डॉ. जय सिंह यादव, डॉ. मयंक कुशवाहा, डॉ. मुन्नू खान, डॉ. अमित साहनी सहित शिक्षक, स्वयंसेवक और विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक मौजूद रहे।