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कानपुर: दीदी मां मंदाकिनी ने कहा- जेन जी को रामकथा से जोड़ें, सुसंस्कार दें
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 29 Sep 2026 11:29 PM IST
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श्रीरामलीला सोसाइटी के बैनर तले आयोजित राम कथा के पहले दिन दीदी मां मंदाकिनी ने कहा कि नई पीढ़ी को आयु वर्ग से जेन जी और जेन अल्फा में बांटा दिया गया। उनके मन में जिज्ञासाएं हैं। उनका उत्तर रामकथा में मिलेगा। रामकथा की वैज्ञानिकता उनके मन को शांत करेगी। बच्चों को धन, वैभव के साथ सुसंस्कार दें। अधिक अर्थ लोभ राक्षसत्व की ओर ले जाता है। अर्थ लोभ में पुत्र पिता की हत्या कर देता है। जेन जी और अल्फा को राम कथा सुनने के लिए लाएं। रामकथा का आयोजन मर्चेंट चैंबर हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाआरती से की गई। इसके बाद दीदी मां मंदाकिनी ने कथा श्रवण की कामना की। श्रोताओं ने आंख बंद करके ओमकार का जाप किया। पूरा हॉल ओम की ध्वनि से प्रतिध्वनित हो उठा। इसके बाद रामकथा शुरू हुई। श्रीरामलीला सोसाइटी का स्वर्ण जयंती वर्ष होने की वजह से रामचरित मानस के दृष्टांतों के जरिये स्वर्ण की व्याख्या की गई। हनुमान जी की कथा के माध्यम से भूख का विश्लेषण किया गया। उन्होंने कहा कि देश की 60-65 प्रतिशत आबादी युवा है। उनका मार्गदर्शन आवश्यक है। देश से लेकर हार्वर्ड तक जेन जी के मन में एक जैसी जिज्ञासाएं हैं। यह बुद्धिजीवियों का युग है। उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से समझाएं। शास्त्र और रामचरित मानस की चौपाइयां मानव जीवन के रहस्यों को उद्घाटित करती हैं। उन्होंने बताया कि हनुमान अंश देखने के बाद एक जेन जी के मन में प्रश्न आया कि क्या नीम करौरी महाराज हनुमान अंश हैं? मां जवाब नहीं दे पाई तो उनके पास ले आई। बच्चे को बताया कि सभी में हनुमान और ईश्वर अंश है। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस जीवन का सत्य है। इससे मिले संस्कार विभिन्न प्रकार की भूख को शांत करते हैं। कानपुर के जघन्य कांड का जिक्र किया और कहा कि भूख से जो महत्वाकांक्षा के वन में भटकता है वह रावण बन जाता है। नई पीढ़ी जो गलत कृत्य करती है तो उसके लिए सभी दोषी हैं। बच्चों को रामचरित मानस नहीं पढ़ाएंगे तो लोग अपने घर में ही असुरक्षित रहेंगे, उन्हें चाहे जितने शिक्षण संस्थानों में पढ़ा लें। पुत्र पिता की हत्या करे यही रावणत्व है। राजा प्रताप भानु का जिक्र कर कहा कि उन्हें भी महत्वकांक्षा की भूख थी। ऐसे लोगों को कपटमुनि मिल जाता है। तुलसीदास ने मानस को दर्पण बताया है। इसमें व्यक्ति को जीवन के रहस्य मिलते हैं। श्रोताओं से कहा कि बच्चों को रामकथा में लाना उनका दायित्व है। रामकथा कार्यक्रम में राजीव गर्ग, कमल किशोर अग्रवाल, आलोक अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, एमएलसी सलिल विश्नोई आदि मौजूद रहे।
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