तू है जहाँ, वहाँ आ पाना
तन के वश की बात नहीं है,
इस तन से नाता टूटे तो
तुझसे मिलना हो सकता है!
आँखों में तैरती उदासी, लहराती आँसू की छाया,
ऐसा लगे, कि मेरी काया में तेरी उतरी है तेरी काया;
दर्पण ने इस...और पढ़ें
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।
चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
मैं जागता हूँ देर तक
कई बार सुबह तक
कमरे में करता हूं चहलक़दमी
फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि
जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है
कोई सुनता है और उसकी लय पर सोता है
मेरी जाग से किसी को मिलती है सुकून की नींद...और पढ़ें
तुम अपना धीरज मत खोना
यदि मैं शहीद हो जाऊँ तो
तुम भूले से भी मत रोना।
हैं वही पत्नियाँ वीरों की
जो डर कर कभी नहीं जीतीं
पति के विछोह से आहत हो
घुट घुट कर अश्रु नहीं पीतीं
सबकी किस्मत मे...और पढ़ें
देखा था जो तुझको
छिप कर कभी-कभी,
वो पल सता रहे हैं
मुझको अभी-अभी।
वो झील के किनारे
वो मस्त-मस्त नजारे
वो चांदनी रातें
हाथों में हाथ थामे
वो मीठी-मीठी बातें
वो यादों के लश्क...और पढ़ें
याद एक चिड़िया है
कभी उड़कर पास चली आती है
कभी दूर जाकर
ओझल हो जाती है
बुलबुलों की तुतलाहट
मैनाओं का शोर
कौडिल्ले की चीख़
और फुलचुही की
रसपान करने की छटपटाहट
याद के पंख कभ...और पढ़ें
दीवारों से लटके
फ़िल्मी अभिनेता हैं
आँखें मिचकाती ट्रैफ़िक की लाइट है
ख़ुशबू की ‘सर सर’ में इठलाती चालें हैं
बहसीली मेज़ों पर धुएँ के छल्ले है
‘बस’ की मुड़ी टिकट खुँसी बेहद सुस्त घड़ी है
परकटी चीलों-से मँडरात...और पढ़ें
मैं
रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ
लेकिन मुझे फेंको मत!
क्या जाने कब
इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय!
अपने पक्ष को असत्य जानते ह...और पढ़ें
कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं
कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ हैं
कितने वृक्ष हैं
कितने फल हैं तुम्हारी गोद में
कितने पत्ते हैं
कितने घोंसले हैं तुम्हारी आत्मा...और पढ़ें
भोर के जामुनी एकांत में
जब रात का थका-हारा उनींदा शुक्रतारा
टूट कर गिरने को होगा अपनी नींद की भंवर में
और सुबह की पहली ट्रेन की सीटी के बीच
शहर की नींद आखिरी अँगड़ाइयाँ ले रही होगी
मैं छोड़ रहा होऊँगा
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