विज्ञापन

कविता

736 Followers 3394 Poems

Hindi Geet: बेसुध कर जाती हैं सुधियाँ, चेतन कर जाती मदहोशी

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    तू है जहाँ, वहाँ आ पाना
तन के वश की बात नहीं है,
इस तन से नाता टूटे तो
तुझसे मिलना हो सकता है!

आँखों में तैरती उदासी, लहराती आँसू की छाया,
ऐसा लगे, कि मेरी काया में तेरी उतरी है तेरी काया;
दर्पण ने इस...और पढ़ें
1 hour ago

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’की कविता- मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।

चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
2 days ago
विज्ञापन

गीत चतुर्वेदी: मैं जागता हूँ देर तक कई बार सुबह तक

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं जागता हूँ देर तक
कई बार सुबह तक
कमरे में करता हूं चहलक़दमी
फ़र्श पर होती है धप्-धप् की ध्वनि
जो नीचे के फ्लैट में गूँजती है
कोई सुनता है और उसकी लय पर सोता है
मेरी जाग से किसी को मिलती है सुकून की नींद...और पढ़ें
4 days ago

सैनिक का अपनी पत्नी को करवा चौथ पर संदेश देती उर्मिलेश की कविता

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    तुम अपना धीरज मत खोना
यदि मैं शहीद हो जाऊँ तो
तुम भूले से भी मत रोना।

हैं वही पत्नियाँ वीरों की
जो डर कर कभी नहीं जीतीं
पति के विछोह से आहत हो
घुट घुट कर अश्रु नहीं पीतीं

सबकी किस्मत मे...और पढ़ें
5 days ago
विज्ञापन

Rakesh Dhar Dwivedi Poetry: देखा था जो तुझको छिप कर

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    देखा था जो तुझको 
छिप कर कभी-कभी,
वो पल सता रहे हैं 
मुझको अभी-अभी।

वो झील के किनारे 
वो मस्त-मस्त नजारे 
वो चांदनी रातें 
हाथों में हाथ थामे 
वो मीठी-मीठी बातें 
वो यादों के लश्क...और पढ़ें
6 days ago

ऋतुराज की कविता- याद एक चिड़िया है

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    याद एक चिड़िया है
कभी उड़कर पास चली आती है
कभी दूर जाकर
ओझल हो जाती है

बुलबुलों की तुतलाहट
मैनाओं का शोर
कौडिल्ले की चीख़
और फुलचुही की
रसपान करने की छटपटाहट

याद के पंख कभ...और पढ़ें
6 days ago

राजेंद्र यादव की कविता- घायल प्रतीक्षा है

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    दीवारों से लटके
फ़िल्मी अभिनेता हैं
आँखें मिचकाती ट्रैफ़िक की लाइट है
ख़ुशबू की ‘सर सर’ में इठलाती चालें हैं
बहसीली मेज़ों पर धुएँ के छल्ले है
‘बस’ की मुड़ी टिकट खुँसी बेहद सुस्त घड़ी है
परकटी चीलों-से मँडरात...और पढ़ें
6 days ago

धर्मवीर भारती: मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं 
रथ का टूटा हुआ पहिया हूँ
लेकिन मुझे फेंको मत!

क्या जाने कब
इस दुरूह चक्रव्यूह में
अक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआ
कोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय!

अपने पक्ष को असत्य जानते ह...और पढ़ें
6 days ago

अक्षय उपाध्याय की कविता- कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    कितनी नदियाँ हैं
कितने झरने हैं

कितने पहाड़ हैं तुम्हारी देह में
कितनी गुफ़ाएँ हैं

कितने वृक्ष हैं
कितने फल हैं तुम्हारी गोद में

कितने पत्ते हैं
कितने घोंसले हैं तुम्हारी आत्मा...और पढ़ें
1 week ago

अपूर्व शुक्ल की कविता- भोर के जामुनी एकांत में

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    भोर के जामुनी एकांत में
जब रात का थका-हारा उनींदा शुक्रतारा
टूट कर गिरने को होगा अपनी नींद की भंवर में
और सुबह की पहली ट्रेन की सीटी के बीच
शहर की नींद आखिरी अँगड़ाइयाँ ले रही होगी

मैं छोड़ रहा होऊँगा
...और पढ़ें
1 week ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1636 कविताएं

View Profile