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Banda News: चेक बाउंस मामले में शिक्षक को एक साल की कैद
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बांदा। चेक बाउंस के मामले में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट-द्वितीय सत्यवीर सिंह की अदालत ने धीरेंद्र कुमार को दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
इसके अलावा दो लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। सजा भुगतने के लिए उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया। मामले के अनुसार तिंदवारा निवासी प्रभाकर मिश्रा ने न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि उन्होंने 24 जुलाई 2022 को परिचित और सरस्वती विद्या मंदिर, शास्त्री नगर, अतर्रा चुंगी के शिक्षक धीरेंद्र कुमार को निजी आवश्यकता के लिए एक लाख रुपये उधार दिए थे।
दो वर्ष बाद रुपये लौटाने के लिए अभियुक्त ने 15 नवंबर 2024 को आर्यावर्त बैंक की बड़ोखर खुर्द शाखा का एक लाख रुपये का चेक दिया। परिवादी ने चेक आईडीबीआई बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो 12 फरवरी 2025 को खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया।
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परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन न तो रुपये लौटाए गए और न ही नोटिस का जवाब दिया गया। इसके बाद न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार किए, लेकिन इसे सिक्योरिटी के तौर पर देने और उसमें रकम नहीं भरने की दलील दी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अभियुक्त ऋण की देनदारी से संबंधित कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
अर्थदंड में न्यायालय में पहले जमा कराई गई राशि समायोजित की जाएगी। अभियुक्त को एक माह के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है।
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इसके अलावा दो लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। सजा भुगतने के लिए उन्हें जिला कारागार भेज दिया गया। मामले के अनुसार तिंदवारा निवासी प्रभाकर मिश्रा ने न्यायालय में परिवाद दायर कर बताया कि उन्होंने 24 जुलाई 2022 को परिचित और सरस्वती विद्या मंदिर, शास्त्री नगर, अतर्रा चुंगी के शिक्षक धीरेंद्र कुमार को निजी आवश्यकता के लिए एक लाख रुपये उधार दिए थे।
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दो वर्ष बाद रुपये लौटाने के लिए अभियुक्त ने 15 नवंबर 2024 को आर्यावर्त बैंक की बड़ोखर खुर्द शाखा का एक लाख रुपये का चेक दिया। परिवादी ने चेक आईडीबीआई बैंक में भुगतान के लिए लगाया तो 12 फरवरी 2025 को खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया।
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परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन न तो रुपये लौटाए गए और न ही नोटिस का जवाब दिया गया। इसके बाद न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियुक्त ने चेक पर अपने हस्ताक्षर स्वीकार किए, लेकिन इसे सिक्योरिटी के तौर पर देने और उसमें रकम नहीं भरने की दलील दी। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अभियुक्त ऋण की देनदारी से संबंधित कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं कर सका। न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
अर्थदंड में न्यायालय में पहले जमा कराई गई राशि समायोजित की जाएगी। अभियुक्त को एक माह के भीतर जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया गया है।