इस्राइल में किसकी सरकार?: लिबरमैन ने किसे प्रधानमंत्री बनाने का दिया समर्थन, नेतन्याहू से गठबंधन पर क्या कहा?
इस्राइल में सरकार गठन की कोशिशों के बीच एविग्दोर लिबरमैन ने गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री और यायर लैपिड को नेसेट का स्पीकर बनाने का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने और अरब दलों पर निर्भर रहने से इनकार किया है। विपक्ष के पास 67 सीटें हैं, लेकिन बहुमत का रास्ता आसान नहीं है। क्या लिकुड के सांसदों के पाला बदलने से सरकार बन पाएगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
इस्राइल में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच यिस्राएल बेतेनु पार्टी के नेता एविग्दोर लिबरमैन ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने याशर पार्टी के नेता गादी आइजनकोट को अगला प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया है। साथ ही विपक्ष के नेता यायर लैपिड को संसद यानी नेसेट का स्पीकर बनाने की बात कही है। हालांकि, लिबरमैन ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली किसी भी सरकार में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतन्याहू के साथ किसी तरह की सत्ता साझेदारी या बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने का समझौता भी उन्हें मंजूर नहीं है। ऐसे में विपक्ष के सामने सरकार बनाने की चुनौती बनी हुई है।
लिबरमैन ने प्रेस वार्ता में अपनी पार्टी का रुख बताते हुए कौन सी बाते कहीं?
- गादी आइजनकोट को अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन देंगे।
- यायर लैपिड को नेसेट का स्पीकर बनाने का समर्थन करेंगे।
- नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में किसी भी हाल में शामिल नहीं होंगे।
- अरब दलों के समर्थन पर निर्भर अल्पमत सरकार का भी समर्थन नहीं करेंगे।
- लिकुड पार्टी के कुछ सांसदों के पाला बदलने से सरकार बनाने का रास्ता निकलने की उम्मीद है।
- उनकी प्राथमिकता जल्द सरकार बनाना और दोबारा चुनाव टालना है।
लिबरमैन ने आइजनकोट का समर्थन करते हुए उनकी आलोचना क्यों की?
लिबरमैन ने आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन तो किया, लेकिन उनके चुनाव प्रचार के तरीके पर सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आइजनकोट ने पूरे नेतन्याहू विरोधी गठबंधन को मजबूत करने के बजाय अपनी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया। लिबरमैन के मुताबिक, इससे उनके राजनीतिक सहयोगियों को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन को कुल 48 सीटें मिलीं, जो उनकी उम्मीद से काफी कम हैं। इस गठबंधन में यिस्राएल बेतेनु, याशर, बीयाखद और डेमोक्रेट्स शामिल हैं। लिबरमैन ने आइजनकोट के प्रचार अभियान को स्वार्थ पर आधारित बताया। उनका कहना था कि गठबंधन का लक्ष्य सबसे बड़ा दल बनने के बजाय सबसे बड़ा राजनीतिक गठबंधन बनाना होना चाहिए था।
नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने से लिबरमैन ने क्यों किया इनकार?
लिबरमैन ने साफ कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में नेतन्याहू के साथ सरकार में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने सत्ता में बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, नेतन्याहू पर उन्हें भरोसा नहीं है और उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। इस बीच, लिकुड पार्टी के कुछ महापौरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लिबरमैन से मुलाकात की। इसमें यरूशलम के मेयर मोशे लियोन भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि नेतन्याहू की सरकार में शामिल होने से इस्राइल की अर्थव्यवस्था और सामाजिक एकता को फायदा होगा। हालांकि, लिबरमैन ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनाना जरूरी है, लेकिन नेतन्याहू पर भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि गठबंधन के कुछ नेताओं ने उनसे अजीब प्रस्ताव रखे हैं, लेकिन उनकी नेतन्याहू से खुद मुलाकात नहीं हुई है।
अरब दलों और अति-रूढ़िवादी पार्टियों को लेकर क्या है लिबरमैन का रुख?
लिबरमैन ने अरब दलों के समर्थन पर निर्भर अल्पमत सरकार बनाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि ऐसी सरकार एक साल से भी कम समय तक टिक पाएगी। हालांकि, अति-रूढ़िवादी पार्टी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म के बाहरी समर्थन को लेकर उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इस पार्टी ने संकेत दिया है कि वह नेतन्याहू विरोधी गठबंधन का समर्थन कर सकती है। जब लिबरमैन से पूछा गया कि अरब या अति-रूढ़िवादी दलों के बिना सरकार कैसे बनेगी, तो उन्होंने लिकुड के सांसदों के पाला बदलने की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि इंतजार किया जाएगा और सबसे पहले नेसेट के स्पीकर को बदलना जरूरी है। लिबरमैन ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य खुद प्रधानमंत्री बनना नहीं, बल्कि जल्द सरकार बनाना है। उन्होंने दोबारा चुनाव को सबसे खराब विकल्प बताया और प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव कराने के प्रस्ताव को भी खारिज किया।
चुनाव नतीजों के बाद सरकार गठन में क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
इस्राइल की 120 सदस्यीय नेसेट में किसी भी मुख्य गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। विपक्षी खेमे को कुल 67 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू के सत्तारूढ़ गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। हालांकि, विपक्ष की 67 सीटों में 48 सीटें जायोनी दलों की हैं और 19 सीटें अरब गैर-जायोनी दलों की हैं। यही संख्या विपक्ष के लिए सरकार बनाने में चुनौती बन रही है, क्योंकि लिबरमैन अरब दलों पर निर्भर सरकार के खिलाफ हैं। इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के बीयाखद गुट ने भी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने के लिए राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के सामने उनका नाम रखने का समर्थन किया था। राष्ट्रपति हर्जोग ने राजनीतिक दलों से चुनाव नतीजों को स्वीकार करने और नए चुनाव से बचने के लिए रास्ता निकालने की अपील की है। वह चार नवंबर को आधिकारिक नतीजे प्राप्त करने के बाद दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत शुरू करेंगे। नई नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होना है।