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एमपी में MSME के लिए बनेगी अलग कंपनी, निजी इंडस्ट्रियल पार्क पर मिलेगा 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान

Sun, 01 Nov 2026 01:02 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तीन बड़े ऐलान किए हैं। अलग कंपनी के गठन, निजी निवेशकों को 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान और दो महीने में सभी जिलों में औद्योगिक जमीन उपलब्ध कराने की तैयारी है।
 
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 मध्यप्रदेश में छोटे और मझोले उद्योगों के लिए अब जमीन से लेकर औद्योगिक अधोसंरचना तक की व्यवस्था बदलने की तैयारी है। सरकार ने 2028 तक पांच हजार उद्योगों को औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए 30 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। खास बात यह है कि अब निजी निवेशक भी एमएसएमई औद्योगिक पार्क बना सकेंगे। सरकार ऐसे पार्क विकसित करने पर 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान देगी। दूसरी ओर, बड़े उद्योगों के लिए काम करने वाले एमपीआईडीसी की तर्ज पर छोटे उद्योगों के लिए अलग एमएसएमई औद्योगिक विकास कंपनी बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री निवास में आयोजित उद्यमी संवाद कार्यक्रम में ये घोषणाएं कीं। सरकार ने अगले दो महीने में प्रदेश के सभी जिलों में एमएसएमई इकाइयों के लिए औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी रखा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, करीब 22 जिलों में पहले से उपलब्ध औद्योगिक जमीन खत्म हो चुकी है। ऐसे में नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और जमीन की उपलब्धता को लेकर सरकार ने अलग व्यवस्था बनाने का फैसला किया है।
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जमीन आवंटन में निजी क्षेत्र की भी होगी भागीदारी
अब तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों के पास रही है। सरकार ने पहली बार एमएसएमई औद्योगिक पार्कों के विकास में निजी निवेशकों को भी भागीदार बनाने की घोषणा की है। निजी निवेशक पार्क विकसित करेंगे और इसके लिए उन्हें प्रति हेक्टेयर 50 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। इससे छोटे उद्योगों के लिए छोटे आकार के भूखंड, फ्लैटेड फैक्टरी और प्लग एंड प्ले सुविधाओं वाले औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का रास्ता खुलेगा।

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एमपीआईडीसी की तर्ज पर बनेगी एमएसएमई-आईडीसी 
सरकार की नई एमएसएमई औद्योगिक विकास कंपनी पूरी तरह छोटे और मझोले उद्योगों की जरूरतों पर काम करेगी। यह राज्य सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी होगी। इसके जिम्मे औद्योगिक जमीन का चिन्हांकन, अधिग्रहण, आवंटन और प्रबंधन रहेगा। कंपनी औद्योगिक पार्कों का विकास करने के साथ सड़क, बिजली, पानी और जल निकासी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगी। अभी मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं के लिए काम करता है। नई कंपनी के गठन से छोटे उद्यमियों के लिए अलग संस्थागत व्यवस्था तैयार होगी। सरकार का दावा है कि इससे जमीन और बुनियादी सुविधाओं के लिए उद्यमियों की निर्भरता और इंतजार कम होगा।

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एक साल में 1250 भूखंड आवंटित, इस साल लक्ष्य 3000 का
एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने कार्यक्रम में बताया कि पिछले एक साल में उद्यमियों को 1250 औद्योगिक भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में यह संख्या बढ़ाकर तीन हजार करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 2028 तक 30 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे और पांच हजार उद्योगों को भूखंड उपलब्ध कराने की योजना है। यानी आने वाले समय में औद्योगिक जमीन की उपलब्धता सरकार के एमएसएमई विस्तार अभियान का प्रमुख आधार होगी।
 
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900 से अधिक इकाइयों को 450 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से 900 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को 450 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि अंतरित की। इसके अलावा 120 से अधिक स्टार्टअप को भी प्रोत्साहन राशि दी गई। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति के प्रतीकात्मक चेक दिए गए। वहीं, 75 औद्योगिक भूखंडों के लिए आशय पत्र भी वितरित किए गए। इन भूखंडों से करीब 83 करोड़ रुपये का निवेश संभावित है और 640 रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।
 
22 जिलों में खत्म हो चुकी है औद्योगिक जमीन
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के करीब 22 जिलों में एमएसएमई इकाइयों के लिए उपलब्ध औद्योगिक भूमि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में नए उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों के सामने जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन रही है। सरकार ने अगले दो महीने में प्रदेश के सभी जिलों में एमएसएमई के लिए भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया है।

जिलों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिक ताकत केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि गांवों, कस्बों और शहरों में चलने वाली छोटी इकाइयां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। एमएसएमई क्षेत्र में कम पूंजी के साथ अधिक लोगों को रोजगार देने की क्षमता है। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपने ही जिले में उद्योग लगाने और रोजगार पाने के अवसर मिलें। नई कंपनी, निजी निवेशकों को अनुदान और जिलों में औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने की पहल से सरकार एमएसएमई क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करना चाहती है।



 
 
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