छतारी। कस्बा क्षेत्र के आजाद रोड पर जहां दुर्गा प्रसाद और उनकी पत्नी चंद्रकला ने जिस जमीन से रोजी-रोटी का का सहारा लिया। साथ ही अपने बच्चों का पालन पोषण किया। उस जमीन पर मेहनत की कमाई से बनाया गया घर चंद पल में ही बिखर गया।
बेटे राजेश (30) और पोते सचिन (17) की मौत की बाद वृद्ध चंद्रकला बस अपने बीते कल और बच्चों के साथ बिताए पलों को याद कर रो रहीं हैं। कस्बा क्षेत्र के शिवपुरी मोहल्ला निवासी आनंद ने बताया कि वे पांच भाई थे। तीन बहनें भी हैं। इसमें सबसे छोटे भाई राजेश और मां चंद्रकला आजाद रोड पर बने 50 गज के मकान में रहते थे। यहां से लकड़ी बेचने का काम करते थे।
आनंद ने बताया कि करीब 35 से 40 साल पहले उनके पिता दुर्गा प्रसाद ने लकड़हारे का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके बेटों ने इस काम को संभाला। इसी की बदौलत उन्होंने 50 गज जमीन पर धीरे-धीर झुग्गी से मकान बनाना शुरू किया था। शुक्रवार रात को मां चंद्रकला, भाई राजेश और उनका भतीजा सचिन घर में सो रहे थे। रात करीब एक बजे मकान ढह गया। इसके मलबे में दबने से भाई राजेश व भतीजे की मौत हो गई। मां चंद्रकला घायल हो गईं थीं। उनको उपचार के बाद घर लेकर आ गए हैं।
घर में दो युवकों की मौत से मातम पसरा है। परिवार के किसी भी शख्स के आंसू नहीं थम रहे हैं। पैतृक मकान में आनंद और रामेश्वर साथ रहते हैं, मंझला भाई ज्ञानचंद कांशीराम आवास योजना कॉलोनी और भाई महेश दूसरी कॉलोनी में रहता है। मां चंद्रकला तीनों घरों में रह सकती हैं, लेकिन आनंद का कहना है कि वह अपने साथ ही मां को रखेंगे। जब स्थिति सामान्य होगी तो टूटे मकान का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, चंद्रकला रात की उस घटना को याद कर बिलख उठती हैं।
अक्सर दादी की सेवा करने जाता था सचिन
सचिन के पिता ज्ञानचंद ने कहा कि घटना के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सचिन दादी से काफी प्रेम करता था। वह अक्सर उनके पास ही सोने चला जाता था। जहां पर अगले दिन सुबह उठकर दादी को स्नान कराना, बाल बांधना और भोजन कराने के बाद घर लौटता था।
कोट :-
मकान टूटने के कारण को लेकर जांच कराई जाएगी। इसके अलावा पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। - प्रतीक्षा पांडेय, एसडीएम शिकारपुर