बदलाव: बिहार में कुर्सियां पीएम के दौरे से पहले बदलेंगी? सरकार और जदयू में बदलावों की चर्चा का तर्क समझें
Bihar News : निशांत कुमार डिप्टी सीएम बनेंगे, संजय झा केंद्रीय मंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे, ललन सिंह किनारे लगेंगे, विजय कुमार चौधरी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे, बिजेंद्र प्रसाद यादव रिटायर होंगे- इतनी चर्चाएं हैं। कितनी पक्की, कितनी कच्ची?
विस्तार
बिहार की राजनीति में गजब खेला हमेशा होता रहा है। पहले कई दफा सरकार बदली, चेहरा नहीं। फिर सरकार नहीं बदली, चेहरा बदल गया। लंबे समय से बिहार में जनादेश स्पष्ट मिल रहा, लेकिन यह सब भी राज्य देखता रहा है। राजभवन (अब, लोकभवन) भी अचानक इस्तीफा-शपथ से चौंकता रहा है। नवंबर 2025 में सरकार बनने के बाद से कई बार शपथ ग्रहण हो चुका है। एक बार फिर इसकी चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार सरकार के एक साल पर आ रहे हैं, उसके पहले शपथ ग्रहण होगा या बाद; यह स्पष्ट नहीं। लेकिन, भूमिका बन रही है। जैसे नीतीश कुमार नहीं जाएंगे, नहीं जाएंगे; होते-होते अचानक वह चले गए। उसी तरह की कुछ चर्चाएं हैं। इनके पीछे जो तर्क दिए जा रहे, वह मीडिया में कपोल-कल्पित नहीं हैं। राजनीतिक हलके में हैं। आइए, एक-एक को समझते हैं।
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निशांत कुमार डिप्टी सीएम बनेंगे? क्यों-कितना जरूरी
जब नीतीश कुमार ने गद्दी छोड़ने की बात कही थी, तब निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग तेजी से उठी थी। फिर बात आई कि निशांत को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए। वह बात उस समय टल गई। नीतीश-समर्थक जिद पर अड़े, मगर जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस बात पर जाकर राजी हुए कि निशांत को फिलहाल सरकार में बतौर मंत्री प्रवेश देकर देखा जाए। निशांत स्वास्थ्य मंत्री बने। क्षमता पर सवाल उठे तो जवाब निरीक्षण, कार्रवाई और सख्ती से दिया। अब माहौल बन गया है कि उन्हें डिप्टी सीएम की कुर्सी दी जाए तो 1. जदयू और बिहार सरकार के अंदर 'लव-कुश' समीकरण सटीक हो जाएगा, सीएम कुशवाहा तो उप मुख्यमंत्री कुर्मी और 2. नीतीश कुमार के कुर्सी से हटने के बाद जदयू के कमजोर होने की चर्चाओं पर विराम लगेगा, क्योंकि निशांत का कद बढ़ जाएगा।
विजय कुमार चौधरी जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे?
नीतीश कुमार जब तक मुख्यमंत्री रहे, विजय कुमार चौधरी उनके हमेशा साथ-साथ रहे। साये की तरह। नीतीश की बातों का अक्षरश: पालन के लिए विजय कुमार चौधरी को जाना जाता है। यही कारण है कि सरकार में जदयू की ओर से सबसे मजबूत स्थिति में विजय कुमार चौधरी ही रहे। उप मुख्यमंत्री बनाए गए और मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बगल में हमेशा नीतीश-प्रतिनिधि के तौर पर नजर आते हैं। पार्टी से बाहर किए जाने के पहले तक, आरसीपी सिंह सबसे ज्यादा जदयू को संगठित करने में थे। विजय कुमार चौधरी उस हिसाब से नीतीश के पुराने विश्वासपात्र भी हैं ओर उन्हें पार्टी की कमान सौंपने की बात पहले भी कई बार हो चुकी है। ऐसे में अगर निशांत डिप्टी सीएम बनाए गए तो विजय कुमार चौधरी भी कुर्सी छोड़कर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं, वैसे इसके लिए रिटायर हो रहे बिजेंद्र प्रसाद यादव का पद छोड़ना काफी होगा।
उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव रिटायर होंगे?
जदयू के सबसे उम्रदराज विधाकय हैं बिजेंद्र प्रसाद यादव। सीमांचल में जदयू का चेहरा भी हैं। नीतीश कुमार के साथ लगातार मंत्री रहे। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतरे तो जदयू की ओर से एक उप मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम आना तय था। वैसे जब वह शपथ लेने जा रहे थे, तब भी स्वास्थ्य पर सवाल उठा था। उम्र के कारण अनुभव है, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर परेशानी है। इस कारण वह खुद भी रिटायर होना चाहते हैं। जदयू उन्हें रिटायर कर निशांत को डिप्टी सीएम बनाएगा, इसकी चर्चा फाइनल की स्थिति में है।
संजय कुमार झा केंद्रीय मंत्री की कुर्सी पर बैठेंगे?
नीतीश कुमार ने जब संजय कुमार झा को जनता दल यूनाईटेड का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो आश्चर्य का मसला नहीं था। संजय झा कोरोना काल में जदयू का सबकुछ मैनेज कर रहे थे। 2020 का चुनाव भी। चिराग पासवान ने जिस तरह से जदयू को उखाड़ने की तैयारी की थी, संजय झा उसे बचाने में काफी हद तक कामयाब रहे। 2025 के चुनाव में भी उनका योगदान देखा गया और पार्टी ने जबरदस्त वापसी की। इस लिहाज से पार्टी के मौजूदा पद से उन्हें हटाने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर उन्हें केंद्र सरकार में मौका दिया जाना है तो यह कुर्सी छोड़नी होगी। ऐसे में इस कुर्सी पर विजय कुमार चौधरी का नाम चल निकलेगा। इसी संभावना के साथ अभी भी चल रहा है। संजय झा को केंद्रीय मंत्री बनाने के लिए जदयू को राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को हटाना जरूरी नहीं है, हालांकि जदयू के अंदर इस तरह की बात भी है। आरसीपी सिंह जब केंद्र में जदयू कोटे से मंत्री थे तो वहां ललन सिंह की एंट्री में जैसी परेशानी आई, वह शायद भाजपा संजय झा के नाम पर नहीं करे।
ललन सिंह किनारे लगेंगे, इस चर्चा में कितना दम?
राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 2023 में दिसंबर में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से मुक्त किए गए थे, क्योंकि कहा जाता है कि वही भाजपा-जदयू गठबंधन की वापसी में रोड़ा थे। लेकिन, फिर जब एनडीए में जदयू की वापसी हुई तो ललन सिंह को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी बनाया गया। मतलब, उन चर्चाओं पर कुछ हद तक विराम लग गया। लेकिन, इस बार बात जदयू के अंदर ही गांठ की है। विधान परिषद् चुनाव में जदयू को परेशानी का सामना करना पड़ा। हार का भी। राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा तो लगे रहे, लेकिन ललन सिंह की जदयू विधायक अनंत सिंह के प्रति आस्था के कारण बहुत हंगामा मचा। बाहरी तौर पर हंगामा नहीं दिखे, इसके लिए संजय झा कई मौकों पर ललन सिंह के साथ नजर आए। लेकिन, पटना स्नातक सीट पर जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ पार्टी विधायक अनंत सिंह का जन सुराज को समर्थन और ललन सिंह की बाहुबली MLA के प्रति नरमी ने जदयू के अंदर सभी को असहज कर रखा है। नीतीश भी ललन सिंह से मिलने गए, लेकिन वह डिगे नहीं। चुनाव में नीरज जीत गए तो उन्होंने भी कहा कि वह अलग से उन्हें मिलने, आशीर्वाद लेने नहीं जा रहे हैं। मतलब, यह चैप्टर बहुत जटिल हो गया है। यही कारण है कि ललन सिंह को बैठाने की चर्चा गरम है। हालांकि, ललन सिंह हटेंगे- यह कोई सामने आकर नहीं कह रहा और न कह सकता है।
अर्थात्
20 नवंबर को बिहार सरकार का एक साल पूरा हो रहा है और 21 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार आ रहे हैं। इससे पहले इन पांच चर्चाओं में से कई के मूर्त रूप लेने की बात गरम है। मौसम से ज्यादा। ऐसे में क्या-क्या संभव होगा, इसपर अभी जदयू में कोई कुछ नहीं बोल रहा। भाजपा ने तो चुप्पी साध ही रखी है, क्योंकि यह जदयू का अंदरूनी मसला है। अब सभी की नजर लोकभवन के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जाने वाली चिट्ठी पर है, जिसके लिए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की अंतिम हरी झंडी का इंतजार है।