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जेनी प्रकरण: हरक की सत्ता के सामने रही खामोश, अब सच बोलूंगी, बिना नंबर प्लेट की कार से पहुंचीं जेनी, उठे सवाल

Sat, 07 Nov 2026 09:10 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 07 Nov 2026 09:10 PM IST
सार

करीब दो दशक पुराने जेनी प्रकरण में प्रेसवार्ता के दौरान कई ऐसे पहलू सामने आए, जिन्होंने मीडिया का ध्यान खींचा। जेनी ने जहां उस दौर की चुप्पी की वजह बताई, वहीं उनकी बिना नंबर प्लेट वाली नई एसयूवी भी चर्चा का विषय बन गई।

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Jenny breaks silence on 2003 harak singh case says she could not speak against his power at the age of 16
जेनी की प्रेसकांफ्रेंस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

हरक की सत्ता की पावर के सामने मैं कुछ बोल नहीं पाई। किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। यहां बेटे को जानवरों के बीच नहीं रखना चाहती थी। इसलिए अपने घर असम लौट गई थी। जेनी ने मीडिया के सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। कहा, तब 16 साल की थी, समझ नहीं थी। अब मुझे न्याय चाहिए।

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प्रेस क्लब में दोपहर करीब 12:30 बजे एक चमचमाती नई एसयूवी रुकती है। इसे मास्क लगाए एक युवक चला रहा था और पीछे मास्क लगाए बैठी थी जेनी। जैसे ही मीडिया के सामने आई तो पूरे आत्मविश्वास से। जेनी ने अपनी आपबीती सुनाने से पहले ही मीडियाकर्मियों को बोल दिया कि जो भी सवाल हो, पूछ सकते हैं। इसके बाद अपने साथ 2003 और इसके बाद हुआ पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार बताया। कई बार भावुक भी हुई लेकिन अपनी पीड़ा रखने को दृढ़ दिखीं।

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जेनी ने कहा कि उनके साथ जब ये घटना हुई थी, उसके बाद से 23 साल में वह केवल एक बार अपने बेटे का बर्थ सर्टिफिकेट लेने आई। हरक के दबाव में पुलिस ने यहां से उन्हें भगा दिया था। कहा कि हरक मंत्री थे और उनकी पावर के कारण मैं कभी यहां नहीं आ पाई लेकिन मुझे यहां की खबरें पता चलती रहती थीं।

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जेनी प्रकरण के बारे में सुना तो चली आई

जेनी से जब पूछा गया कि इतने साल बाद क्यों आई तो कहा कि हरक के डर से नहीं आ पाई थी। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब जेनी प्रकरण के बारे में बात की तो मुझे न्याय की उम्मीद जगी। फिर पता चला कि कई नेता मेरा नाम, डीएनए टेस्ट लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इसलिए यहां आई हूं। किसी के कहने से नहीं आई।

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सीबीआई ने जांच की औपचारिकता की

जेनी ने कहा कि सीबीआई ने जांच की केवल औपचारिकता की। उनका एक वकील था जो उनसे केवल साइन कराने आता था। मुझे नहीं पता था कि क्या लिखा हुआ था उसमें। सीबीआई भी केवल एक बार ही मिली है। फिर कैसे जांच पूरी हो गई। उन्होंने इसलिए दोबारा सीबीआई जांच की मांग उठाई। जब उनसे नई कार के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि किराए पर लेकर आई हैं। हालांकि कार पर नंबर प्लेट भी नहीं थी।



 

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