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Delhi NCR News: नारों से आगे, अनोखे अंदाज में दिखा विरोध, महारैली में छाए दूल्हे, गांधी और तीन शेर
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500 मीटर लंबी मतदाता सूची से लेकर गीत, शायरी और लोकनृत्य के जरिए भी उठाए चुनाव और एसआईआर से जुड़े सवाल
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन की महारैली में सियासी नारों और भाषणों के साथ विरोध के कई अनूठे तरीके भी देखने को मिले। देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोगों ने पहनावे, गीत, शायरी और प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के जरिए चुनाव और एसआईआर के मुद्दे उठाए। कोई 500 मीटर लंबी मतदाता सूची लेकर पहुंचा तो किसी ने दूल्हे का रूप धरा। किसी ने प्रधानमंत्री के सीने का एक्सरे बनवाया तो किसी ने गीत के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा। गांधी जी की वेशभूषा में पहुंचे प्रदर्शनकारी से लेकर शेर बने तीन युवकों तक, हर किसी का अंदाज अलग था।
रामबीर और दीनानाथ अपने साथ करीब 500 मीटर लंबी मतदाता सूची लेकर पहुंचे। उनका दावा था कि इसमें एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए 90 लाख लोगों के नाम दर्ज हैं। सूची की लंबाई ने लोगों का ध्यान खींचा। दोनों ने इसके जरिए मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर विरोध जताया। अंबेडकर नगर निवासी तबरेज शेरवानी पहनकर और सिर पर पगड़ी बांधकर दूल्हे के रूप में महारैली में पहुंचे। उनका यह पहनावा भीड़ में अलग नजर आया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।
महिला प्रदर्शनकारी नैशली नुसरत अली अपने साथ एक प्रतीकात्मक एक्सरे लेकर पहुंचीं। इस पर लिखा था- 'पीएम मोदी के सीने में'। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और ईवीएम की तस्वीरें भी बनाई गई थीं। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति के जरिए उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया। बिहार से आए अफसर नवाब, जिन्हें लोग छोटा लालू भी कहते हैं, एक गीत लिखकर लाए थे। इसके बोल थे- 'ज्ञानेश की मर्जी, कौन है वोटर असली, कौन है फर्जी...'। उन्होंने गीत के जरिए मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर तंज कसा।
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गांधी बने संदीप, तीन शेरों ने बटोरी सुर्खियां
गुजरात से आए संदीप महात्मा गांधी की वेशभूषा में पहुंचे। उन्हें देखकर लोग दूर से ही आकर्षित होते और पास आकर तस्वीरें खिंचवाते। वहीं, बंगलूरू से आए तीन युवकों ने शेर का रूप धारण किया था। सिर पर शेर के बालों जैसी नकली कैप और शरीर पर धारियों वाले पेंट से उनका हुलिया बिल्कुल अलग दिख रहा था।
लोकनृत्य से आदिवासी संस्कृति की झलक
झारखंड से आईं आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों की धुन पर नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने सियासी माहौल के बीच लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं की छटा बिखेरी।
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ज्योति सिंह
नई दिल्ली। इंडिया गठबंधन की महारैली में सियासी नारों और भाषणों के साथ विरोध के कई अनूठे तरीके भी देखने को मिले। देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोगों ने पहनावे, गीत, शायरी और प्रतीकात्मक प्रदर्शनों के जरिए चुनाव और एसआईआर के मुद्दे उठाए। कोई 500 मीटर लंबी मतदाता सूची लेकर पहुंचा तो किसी ने दूल्हे का रूप धरा। किसी ने प्रधानमंत्री के सीने का एक्सरे बनवाया तो किसी ने गीत के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा। गांधी जी की वेशभूषा में पहुंचे प्रदर्शनकारी से लेकर शेर बने तीन युवकों तक, हर किसी का अंदाज अलग था।
रामबीर और दीनानाथ अपने साथ करीब 500 मीटर लंबी मतदाता सूची लेकर पहुंचे। उनका दावा था कि इसमें एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए 90 लाख लोगों के नाम दर्ज हैं। सूची की लंबाई ने लोगों का ध्यान खींचा। दोनों ने इसके जरिए मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर विरोध जताया। अंबेडकर नगर निवासी तबरेज शेरवानी पहनकर और सिर पर पगड़ी बांधकर दूल्हे के रूप में महारैली में पहुंचे। उनका यह पहनावा भीड़ में अलग नजर आया और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना।
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महिला प्रदर्शनकारी नैशली नुसरत अली अपने साथ एक प्रतीकात्मक एक्सरे लेकर पहुंचीं। इस पर लिखा था- 'पीएम मोदी के सीने में'। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और ईवीएम की तस्वीरें भी बनाई गई थीं। इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति के जरिए उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया। बिहार से आए अफसर नवाब, जिन्हें लोग छोटा लालू भी कहते हैं, एक गीत लिखकर लाए थे। इसके बोल थे- 'ज्ञानेश की मर्जी, कौन है वोटर असली, कौन है फर्जी...'। उन्होंने गीत के जरिए मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पर तंज कसा।
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गांधी बने संदीप, तीन शेरों ने बटोरी सुर्खियां
गुजरात से आए संदीप महात्मा गांधी की वेशभूषा में पहुंचे। उन्हें देखकर लोग दूर से ही आकर्षित होते और पास आकर तस्वीरें खिंचवाते। वहीं, बंगलूरू से आए तीन युवकों ने शेर का रूप धारण किया था। सिर पर शेर के बालों जैसी नकली कैप और शरीर पर धारियों वाले पेंट से उनका हुलिया बिल्कुल अलग दिख रहा था।
लोकनृत्य से आदिवासी संस्कृति की झलक
झारखंड से आईं आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों की धुन पर नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने सियासी माहौल के बीच लोक संस्कृति और आदिवासी परंपराओं की छटा बिखेरी।