धोखाधड़ी: फौजी पहचान का रौब दिखा वन विभाग में नौकरी का दिया झांसा, 11.50 लाख ठगे; छह महीने फर्जी काम भी कराया
बेटे की नौकरी छिनने के डर से जितेंद्र ने पत्नी के गहने गिरवी रखे और कर्ज लेकर दो बार में 5.50-5.50 लाख रुपये दीपक और पूजा को दिए। इसके अलावा 10 हजार, 35 हजार और 40 हजार रुपये समेत अलग-अलग किस्तों में कुल 3 लाख 20 हजार 700 रुपये ऑनलाइन भी ट्रांसफर कराए।
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रामगढ़ताल थाना क्षेत्र में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 11.50 लाख रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को फौज से जुड़ा बताकर युवक के पिता को झांसे में लिया। बेटे को वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी दिलाने का दावा किया और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर थमा दिया। इसके बाद बिहार के मोतिहारी में फर्जी कार्यालय बनाकर युवक से छह महीने तक काम कराया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने एसएसपी से शिकायत की। उनके आदेश पर शुक्रवार रात पुलिस ने बाप-बेटी समेत तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा में प्राथमिकी दर्ज की है।
शिवपुरी नई कॉलोनी, मिर्जापुर निवासी जितेंद्र कुमार राजभर मैरिज हॉल में काम करते हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि एक शादी समारोह में उनकी मुलाकात विनोद कुमार मिश्रा, उसके बेटे दीपक और बेटी पूजा से हुई थी। आरोपियों ने खुद को फौज का आदमी बताया और बड़े-बड़े नामी-गिरामी लोगों से जान-पहचान होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि अब तक 15 से 20 लोगों की नौकरी लगवा चुके हैं। इसके लिए सिर्फ रुपये का इंतजाम करना होगा। दीपक और पूजा ने भी पिता की बात का समर्थन किया। झांसे में आकर जितेंद्र ने बेटे सुनील कुमार राजभर की नौकरी के लिए शुरुआत में 50 हजार रुपये नकद दे दिए।
आरोपी दीपक सुनील को मेडिकल कराने के लिए लखनऊ ले गया। कुछ दिन बाद उसके मोबाइल पर वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड पद का ज्वाइनिंग लेटर भेजा गया। चार मई 2024 को बिहार के मोतिहारी में ज्वाइन करने के लिए कहा गया। भरोसा दिलाया कि स्टेशन पर उनका आदमी मिलेगा। सुनील मोतिहारी पहुंचा तो वहां कोई नहीं मिला। तीन दिन होटल में रहने के बाद उसने चंद सरैया, पिपरा कोठी में नवीन कुमार के यहां किराये पर कमरा लिया।
बाद में ज्वाइनिंग लेटर और पहचान पत्र की जांच कराई गई तो दोनों फर्जी निकले। इसके बाद जितेंद्र ने एसएसपी से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर 30 अक्तूबर की रात रामगढ़ताल थाने में विनोद कुमार मिश्रा, उसके बेटे दीपक और बेटी पूजा के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। इस संबंध में एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच उपनिरीक्षक आरती यादव को सौंपी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फर्जी आईकार्ड और वर्दी देकर छह महीने कराया काम
कुछ समय बाद दीपक मोतिहारी पहुंचा और सुनील को एक कार्यालय में ले गया। वहां उसका फर्जी पहचान पत्र बनवाकर वर्दी पहनाई गई और काम पर लगा दिया गया। उससे कार्यालय के रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी कराए जाते रहे। इसी दौरान आरोपियों ने नौकरी पक्की कराने और ज्वाइनिंग के नाम पर 11 लाख रुपये और मांगे। साथ ही धमकी दी कि रकम नहीं देने पर नौकरी चली जाएगी।
पत्नी के गहने गिरवी रखकर दिए 11 लाख रुपये
बेटे की नौकरी छिनने के डर से जितेंद्र ने पत्नी के गहने गिरवी रखे और कर्ज लेकर दो बार में 5.50-5.50 लाख रुपये दीपक और पूजा को दिए। इसके अलावा 10 हजार, 35 हजार और 40 हजार रुपये समेत अलग-अलग किस्तों में कुल 3 लाख 20 हजार 700 रुपये ऑनलाइन भी ट्रांसफर कराए। करीब छह महीने तक सुनील से कार्यालय में काम कराने के बाद दीपक फरार हो गया। वहीं, विनोद ने फोन उठाना बंद कर दिया।