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Panchkula News: बच्ती पर हमले की खुलेंगी परतें, निलंबित प्रिंसिपल और टीचर्स से तीखे सवालों की बौछार
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बीईओ टीम की सीसीटीवी फुटेज, कक्षाओं में शिक्षकों की मौजूदगी और कमरे खुले छोड़ने की लापरवाही पर केंद्रित रही जांच
एडीसी की कमेटी ने भी तेज की तफ्तीश, अन्य स्टाफ पर भी गिर सकती है गाज
आदित्य शर्मा
पंचकूला। सरकारी स्कूल में पांच वर्षीय बच्ची के साथ हुई बेरहमी की घटना की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शिक्षा विभाग, सीबीएसई और एडीसी की तीन अलग-अलग समितियां एक साथ जांच में जुटी हैं। दो अध्यापिकाओं और प्रिंसिपल नीलू के निलंबन के बाद सोमवार को स्कूल में बीईओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने दो घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान निलंबित प्रिंसिपल, दोनों अध्यापिकाएं और स्कूल का पूरा स्टाफ मौजूद रहा। टीम ने लापरवाही, अनदेखी और एक्शन लेने में हुई देरी की हर कड़ी को खंगाला।
गौरतलब है कि इस घटना के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा ने इसे सिस्टम की खामी बताते हुए संज्ञान लिया था। शिक्षा विभाग ने पहले दो अध्यापिकाओं और फिर प्रिंसिपल नीलू को निलंबित कर दिया था। विभाग ने अब स्कूलों में दिन में दो बार बच्चों की गिनती और काउंसलिंग अनिवार्य कर दी है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार की पूछताछ के बाद रिपोर्ट में कई अन्य स्टाफ सदस्यों की लापरवाही भी सामने आ सकती है, जिसके बाद उन पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
क्या-क्या हुई पूछताछ
बीईओ की टीम में दो सीनियर प्रिंसिपल भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने सबसे पहले विवाद के कारणों को समझने की कोशिश की। इसके बाद चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस रहा।
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पहला- घटना के समय स्टाफ की मौजूदगी। पूछताछ में सामने आया कि किस शिक्षक की किस कक्षा में ड्यूटी थी, कक्षा में कितने बच्चे मौजूद थे और सहायक स्टाफ कहां तैनात था। जांच में यह तथ्य पहले ही सामने आ चुका है कि स्कूल में 30 बच्चों पर एक शिक्षक के मानक के विपरीत 70 बच्चों पर एक ही शिक्षक तैनात था।
दूसरा- सीसीटीवी की मॉनिटरिंग। प्रिंसिपल के कमरे में ही सभी सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग स्क्रीन लगी है। ऐसे में टीम ने सवाल उठाया कि जब बच्ची स्कूल से बाहर निकली, तब प्रिंसिपल स्कूल में क्यों नहीं रुकीं? स्कूल छोड़ते समय उन्होंने किसी अन्य स्टाफ को निगरानी की जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी? क्या फुटेज को समय पर देखा गया?
तीसरा- खुले कमरों की लापरवाही। यह जांच का सबसे अहम बिंदु है। बीते दिनों स्कूल में परीक्षा केंद्र के निरीक्षण के लिए बाहर से टीम आई थी। उसे दिखाने के लिए पहली मंजिल के सभी कमरे खोल दिए गए, लेकिन बाद में वॉचमैन ने ताला नहीं लगाया। इसी खुले कमरे में तीसरी कक्षा के छात्र ने बाल वाटिका की बच्ची के साथ वारदात की। टीम ने सहायक स्टाफ और वॉचमैन से इसी लापरवाही पर जवाब-तलब किया।
चौथा- मिड-डे मील और खेल नर्सरी। टीम ने मिड-डे मील परोसने के समय मौजूद स्टाफ, स्कूल परिसर में चल रही खेल नर्सरी के संचालक और उसकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई।
डीईईओ और एडीसी की समानांतर जांच
डीईईओ सुमन चौधरी की अध्यक्षता में बनी समिति वारदात के बाद की पूरी चेन की जांच कर रही है। बच्ची को स्कूल से अस्पताल ले जाने, वहां से रेफर करने और पीजीआई में उपचार तक किस स्तर पर देरी हुई, इसकी भी पड़ताल हो रही है। डीईईओ ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच जारी है, रिपोर्ट जल्द ही मुख्यालय भेजी जाएगी। उधर, जिला प्रशासन की ओर से एडीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। यह कमेटी सुरक्षा मानकों, मानवाधिकार आयोग की टिप्पणी और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
अधिकारी कोट
बीईओ के नेतृत्व में बनी टीम ने स्कूल में जाकर जांच की है। यह जांच हर उस बिंदू से जुड़ी थी, जो बच्ची के हमले में सामने आई स्टाॅफ की लापरवाही, अनदेखी और कार्रवाई में देरी के अलावा सामने आए आरोपों से संबंधित है।इस दाैरान मामले में अब तक निलंबित प्रिंसपिल और अध्यापिकाएं से भी पूछताछ हुई है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट बना कर शिक्षा निदेशकों को भेजी जाएगी।-सुमन चाैधरी, डीईईओ, जिला माैलिक शिक्षा विभाग
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एडीसी की कमेटी ने भी तेज की तफ्तीश, अन्य स्टाफ पर भी गिर सकती है गाज
आदित्य शर्मा
पंचकूला। सरकारी स्कूल में पांच वर्षीय बच्ची के साथ हुई बेरहमी की घटना की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। शिक्षा विभाग, सीबीएसई और एडीसी की तीन अलग-अलग समितियां एक साथ जांच में जुटी हैं। दो अध्यापिकाओं और प्रिंसिपल नीलू के निलंबन के बाद सोमवार को स्कूल में बीईओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने दो घंटे तक गहन पूछताछ की। इस दौरान निलंबित प्रिंसिपल, दोनों अध्यापिकाएं और स्कूल का पूरा स्टाफ मौजूद रहा। टीम ने लापरवाही, अनदेखी और एक्शन लेने में हुई देरी की हर कड़ी को खंगाला।
गौरतलब है कि इस घटना के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा ने इसे सिस्टम की खामी बताते हुए संज्ञान लिया था। शिक्षा विभाग ने पहले दो अध्यापिकाओं और फिर प्रिंसिपल नीलू को निलंबित कर दिया था। विभाग ने अब स्कूलों में दिन में दो बार बच्चों की गिनती और काउंसलिंग अनिवार्य कर दी है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार की पूछताछ के बाद रिपोर्ट में कई अन्य स्टाफ सदस्यों की लापरवाही भी सामने आ सकती है, जिसके बाद उन पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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क्या-क्या हुई पूछताछ
बीईओ की टीम में दो सीनियर प्रिंसिपल भी शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने सबसे पहले विवाद के कारणों को समझने की कोशिश की। इसके बाद चार मुख्य बिंदुओं पर फोकस रहा।
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पहला- घटना के समय स्टाफ की मौजूदगी। पूछताछ में सामने आया कि किस शिक्षक की किस कक्षा में ड्यूटी थी, कक्षा में कितने बच्चे मौजूद थे और सहायक स्टाफ कहां तैनात था। जांच में यह तथ्य पहले ही सामने आ चुका है कि स्कूल में 30 बच्चों पर एक शिक्षक के मानक के विपरीत 70 बच्चों पर एक ही शिक्षक तैनात था।
दूसरा- सीसीटीवी की मॉनिटरिंग। प्रिंसिपल के कमरे में ही सभी सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग स्क्रीन लगी है। ऐसे में टीम ने सवाल उठाया कि जब बच्ची स्कूल से बाहर निकली, तब प्रिंसिपल स्कूल में क्यों नहीं रुकीं? स्कूल छोड़ते समय उन्होंने किसी अन्य स्टाफ को निगरानी की जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी? क्या फुटेज को समय पर देखा गया?
तीसरा- खुले कमरों की लापरवाही। यह जांच का सबसे अहम बिंदु है। बीते दिनों स्कूल में परीक्षा केंद्र के निरीक्षण के लिए बाहर से टीम आई थी। उसे दिखाने के लिए पहली मंजिल के सभी कमरे खोल दिए गए, लेकिन बाद में वॉचमैन ने ताला नहीं लगाया। इसी खुले कमरे में तीसरी कक्षा के छात्र ने बाल वाटिका की बच्ची के साथ वारदात की। टीम ने सहायक स्टाफ और वॉचमैन से इसी लापरवाही पर जवाब-तलब किया।
चौथा- मिड-डे मील और खेल नर्सरी। टीम ने मिड-डे मील परोसने के समय मौजूद स्टाफ, स्कूल परिसर में चल रही खेल नर्सरी के संचालक और उसकी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई।
डीईईओ और एडीसी की समानांतर जांच
डीईईओ सुमन चौधरी की अध्यक्षता में बनी समिति वारदात के बाद की पूरी चेन की जांच कर रही है। बच्ची को स्कूल से अस्पताल ले जाने, वहां से रेफर करने और पीजीआई में उपचार तक किस स्तर पर देरी हुई, इसकी भी पड़ताल हो रही है। डीईईओ ने बताया कि सभी पहलुओं पर जांच जारी है, रिपोर्ट जल्द ही मुख्यालय भेजी जाएगी। उधर, जिला प्रशासन की ओर से एडीसी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने भी अपनी तफ्तीश तेज कर दी है। यह कमेटी सुरक्षा मानकों, मानवाधिकार आयोग की टिप्पणी और स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही पर रिपोर्ट तैयार कर रही है।
अधिकारी कोट
बीईओ के नेतृत्व में बनी टीम ने स्कूल में जाकर जांच की है। यह जांच हर उस बिंदू से जुड़ी थी, जो बच्ची के हमले में सामने आई स्टाॅफ की लापरवाही, अनदेखी और कार्रवाई में देरी के अलावा सामने आए आरोपों से संबंधित है।इस दाैरान मामले में अब तक निलंबित प्रिंसपिल और अध्यापिकाएं से भी पूछताछ हुई है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट बना कर शिक्षा निदेशकों को भेजी जाएगी।-सुमन चाैधरी, डीईईओ, जिला माैलिक शिक्षा विभाग