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ईरान में फिर युद्ध का खतरा: कतर के समझौते पर विचार करने की सैन्य नेतृत्व को सलाह, क्या टलेगा अमेरिका से टकराव?

Tue, 03 Nov 2026 04:58 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 03 Nov 2026 04:58 PM IST
सार

ईरान और अमेरिका के बीच फिर युद्ध का खतरा बढ़ रहा है। ईरान के शीर्ष नेता सैन्य नेतृत्व से कतर की मध्यस्थता वाले समझौते पर विचार करने को कह रहे हैं। राष्ट्रपति पेजेशकियन बातचीत चाहते हैं, जबकि सैन्य नेतृत्व को टकराव की आशंका है। कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत भी तेज है। ऐसे में क्या कूटनीति युद्ध रोक पाएगी या दोनों देश फिर आमने-सामने होंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Iran Faces Renewed War Threat: Top Leaders Urge Military to Consider Qatar-Brokered Deal Amid US Tensions
ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान और अमेरिका के बीच फिर सैन्य टकराव का खतरा बढ़ रहा है। ईरान के भीतर युद्ध की आशंका को सबसे संभावित स्थिति माना जा रहा है। इस बीच देश के शीर्ष राजनीतिक नेता सैन्य नेतृत्व को कतर की मध्यस्थता वाले समझौते पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची चाहते हैं कि ईरान बातचीत के रास्ते को खुला रखे। उनका जोर कतर की ओर से आए प्रस्ताव के जरिए संघर्ष रोकने पर है।

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कतर के दूत हाल ही में प्रस्ताव लेकर सीधे तेहरान पहुंचे थे। उनका मिशन सीमित था। वे लंबी बातचीत करने नहीं आए थे। उन्हें सिर्फ यह जानना था कि ईरान इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है। दूसरी ओर, ईरान का सैन्य नेतृत्व इस समझौते को लेकर आशंकित है। सैन्य रणनीतिकारों को लगता है कि अमेरिका के साथ फिर से सीधा संघर्ष हो सकता है। ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व कूटनीति को मौका देना चाहता है, जबकि सैन्य नेतृत्व युद्ध की आशंका को ज्यादा गंभीर मान रहा है।
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ईरान के राष्ट्रपति युद्ध के बजाय बातचीत पर क्यों दे रहे जोर?
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि उनकी सरकार बाहरी पक्षों के कारण पैदा हुई समस्याओं को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करेगी। तेहरान में क्षेत्रीय गवर्नरों और महापौरों के साथ बैठक में उन्होंने यह बात कही। पेजेशकियन के अनुसार, सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सरकार को कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए कुछ अधिकार दिए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दुश्मन ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर सकते। पेजेशकियन ने अमेरिका पर सीमापार व्यापार रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सहयोग से ऐसी कोशिशों को नाकाम करेगी।
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कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में कितनी आगे बढ़ी बातचीत?
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष खत्म करने के लिए कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत तेज हो गई है। उन्होंने इसे मौजूदा हालात की गंभीरता से जुड़ा बताया। अराघची के अनुसार, अलग-अलग पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच दौरे हो रहे हैं। कई फोन पर बातचीत हुई है। संदेशों का आदान-प्रदान भी जारी है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत और रक्षा, दोनों के लिए तैयार है। अराघची ने यह भी कहा कि अगर ईरान की शर्तें मान ली जाती हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा।


अमेरिका को ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया और किस बात की चेतावनी दी?
22 सितंबर को ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को सात दिन का प्रस्ताव भेजा था। इसका उद्देश्य संघर्ष खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना था। अराघची ने कहा कि ईरान बातचीत और तर्क के आधार पर सकारात्मक पहल के लिए तैयार है। लेकिन इसके लिए दूसरे पक्ष को भी ऐसा ही रुख अपनाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने सैन्य तनाव और बढ़ाया तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा कड़ी होगी। इससे पहले 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरी इलाकों को निशाना बनाकर संयुक्त हमले किए थे। इसी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था।

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