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कर्नाटक एसआईआर विवाद: सिद्धारमैया ने किया 99 लाख वोटरों के नाम कटने का दावा; सीईसी से इस्तीफा क्यों मांगा?
Thu, 05 Nov 2026 05:45 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, बंगलूरू।
एएनआई, बंगलूरू।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 05 Nov 2026 05:45 PM IST
सार
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एसआईआर को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक में पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में 99 लाख से ज्यादा की कमी आई है। उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर आंदोलन को राज्य के जिला और तालुका स्तर तक ले जाने का एलान किया है।
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एसआईआर विवाद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
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कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बृहस्पतिवार को बंगलूरू के फ्रीडम पार्क में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के विरोध प्रदर्शन में एसआईआर को तत्काल रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
उनका आरोप है कि एसआईआर कानून और संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और पात्र मतदाताओं के मतदान का अधिकार छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिद्धारमैया के मुताबिक, यह लड़ाई केवल मतदाता सूची में बदलाव की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा की है।
कर्नाटक में 99 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कैसे घट गए?
सिद्धारमैया ने एसआईआर के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कर्नाटक में पुनरीक्षण से पहले करीब 5.54 करोड़ मतदाता थे। प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई। यानी मतदाताओं की संख्या में 99 लाख से ज्यादा की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या घटना गंभीर मामला है। चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि आखिर किन कारणों से इतने नाम हटाए गए। उन्होंने मांग की कि नाम हटाने की सही वजह सार्वजनिक की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।
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14 बार आपत्ति दर्ज होने का दावा क्यों?
सिद्धारमैया ने एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अधीन काम कर रहे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता आंकड़ों के प्रबंधन और कुछ फैसलों की जानकारी नहीं दिए जाने से जुड़ी थीं। उन्होंने कहा कि आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके फैसले नियमों के मुताबिक और पारदर्शी तरीके से लिए जा रहे हैं या नहीं। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर करीब एक लाख वोट अवैध तरीके से जोड़े जाने का आरोप लगाया था।
यह भी पढ़ें: यूजीसी समता नियम: समीक्षा के लिए समिति बनाएगी केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद क्यों बढ़ा विवाद?
कांग्रेस की क्या योजना?
सिद्धारमैया ने कहा कि एसआईआर रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का आंदोलन जारी रहेगा। एक नवंबर को दिल्ली में भी इस मुद्दे पर बड़ी विरोध रैली आयोजित की गई थी। अब कर्नाटक में आंदोलन को जिला और तालुका स्तर तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांप्रदायिकता और चुनावी गड़बड़ियों के सहारे सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। सिद्धारमैया ने इस लड़ाई को देश का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी।
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उनका आरोप है कि एसआईआर कानून और संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और पात्र मतदाताओं के मतदान का अधिकार छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सिद्धारमैया के मुताबिक, यह लड़ाई केवल मतदाता सूची में बदलाव की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के मतदान के अधिकारों की रक्षा की है।
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कर्नाटक में 99 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कैसे घट गए?
सिद्धारमैया ने एसआईआर के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कर्नाटक में पुनरीक्षण से पहले करीब 5.54 करोड़ मतदाता थे। प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई। यानी मतदाताओं की संख्या में 99 लाख से ज्यादा की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या घटना गंभीर मामला है। चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि आखिर किन कारणों से इतने नाम हटाए गए। उन्होंने मांग की कि नाम हटाने की सही वजह सार्वजनिक की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।
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14 बार आपत्ति दर्ज होने का दावा क्यों?
सिद्धारमैया ने एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अधीन काम कर रहे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार, ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता आंकड़ों के प्रबंधन और कुछ फैसलों की जानकारी नहीं दिए जाने से जुड़ी थीं। उन्होंने कहा कि आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके फैसले नियमों के मुताबिक और पारदर्शी तरीके से लिए जा रहे हैं या नहीं। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर करीब एक लाख वोट अवैध तरीके से जोड़े जाने का आरोप लगाया था।
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कांग्रेस की क्या योजना?
सिद्धारमैया ने कहा कि एसआईआर रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन का आंदोलन जारी रहेगा। एक नवंबर को दिल्ली में भी इस मुद्दे पर बड़ी विरोध रैली आयोजित की गई थी। अब कर्नाटक में आंदोलन को जिला और तालुका स्तर तक ले जाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांप्रदायिकता और चुनावी गड़बड़ियों के सहारे सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है। सिद्धारमैया ने इस लड़ाई को देश का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम बताते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा सत्ता से बाहर हो जाएगी।