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ईरान युद्ध के बीच यूएई के समुद्र में फैला तेल: कई समुद्र तट बंद, क्या समुद्री जीवों पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा?

Mon, 26 Oct 2026 07:00 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अबू धाबी Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 26 Oct 2026 07:00 PM IST
सार

संयुक्त अरब अमीरात के तट पर क्षतिग्रस्त टैंकर से फैल रहा तेल बढ़कर उम्म अल क्वैन के तट के करीब पहुंच गया है। इसके बाद उम्म अल क्वैन, शारजाह और रास अल खैमाह में समुद्र तट बंद कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों ने तेल रिसाव के लिए जेम नंबर-2 टैंकर को जिम्मेदार बताया है। आखिर तेल कितनी दूर तक फैलेगा? क्या इससे समुद्री जीवों और पर्यावरण को बड़ा नुकसान हो सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Oil Spill Spreads Off UAE Coast Amid Iran War: Beaches Closed, Are Marine Animals Facing a Major Threat?
यूएई के तट पर तेल फैलने से बढ़ी चिंता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समुद्री तटों के पास एक क्षतिग्रस्त टैंकर से फैल रहा तेल अब और बड़े इलाके में फैल गया है। सैटेलाइट तस्वीरों में तेल की परत समुद्र में फैलने के साथ उत्तरी अमीरात के तटों के करीब पहुंचती दिखाई दी है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। हालात को देखते हुए कई इलाकों में समुद्र तटों पर लोगों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई है।

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यूरोपीय संघ के कोपरनिकस सैटेलाइट नेटवर्क की 24 अक्तूबर की तस्वीरों में तेल का फैलाव बढ़ता दिखाई दिया है। तस्वीरों के मुताबिक, तेल की गहरी परतें समुद्र में फैल रही हैं और उम्म अल क्वैन के तट के करीब पहुंच गई हैं। यूएई के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया था कि समुद्र में एक टैंकर से रिस रहे तेल को रोकने की कोशिश की जा रही है। देश का जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रालय इस घटना के पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहा है।
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तेल का फैलाव कहां तक पहुंचा और कौन से समुद्र तट बंद हुए?
तेल फैलने की घटना के बाद यूएई के उत्तरी अमीरात में एहतियाती कदम उठाए गए हैं। उम्म अल क्वैन शहर के आसपास के सभी समुद्र तटों और तटीय इलाकों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पड़ोसी शारजाह में अल हमरिया बीच पर भी लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। वहीं, समुद्र तटों और आलीशान रिसॉर्ट के लिए पहचाने जाने वाले रास अल खैमाह में शनिवार को अधिकारियों ने सभी समुद्र तट अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा की। इन कदमों का मकसद लोगों को संभावित खतरे से बचाना और तेल के फैलाव का आकलन करना है।
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किस टैंकर से फैल रहा है तेल और कैसे हुआ हादसा?
यूएई के अधिकारियों ने अभी तक टैंकर का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि तेल फैलने की घटना किस वजह से हुई। हालांकि, विशेषज्ञों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि तेल का रिसाव ‘जेम नंबर-2’ नाम के टैंकर से हो रहा है। जहाजरानी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने इस टैंकर पर किसी अज्ञात वस्तु से हमला हुआ था, जिसके बाद उसमें आग लग गई थी। आग पर बाद में काबू पा लिया गया था। यूरोपीय संघ के कोपरनिकस सेंटिनल-2 उपग्रहों की तस्वीरों में इस टैंकर से तेल फैलने के बड़े निशान दिखाई दिए हैं।

समुद्री जीवों और पर्यावरण को कितना नुकसान हो सकता है?
तेल का समुद्र में फैलना समुद्री पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी अबू धाबी के जल अनुसंधान केंद्र के निदेशक और इंजीनियरिंग के प्रोफेसर निदाल हिलाल ने कहा कि उम्म अल क्वैन के तट के पास तेल फैलना गंभीर पर्यावरणीय चिंता है। उनके मुताबिक, तेल के फैलाव और उसकी दिशा का आकलन होने तक समुद्र तटों को बंद रखना सावधानी भरा कदम है। यूएई के समुद्री क्षेत्र में मछलियों, समुद्री पौधों और मूंगों समेत समृद्ध जैव विविधता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के अनुसार, खाड़ी के पानी में मछलियों की 500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां डॉल्फिन और समुद्री कछुए भी रहते हैं। तेल का फैलाव इन जीवों और उनके रहने के प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचा सकता है।


ईरान युद्ध के बीच समुद्री जहाजों पर हमलों से क्यों बढ़ी चिंता?
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब ईरान के साथ अमेरिका और इस्राइल के युद्ध के बाद खाड़ी क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। समुद्री रास्तों पर जहाजों को निशाना बनाए जाने से व्यापारिक आवाजाही के जोखिम बढ़े हैं और पर्यावरण पर युद्ध के असर को लेकर भी चिंता गहरी हुई है। वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री रास्तों में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के लिहाज से अक्तूबर सबसे खराब महीना रहा है। यूएई में तेल फैलने की घटना ने अब समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की चुनौती भी बढ़ा दी है।

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